धनबाद: ₹400 करोड़ की एलिवेटेड रोड पर BJP सांसद ढुल्लू महतो vs CPI-ML विधायक अरूप चटर्जी, निरसा में शक्ति प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के धनबाद जिले के निरसा में ₹400 करोड़ की प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना बुधवार, 15 जुलाई को राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद ढुल्लू महतो और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) समर्थित मासस विधायक अरूप चटर्जी ने एक ही समय पर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। प्रशासन की कड़ी निगरानी के बीच दोनों कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे, लेकिन दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप तीखे रहे।
मुख्य घटनाक्रम
सांसद ढुल्लू महतो ने BJP और श्रमिक संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ एलिवेटेड रोड निर्माण स्थल के निकट महाजुटान आयोजित कर जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना में विधायक अरूप चटर्जी निजी स्वार्थ के चलते बाधाएँ खड़ी कर रहे हैं। महतो ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों को किसी भी कीमत पर नहीं रोका जाएगा और अवरोध उत्पन्न करने वालों का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, विधायक अरूप चटर्जी ने भाकपा (माले) और बिहार कोलियरी कामगार यूनियन के बैनर तले प्रतिवाद पदयात्रा निकाली। उनका कहना था कि उनका विरोध विकास के विरुद्ध नहीं, बल्कि परियोजना की आड़ में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ है।
दोनों नेताओं के आरोप
चटर्जी ने आरोप लगाया कि इस परियोजना की आड़ में सांसद और उनके समर्थक कथित तौर पर अवैध आर्थिक लाभ उठाने और जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए इस परियोजना का दुरुपयोग किया जा रहा है।
इससे पहले, चटर्जी ने दावा किया था कि उन्हें किसी गैंगस्टर के नाम पर धमकियाँ मिल रही हैं और इस संदर्भ में उन्होंने सांसद की भूमिका पर सवाल उठाए थे। जवाब में सांसद ढुल्लू महतो ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए चटर्जी पर अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और उन्हें ₹2 करोड़ का मानहानि नोटिस भी भेजा है।
प्रशासन की तैयारी
दोनों कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। ग्रामीण पुलिस अधीक्षक एस. मोहम्मद याकूब स्वयं निरसा में कैंप कर स्थिति की निगरानी करते रहे। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल, वज्र वाहन, दंगा नियंत्रण बल और अन्य सुरक्षा संसाधन तैनात किए गए। संभावित तनाव को देखते हुए पहले ही कई लोगों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई भी की गई थी।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह टकराव अचानक नहीं उभरा — पिछले कुछ दिनों से दोनों नेताओं के बीच एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में विकास परियोजनाओं पर राजनीतिक नियंत्रण और स्थानीय प्रभाव को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा है। गौरतलब है कि धनबाद जैसे कोयला-बहुल जिले में बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ अक्सर राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का मैदान बन जाती हैं।
आगे की स्थिति
फिलहाल परियोजना विवाद में उलझी हुई है और दोनों पक्षों के बीच कानूनी-राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत हैं। मानहानि नोटिस और धमकी के आरोपों के साथ यह मामला अदालत तक भी पहुँच सकता है। स्थानीय जनता के लिए यह परियोजना कब और किस रूप में पूरी होगी, यह अभी अनिश्चित बना हुआ है।