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तिरुवनंतपुरम सीपीआई-एम में बड़ी फूट: जॉय के जिला सचिव बने रहने पर शिवनकुट्टी नाराज, बैठक से रहे गैरहाजिर

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तिरुवनंतपुरम सीपीआई-एम में बड़ी फूट: जॉय के जिला सचिव बने रहने पर शिवनकुट्टी नाराज, बैठक से रहे गैरहाजिर

सारांश

तिरुवनंतपुरम में सीपीआई-एम की अंदरूनी दरार खुलकर सामने आई — पूर्व मंत्री शिवनकुट्टी बैठक से गैरहाजिर रहे, क्योंकि नेतृत्व ने विधायक जॉय को जिला सचिव पद पर बनाए रखा। नेमोम सीट गँवाने के बाद शिवनकुट्टी इस प्रभावशाली पद पर नजर लगाए थे।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम नेतृत्व ने वी.
जॉय को तिरुवनंतपुरम जिला सचिव पद पर बनाए रखने का फैसला किया।
शिवनकुट्टी 10 जून 2026 को जिले की अहम पार्टी बैठक से अनुपस्थित रहे, जिसे विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
यह बैठक राज्य सचिव एम.वी.
गोविंदन की अगुवाई में एकेजी सेंटर में हुई; वरिष्ठ नेता पी.
विजयन भी उपस्थित रहे।
शिवनकुट्टी हाल के चुनाव में नेमोम सीट से BJP के राजीव चंद्रशेखर से हार चुके हैं।
सीपीआई-एम की परंपरा के अनुसार विधायक जिला सचिव पद छोड़ते हैं, लेकिन जॉय को अपवाद के तौर पर बनाए रखा गया।
रहीम ने चुनाव के दौरान अंतरिम जिला सचिव का दायित्व संभाला था।

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई-एम] के भीतर गुटीय टकराव 10 जून 2026 को और गहरा गया, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी जिले की एक अहम पार्टी बैठक से अनुपस्थित रहे। उनकी यह गैरहाजिरी वी. जॉय को तिरुवनंतपुरम जिला सचिव पद पर बनाए रखने के नेतृत्व के फैसले के विरोध के रूप में देखी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

सीपीआई-एम नेतृत्व ने हाल ही में यह निर्णय लिया कि वी. जॉय — जो विधायक भी हैं — तिरुवनंतपुरम जिला सचिव के पद पर बने रहेंगे। यह फैसला पार्टी के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की अध्यक्षता में एकेजी सेंटर में आयोजित तिरुवनंतपुरम जिले के सीपीआई-एम राज्य समिति सदस्यों की बैठक में लिया गया। वरिष्ठ नेता पी. विजयन समेत कई अन्य नेताओं ने भी इस चर्चा में भाग लिया।

जॉय ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए जिला सचिव का पद अस्थायी रूप से छोड़ा था, और उस दौरान राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने अंतरिम जिला सचिव का दायित्व संभाला था। चुनाव परिणाम के बाद जॉय को पद पर वापस लाने का निर्णय विवाद का केंद्र बन गया।

शिवनकुट्टी की राजनीतिक स्थिति और दावेदारी

शिवनकुट्टी को एक समय तिरुवनंतपुरम जिले में सीपीआई-एम के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था। हालाँकि, हाल के विधानसभा चुनाव में वे अपनी परंपरागत नेमोम विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केरल प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर से हार गए।

विधायक की सीट और मंत्री पद — दोनों गँवाने के बाद शिवनकुट्टी की नजर तिरुवनंतपुरम जिला सचिव पद पर थी। सीपीआई-एम की 14 जिला कमेटियों में यह पद सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक पदों में से एक माना जाता है, जो राज्य की राजधानी में पार्टी के कामकाज पर व्यापक नियंत्रण देता है।

