31 जुलाई 2026
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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था लागू

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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था लागू

सारांश

झारखंड हाईकोर्ट ने साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों को राहत देते हुए सरकार को एक सरल शिकायत प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। इस निर्णय से कई लोगों को मुआवजे की उम्मीद जागी है।

मुख्य बातें

झारखंड हाईकोर्ट का आदेश साइबर ठगी के मामलों में राहत प्रदान करेगा।
सरकार को एक सरल ऑनलाइन शिकायत प्रणाली विकसित करने का निर्देश।
पीड़ितों को मुआवजे की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
जागरूकता अभियान विशेष वर्गों के लिए आयोजित किया जाएगा।
साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर ध्यान देने की आवश्यकता।

रांची, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड में साइबर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत की सूचना आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह एक ऐसी व्यवस्था तुरंत लागू करे, जिससे पीड़ित आसानी से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें और ठगी से हुए नुकसान का मुआवजा मांग सकें।

यह निर्देश शुक्रवार को अधिवक्ता उत्कर्ष सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनाक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच ने पाया कि नियम तो 2003 में ही बने थे, लेकिन 21 साल बीतने के बावजूद आम जनता को इसका फायदा नहीं मिल रहा था। यह प्रणाली अब तक केवल कागजों तक सीमित थी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि झारखंड के आईटी सचिव को ऐसे मामलों की सुनवाई करने और निर्णय लेने का अधिकार पहले ही दिया गया था। लेकिन प्रणाली के सक्रिय न होने के कारण ऑनलाइन धोखाधड़ी या डेटा चोरी का शिकार हुए लोग मुआवजे के लिए कहीं अपील नहीं कर पा रहे थे।

अदालत ने सरकार को एक महीने के भीतर इस तंत्र को पूरी तरह चालू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया जितनी अधिक सरल होगी, उतने ही अधिक लोग इसका उपयोग कर सकेंगे। इसलिए सरकार को एक आसान और यूजर-फ्रेंडली ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है, जिससे लोगों को विभिन्न दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़े।

वर्तमान में ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजने की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन अदालत ने कहा कि इसकी जानकारी व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाई जानी चाहिए। इसके अलावा, अदालत ने सरकार को 15 दिनों के भीतर समाचार पत्रों और अन्य माध्यमों से इस व्यवस्था की जानकारी देने का निर्देश दिया है, ताकि आम जनता को इसके बारे में पता चल सके। साथ ही, छह महीने के भीतर शिकायत दर्ज करने की स्पष्ट और सरल गाइडलाइन तैयार करने और विशेष रूप से छात्रों एवं वरिष्ठ नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने को भी कहा गया है, क्योंकि ये वर्ग अक्सर साइबर ठगी के अधिक शिकार होते हैं।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, डेटा लीक और पहचान की चोरी जैसे साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और बदलते समय के साथ इनका स्वरूप भी जटिल होता जा रहा है। ऐसे में आवश्यक है कि पीड़ितों को समय पर और प्रभावी न्याय मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबर ठगी के पीड़ितों को मुआवजा कैसे मिलेगा?
पीड़ित अब एक सरल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और मुआवजा मांग सकते हैं।
झारखंड हाईकोर्ट का यह आदेश कब लागू होगा?
अदालत ने सरकार को एक महीने के भीतर इस तंत्र को चालू करने का निर्देश दिया है।
क्या सरकार इस व्यवस्था के बारे में जानकारी देगी?
हां, अदालत ने सरकार को 15 दिनों के भीतर इस व्यवस्था की जानकारी जनता तक पहुंचाने का निर्देश दिया है।
क्या पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज करनी आसान होगी?
जी हां, सरकार को एक आसान और यूजर-फ्रेंडली प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव दिया गया है।
क्या विशेष वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलेगा?
हाँ, विशेष रूप से छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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