30 अक्टूबर 2026
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चलती कार में चला रहे थे साइबर ठगी का 'मोबाइल कॉल सेंटर', दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपी दबोचे

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चलती कार में चला रहे थे साइबर ठगी का 'मोबाइल कॉल सेंटर', दिल्ली पुलिस ने 3 आरोपी दबोचे

सारांश

लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए चलती कार को 'कॉल सेंटर' बना डाला — दिल्ली पुलिस ने ऐसे तीन साइबर ठगों को पकड़ा जो बीमा रिफंड का झाँसा देकर लोगों को लूट रहे थे। 7 फोन, जाली NPCI मुहर और 15 कार्ड बरामद; मुंबई-तेलंगाना कनेक्शन की जाँच जारी।

मुख्य बातें

दिल्ली ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को लोकेश तोमर, तुषार और हिमांशु राठौर को गिरफ्तार किया।
आरोपी चलती सफेद कार में मोबाइल कॉल सेंटर चलाते थे ताकि लोकेशन ट्रैकिंग से बच सकें।
मध्य प्रदेश के नीलेश विश्वकर्मा को बीमा रिफंड के नाम पर ₹65,000 की ठगी का शिकार बनाया गया।
बरामदगी में 7 मोबाइल फोन, 15 बैंक/डेबिट/मेट्रो कार्ड, 6 चेकबुक और NPCI की कथित जाली मुहर शामिल।
पुलिस मुंबई और तेलंगाना में साइबर मामलों से आरोपियों के संभावित संबंधों की जाँच कर रही है।

दिल्ली की ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने 30 अक्टूबर 2026 को एक अनोखे साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए एक चलती हुई कार के भीतर 'मोबाइल कॉल सेंटर' संचालित कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान लोकेश तोमर (37), ओल्ड कोंडली निवासी, तुषार (35), शाहदरा निवासी, और हिमांशु राठौर, कल्याण पुरी निवासी के रूप में हुई है।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

यह मामला मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के निवासी नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत के बाद सामने आया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने नीलेश को बीमा पॉलिसियों में लगाए गए ₹45 लाख वापस दिलाने का झाँसा देकर 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर ₹65,000 की ठगी की। शिकायत मिलने के बाद पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई और जाँच शुरू हुई।

जाँच में कैसे खुला नेटवर्क

जाँच के दौरान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली, जिससे हिमांशु राठौर से जुड़े इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते पर संदेह हुआ। इसके बाद आगे की जाँच में नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान हो सकी। हिमांशु से पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य एक सफेद कार को मोबाइल ऑपरेशनल बेस के तौर पर इस्तेमाल करते थे और पकड़े जाने से बचने के लिए बार-बार अपना ठिकाना बदलते रहते थे।

तकनीकी विश्लेषण और फील्ड निगरानी के ज़रिए पुलिस ने वाहन का पता लगाया और पूर्वी दिल्ली के ओल्ड कोंडली इलाके में उसे रोककर शेष दो आरोपियों को दबोच लिया।

तीनों की भूमिका क्या थी

पुलिस के अनुसार, लोकेश तोमर पर पूरे ऑपरेशन का समन्वय करने और फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराने का संदेह है। तुषार कथित तौर पर सरकारी अधिकारियों या बीमा प्रतिनिधियों का रूप धारण कर पीड़ितों से संपर्क करता था और उन्हें ओटीपी (OTP) तथा अन्य संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए फुसलाता था। राठौर पर कमीशन के बदले धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को अपने बैंक खातों में प्राप्त कर आगे स्थानांतरित करने का संदेह है।

बरामदगी

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक कार, सात मोबाइल फोन, 15 बैंक/डेबिट/मेट्रो कार्ड, पाँच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी प्रतियाँ, छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक हस्ताक्षरित चेक, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट तस्वीरें और ग्राहकों की सूची वाले नौ पेज बरामद किए। इसके अलावा NPCI के नाम पर एक कथित जाली मुहर भी ज़ब्त की गई है।

आगे की जाँच

पुलिस अब मुंबई और तेलंगाना में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों से इन आरोपियों के संभावित संबंधों की भी जाँच कर रही है। संदिग्ध अंतरराज्यीय नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला का पता लगाने के लिए आगे की कार्रवाई जारी है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब देशभर में बीमा पॉलिसी रिफंड के नाम पर होने वाली साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे गिरोह पकड़ में आने से पहले कई और पीड़ित बना सकते हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगी के इस मामले में किसे गिरफ्तार किया?
दिल्ली ईस्ट डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस ने लोकेश तोमर (37, ओल्ड कोंडली), तुषार (35, शाहदरा) और हिमांशु राठौर (कल्याण पुरी) को गिरफ्तार किया। तीनों पर बीमा रिफंड का झाँसा देकर ठगी करने और चलती कार में मोबाइल कॉल सेंटर चलाने का संदेह है।
इस साइबर ठगी में पीड़ित के साथ क्या हुआ था?
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के नीलेश विश्वकर्मा को आरोपियों ने बीमा पॉलिसियों में निवेश किए ₹45 लाख वापस दिलाने का वादा करके 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर ₹65,000 ठग लिए। इसी शिकायत के आधार पर पूर्वी जिले के साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज हुई।
आरोपी चलती कार में कॉल सेंटर क्यों चला रहे थे?
पुलिस के अनुसार आरोपी लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए एक सफेद कार को अपने मोबाइल ऑपरेशनल बेस के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे और बार-बार अपना ठिकाना बदलते रहते थे। तकनीकी विश्लेषण और फील्ड निगरानी के ज़रिए पुलिस ने वाहन का पता लगाकर ओल्ड कोंडली में रोका।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या-क्या बरामद किया?
बरामदगी में एक कार, सात मोबाइल फोन, 15 बैंक/डेबिट/मेट्रो कार्ड, पाँच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड या उनकी प्रतियाँ, छह चेकबुक, तीन पासबुक, एक हस्ताक्षरित चेक, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट तस्वीरें, ग्राहकों की सूची और NPCI की एक कथित जाली मुहर शामिल है।
क्या इस मामले के तार दिल्ली से बाहर भी जुड़े हैं?
पुलिस मुंबई और तेलंगाना में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामलों से इन आरोपियों के संभावित संबंधों की जाँच कर रही है। संदिग्ध अंतरराज्यीय नेटवर्क का पूरा खाका तैयार करने के लिए वित्तीय लेनदेन की ट्रेसिंग जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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