पार्टी की संगठनात्मक परंपरा से टकराव

सीपीआई-एम की स्थापित संगठनात्मक परंपरा के अनुसार, विधायक बनने के बाद नेता आमतौर पर जिला सचिव का पद छोड़ देते हैं। इस परंपरा के बावजूद जॉय को पद पर बनाए रखने का निर्णय तिरुवनंतपुरम इकाई के भीतर पहले से मौजूद आंतरिक मतभेदों को और उजागर करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सीपीआई-एम कई जिलों में आंतरिक पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही है। गौरतलब है कि तिरुवनंतपुरम इकाई में गुटीय खींचतान नई नहीं है, लेकिन शिवनकुट्टी की खुली अनुपस्थिति ने इसे सार्वजनिक विवाद का रूप दे दिया है।

आम जनता और पार्टी पर असर

नेतृत्व का जॉय को पद पर बनाए रखने का फैसला उन पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए निराशाजनक रहा है जो जिला स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन की उम्मीद लगाए बैठे थे। तिरुवनंतपुरम जिला सचिव का पद राज्य की राजधानी में पार्टी संगठन, चुनावी रणनीति और जन आंदोलनों को दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाता है।

क्या होगा आगे

शिवनकुट्टी की बैठक से गैरहाजिरी और उनके खेमे की नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए एक चुनौती बनी हुई है। यह देखना होगा कि सीपीआई-एम राज्य नेतृत्व इस आंतरिक असंतोष को किस तरह संभालता है और क्या शिवनकुट्टी को पार्टी संगठन में कोई वैकल्पिक भूमिका दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी की परंपरा तोड़कर जॉय को पद पर बनाए रखना नेतृत्व की प्राथमिकताओं को उजागर करता है, लेकिन इसकी कीमत अनुभवी नेताओं के अलगाव के रूप में चुकानी पड़ सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम सीपीआई-एम विवाद क्या है?
सीपीआई-एम नेतृत्व ने विधायक वी. जॉय को तिरुवनंतपुरम जिला सचिव पद पर बनाए रखने का फैसला किया, जिससे पूर्व मंत्री वी. शिवनकुट्टी नाराज हैं। शिवनकुट्टी 10 जून 2026 को हुई जिले की अहम पार्टी बैठक से अनुपस्थित रहे, जिसे उनके विरोध के रूप में देखा जा रहा है।
वी. शिवनकुट्टी क्यों नाराज हैं?
हाल के विधानसभा चुनाव में नेमोम सीट से हारने के बाद शिवनकुट्टी के पास न विधायक पद रहा, न मंत्री पद। वे तिरुवनंतपुरम जिला सचिव का प्रभावशाली पद चाहते थे, लेकिन नेतृत्व ने जॉय को ही उस पद पर बनाए रखा।
सीपीआई-एम की परंपरा के अनुसार विधायक और जिला सचिव पद एक साथ क्यों नहीं रख सकते?
सीपीआई-एम की संगठनात्मक परंपरा के अनुसार विधायक बनने के बाद नेता आमतौर पर जिला सचिव का पद छोड़ देते हैं, ताकि संगठनात्मक और विधायी जिम्मेदारियों में संतुलन बना रहे। तिरुवनंतपुरम में जॉय को इस परंपरा से अपवाद दिया गया है।
तिरुवनंतपुरम जिला सचिव का पद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
सीपीआई-एम की 14 जिला कमेटियों में तिरुवनंतपुरम जिला सचिव का पद सबसे प्रभावशाली संगठनात्मक पदों में से एक माना जाता है। इस पद पर बैठा व्यक्ति राज्य की राजधानी में पार्टी के संगठन, चुनावी रणनीति और जन आंदोलनों पर व्यापक नियंत्रण रखता है।
10 जून की बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक सीपीआई-एम के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन की अगुवाई में एकेजी सेंटर में हुई, जिसमें वरिष्ठ नेता पी. विजयन समेत तिरुवनंतपुरम जिले के राज्य समिति सदस्य शामिल थे। शिवनकुट्टी इस बैठक से अनुपस्थित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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