दिल्ली सरकार ने 'राइट टू टाइम बाउंड सर्विसेज बिल 2026' को मंजूरी दी, 2011 का कानून होगा रद्द
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 15 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक प्रशासनिक सुधार को हरी झंडी देते हुए 'दिल्ली (राइट ऑफ सिटिजन टू टाइम बाउंड एंड ईज़ ऑफ डिलीवरी ऑफ सर्विसेज) बिल, 2026' को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की डिलीवरी को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित बनाना है। यह नया कानून 2011 के राइट टू सर्विस कानून की जगह लेगा और नागरिकों को समयबद्ध सरकारी सेवाएं पाने का कानूनी अधिकार देगा।
नए कानून में क्या है खास
इस बिल के तहत सरकारी सेवाओं की पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल होगी, जिससे नागरिकों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि किसी सेवा में निर्धारित समय-सीमा से अधिक देरी होती है, तो मामला स्वतः ऑटोमैटिक एस्केलेशन के ज़रिए उच्च अधिकारी के पास पहुँच जाएगा। इस प्रावधान को शासन में जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
शिकायत निवारण और आयोग का गठन
बिल में नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन का गठन किया जाएगा, जो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। सेवा में देरी के लिए अधिकारियों पर जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है, जो इस कानून को पूर्व के कानूनों से अधिक दंडात्मक और प्रभावी बनाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह सुधार 'सेवा ही संकल्प' की भावना से प्रेरित है और 'विकसित दिल्ली' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार, यह पहल नागरिकों और कारोबारियों दोनों को समान रूप से लाभ पहुँचाएगी, क्योंकि सभी सरकारी सेवाएं तय समय-सीमा के भीतर कानूनी रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी।
पुराने कानून से कैसे अलग है यह बिल
गौरतलब है कि 2011 का राइट टू सर्विस कानून अपनी सीमित डिजिटल पहुँच और कमज़ोर प्रवर्तन तंत्र के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका था। नया बिल तकनीक-आधारित ढाँचे, स्वतः एस्केलेशन और स्वतंत्र आयोग के ज़रिए उन कमियों को दूर करने का प्रयास करता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य सरकारी सेवा वितरण को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं।
आगे की राह
बिल को अब दिल्ली विधानसभा में पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे कानूनी रूप दिया जाएगा। दिल्ली राइट टू सर्विस कमीशन के गठन की समयसीमा और सेवाओं की सूची सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून की सफलता काफी हद तक इसके क्रियान्वयन की गति और डिजिटल अवसंरचना की मज़बूती पर निर्भर करेगी।