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दिल्ली पुलिस ने कपड़ा सप्लायर बनकर ₹2 लाख की ठगी करने वाले पवन कुमार को किया गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने कपड़ा सप्लायर बनकर ₹2 लाख की ठगी करने वाले पवन कुमार को किया गिरफ्तार

सारांश

रेडीमेड कपड़ों का सप्लायर बनकर ₹2 लाख ठगने वाले बदरपुर के पवन कुमार को शाहदरा साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया कि उसके बैंक खाते छह अलग साइबर शिकायतों में संदिग्ध लेनदेन से जुड़े हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की शाहदरा साइबर थाना टीम ने पवन कुमार ( बदरपुर , दिल्ली) को 23 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर रेडीमेड कपड़ों व सिलाई मशीन सामान की सप्लाई का झाँसा देकर ₹2 लाख की ठगी का आरोप है।
शिकायतकर्ता नीरज कुमार जैन ने 6 जुलाई को आरोपी से संपर्क होने के बाद कई किस्तों में रकम ट्रांसफर की थी।
गिरफ्तारी के दौरान ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन बरामद किया गया।
वित्तीय जाँच में आरोपी के बैंक खाते साइबर अपराध की 6 अलग शिकायतों में संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मिले।
मनी ट्रेल और अन्य पीड़ितों की पहचान के लिए जाँच जारी है।

दिल्ली पुलिस की शाहदरा साइबर थाना टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को बदरपुर निवासी पवन कुमार को गिरफ्तार किया, जिस पर रेडीमेड कपड़ों और सिलाई मशीन के सामान की आपूर्ति का झाँसा देकर एक कपड़ा निर्माता से लगभग ₹2 लाख की साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है। तकनीकी जाँच के आधार पर की गई यह गिरफ्तारी उस शिकायत के बाद हुई, जो नीरज कुमार जैन नामक व्यवसायी ने दर्ज कराई थी।

घटनाक्रम कैसे हुआ

पुलिस के अनुसार, आरोपी पवन कुमार ने 6 जुलाई को शिकायतकर्ता नीरज कुमार जैन से संपर्क किया और खुद को रेडीमेड कपड़ों व सिलाई मशीन के सामान का सप्लायर बताया। उसने दावा किया कि ऑर्डर किया गया माल तत्काल डिलीवरी के लिए तैयार है।

कंपनी का भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने कैटलॉग, इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेज साझा किए और बार-बार समय पर डिलीवरी का आश्वासन दिया। इस पर विश्वास करते हुए नीरज कुमार जैन ने कई लेनदेन के जरिए कुल लगभग ₹2 लाख ट्रांसफर कर दिए। वादा किया गया सामान कभी नहीं पहुँचा और न ही रकम लौटाई गई, जिसके बाद साइबर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

तकनीकी जाँच और गिरफ्तारी

शाहदरा साइबर थाना पुलिस ने मामले में तकनीकी विश्लेषण किया, जिससे आरोपी के बदरपुर में होने के स्पष्ट सुराग मिले। इसके बाद टीम ने छापेमारी कर पवन कुमार को हिरासत में लिया। ऑपरेशन के दौरान वह मोबाइल फोन भी बरामद किया गया, जिसका उपयोग शिकायतकर्ता से संपर्क करने में किया गया था।

व्यापक धोखाधड़ी का खुलासा

वित्तीय जाँच में सामने आया है कि आरोपी से जुड़े बैंक खाते साइबर अपराध की छह अलग-अलग शिकायतों में संदिग्ध लेनदेन से जुड़े हैं। इन मामलों में कई पीड़ित शामिल हैं और लाखों रुपए के संदिग्ध धोखाधड़ी वाले लेनदेन सामने आए हैं।

पुलिस के अनुसार, जाँच से संकेत मिलता है कि आरोपी ने कथित तौर पर 'कॉलर' की भूमिका निभाई और वह सीधे तौर पर इन धोखाधड़ी मामलों में शामिल था।

आगे की जाँच

अधिकारियों ने बताया कि मनी ट्रेल का पूरा खाका तैयार करने, अन्य पीड़ितों की पहचान करने और इस कथित धोखाधड़ी के पूरे नेटवर्क को समझने के लिए जाँच जारी है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि व्यावसायिक सप्लाई चेन में डिजिटल ठगी के मामले किस तरह बढ़ रहे हैं, जहाँ आरोपी दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता का भ्रम पैदा कर भरोसा हासिल करते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस बढ़ते चलन का संकेत है जिसमें साइबर ठग व्यापारिक विश्वसनीयता का भ्रम बनाने के लिए जाली कैटलॉग और इनवॉइस का सहारा लेते हैं। चिंताजनक यह है कि एक ही आरोपी के बैंक खाते छह अलग शिकायतों में सामने आए — यानी यह संभवतः संगठित ठगी का हिस्सा है, न कि कोई इकलौती घटना। जब तक मनी ट्रेल पूरी तरह उजागर नहीं होती और असली पीड़ितों की संख्या सामने नहीं आती, इस मामले का वास्तविक दायरा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन कुमार पर क्या आरोप है?
पवन कुमार पर रेडीमेड कपड़ों और सिलाई मशीन के सामान की सप्लाई का झाँसा देकर कपड़ा निर्माता नीरज कुमार जैन से लगभग ₹2 लाख की साइबर धोखाधड़ी करने का आरोप है। वादा किया गया सामान कभी डिलीवर नहीं किया गया और रकम भी नहीं लौटाई गई।
दिल्ली पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा?
शाहदरा साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए आरोपी के बदरपुर में होने के सुराग हासिल किए और फिर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार किया। ठगी में इस्तेमाल मोबाइल फोन भी बरामद किया गया।
क्या आरोपी अन्य मामलों में भी शामिल है?
वित्तीय जाँच में सामने आया है कि आरोपी से जुड़े बैंक खाते साइबर अपराध की छह अलग-अलग शिकायतों में संदिग्ध लेनदेन से जुड़े हैं। इन मामलों में कई पीड़ित शामिल हैं और लाखों रुपए के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं।
आरोपी ने ठगी के लिए कौन-सी तरकीब अपनाई?
आरोपी ने कैटलॉग, इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेज़ साझा कर खुद को वैध सप्लायर साबित करने की कोशिश की और बार-बार समय पर डिलीवरी का आश्वासन दिया। शिकायतकर्ता का भरोसा जीतने के बाद उसने कई किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस अभी मनी ट्रेल का पता लगाने, अन्य पीड़ितों की पहचान करने और इस कथित धोखाधड़ी नेटवर्क के पूरे दायरे को समझने के लिए जाँच जारी रखे हुए है। आरोपी की भूमिका 'कॉलर' के रूप में कथित तौर पर स्थापित की जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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