धनबाद: भ्रूण लिंग जांच के बाद अवैध गर्भपात में महिला की मौत, पति व सेंटर संचालक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के धनबाद जिले के कतरास क्षेत्र में 29 अक्टूबर 2026 को एक दर्दनाक मामला सामने आया, जब भ्रूण लिंग जांच के बाद कथित तौर पर अवैध गर्भपात कराए जाने के दौरान किरण कुमारी नामक महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि गर्भ में कन्या होने की जानकारी मिलने के बाद महिला के पति ने जबरन गर्भपात कराने का फैसला किया, जो कानूनी और नैतिक — दोनों दृष्टियों से अपराध है।
मुख्य घटनाक्रम
मृतका के भाई चंद्रिका कुमार के अनुसार, किरण तीन से चार महीने की गर्भवती थी और दंपती की पहले से एक बेटी है। परिजनों का कहना है कि दूसरी बार गर्भधारण के बाद पति ने लिंग परीक्षण कराया और भ्रूण के कन्या होने की पुष्टि होते ही दबाव बनाकर अवैध गर्भपात की प्रक्रिया शुरू करा दी गई।
आरोप है कि गर्भपात के दौरान किरण को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ, जिससे उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ती गई। आनन-फानन में उन्हें संजीवनी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में समय पर डॉक्टर और समुचित चिकित्सीय सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी।
पुलिस कार्रवाई
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतका के पति सोनू केवट और श्यामडीह चौक स्थित सेंट्रल डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक सचिन केवट को गिरफ्तार कर लिया। संबंधित जांच केंद्र को भी अधिकारियों ने सील कर दिया है।
कतरास के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजीत कुमार विमल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक पड़ताल में गलत तरीके से गर्भपात कराने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मौत होने की बात सामने आई है।
फोरेंसिक जांच
मामले के हर पहलू की वैज्ञानिक जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीम को बुलाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जाएगी और जिम्मेदारी तय की जाएगी।
परिजनों का आक्रोश
महिला की दुखद मौत से क्षुब्ध परिजनों ने संजीवनी अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में लिंग-चयनात्मक गर्भपात के खिलाफ कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं — पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत भ्रूण लिंग जांच कराना और उसके आधार पर गर्भपात करवाना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं।
गौरतलब है कि झारखंड जैसे राज्यों में लिंग-चयनात्मक गर्भपात के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं, जो इस सामाजिक कुरीति की गहरी जड़ों की ओर संकेत करते हैं। आगे मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट और न्यायालयी कार्रवाई की प्रतीक्षा है।