27 जुलाई 2026
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सावन में टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून: 21 हजार भक्तों के लिए भंडारा, शोभायात्रा की तैयारी पूरी

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सावन में टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून: 21 हजार भक्तों के लिए भंडारा, शोभायात्रा की तैयारी पूरी

सारांश

सावन का महीना और देहरादून का टपकेश्वर महादेव मंदिर — दोनों का संगम इस बार विशेष है। 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारा और भव्य शोभायात्रा की तैयारी के बीच, संत भरत गिरी जी महाराज का सात्विक जीवन का संदेश पूरे देहरादून में गूंज रहा है।

मुख्य बातें

देहरादून के टपकेश्वर महादेव मंदिर में सावन 2025 के दौरान 27 जुलाई से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
श्रद्धालु भांग, धतूरा, बेलपत्र, दही, दूध और जल से रुद्राभिषेक कर रहे हैं।
दिगंबर श्री भरत गिरी जी महाराज ने सावन में सात्विक जीवन और तामसिक वस्तुओं से परहेज का संदेश दिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर महर्षि द्रोणाचार्य की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अश्वत्थामा के जन्म का आशीर्वाद दिया था।
टपकेश्वर महादेव सेवा दल द्वारा भव्य शोभायात्रा और लगभग 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है।

देहरादून के प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में सावन मास 2025 के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 27 जुलाई को सुबह से ही हजारों भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखे, और मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' तथा 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंजता रहा। टपकेश्वर महादेव सेवा दल द्वारा आयोजित भव्य शोभायात्रा और लगभग 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।

मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब

सावन के पावन महीने में उत्तराखंड के इस ऐतिहासिक शिवालय में भक्त व्रत रखकर, सात्विक भोजन ग्रहण कर और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। श्रद्धालु भगवान शिव को भांग, धतूरा, बेलपत्र, दही, दूध और जल अर्पित कर रुद्राभिषेक कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए गए हैं।

संत का संदेश: सात्विक जीवन और शिव आराधना

दिगंबर श्री भरत गिरी जी महाराज ने सावन मास के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय है। उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि इस अवधि में तामसिक वस्तुओं और मदिरा का सेवन न करें तथा यथासंभव दिन में एक बार ही सात्विक भोजन ग्रहण करें। उनके अनुसार, 'सात्विक जीवनशैली अपनाने से मन और शरीर दोनों संतुलित रहते हैं, जिससे व्यक्ति पूरे मन से भक्ति और उपासना कर पाता है।'

भरत गिरी जी महाराज ने यह भी कहा कि सावन मास में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और सभी देवी-देवता भी उनके समीप विराजमान रहते हैं — इसीलिए इस पूरे महीने शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पावन मास में श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ अवश्य पूरी होती हैं।

टपकेश्वर मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

भरत गिरी जी महाराज ने बताया कि टपकेश्वर महादेव मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यहाँ देवताओं, ऋषियों और महर्षि द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी। मान्यता है कि द्रोणाचार्य और माता कृपी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था और यहीं अश्वत्थामा का जन्म हुआ था। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस मंदिर में आते हैं।

शोभायात्रा और भंडारे की तैयारियाँ

टपकेश्वर महादेव सेवा दल सावन पर आयोजित होने वाली भव्य शोभायात्रा की तैयारियों में पूरी निष्ठा से जुटा हुआ है। इस यात्रा के दौरान पूरे देहरादून नगर को सजाया जाएगा और भगवान शिव की भव्य यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही लगभग 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा।

भरत गिरी जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अपने निकटतम शिवालय में प्रतिदिन जल अर्पित करें और यदि संभव हो तो टपकेश्वर महादेव मंदिर पहुँचकर पूजा-अर्चना करें। उन्होंने भक्तों को शोभायात्रा और भंडारे में सहयोग करने और इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने का भी आग्रह किया है।

आगे क्या

सावन मास के शेष सोमवारों पर भी मंदिर में भारी भीड़ की संभावना है। शोभायात्रा और भंडारे के आयोजन से देहरादून में धार्मिक पर्यटन को भी बल मिलने की उम्मीद है। टपकेश्वर महादेव सेवा दल ने सभी श्रद्धालुओं से व्यवस्थित रूप से दर्शन करने और आयोजन में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इतनी बड़ी भीड़ के बीच सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। देहरादून प्रशासन और सेवा दल के समन्वय पर ध्यान देना ज़रूरी है ताकि श्रद्धा का यह उत्सव सुरक्षित और व्यवस्थित रहे।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून का धार्मिक महत्व क्या है?
टपकेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड के देहरादून में स्थित एक प्राचीन शिवालय है, जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ महर्षि द्रोणाचार्य और माता कृपी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था और यहीं अश्वत्थामा का जन्म हुआ था।
सावन में टपकेश्वर महादेव मंदिर में कौन-से आयोजन हो रहे हैं?
सावन 2025 में टपकेश्वर महादेव सेवा दल द्वारा भव्य शोभायात्रा और लगभग 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। शोभायात्रा के दौरान पूरे देहरादून नगर को सजाया जाएगा।
सावन मास में भगवान शिव की पूजा का क्या महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन मास में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और सभी देवी-देवता भी उनके समीप विराजमान रहते हैं। इसी कारण इस पूरे महीने शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
सावन में किन नियमों का पालन करना चाहिए?
दिगंबर श्री भरत गिरी जी महाराज के अनुसार, सावन मास में तामसिक वस्तुओं और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस अवधि में सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और यथासंभव दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए, जिससे मन और शरीर संतुलित रहते हैं।
टपकेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक कैसे किया जाता है?
श्रद्धालु टपकेश्वर महादेव मंदिर में भांग, धतूरा, बेलपत्र, दही, दूध और जल अर्पित कर रुद्राभिषेक करते हैं। सावन के सोमवारों पर विशेष रूप से बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक के लिए पहुँचते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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