नासिक कुंभ: राष्ट्रपति मुर्मू 31 अक्टूबर को करेंगी ध्वजारोहण, 550 शंखनाद व 6,500 आदिवासियों की महाआरती बनेगी इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
नासिक में आगामी 31 अक्टूबर 2026 को होने वाले कुंभ ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से यह ध्वजारोहण संपन्न होगा — जो नासिक कुंभ के इतिहास में किसी राष्ट्रपति की पहली भागीदारी होगी। अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज के अनुसार, 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में 550 लोगों का शंखनाद और 6,500 आदिवासी बंधुओं की भव्य महाआरती मुख्य आकर्षण रहेगी।
मुख्य घटनाक्रम
भक्ति चरण दास महाराज ने बताया कि यह तीन दिवसीय आयोजन सिंहस्थ प्राधिकरण, नासिक महानगरपालिका और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से हो रहा है। उन्होंने कहा, 'ध्वजारोहण 31 अक्टूबर को होने जा रहा है। प्रशासन के निमंत्रण पर देशभर के महापुरुष और अखाड़ों के प्रतिनिधि नासिक पधारे हैं।' रामतीर्थ सेवा समिति के सहयोग से आयोजन की रूपरेखा तय की गई है।
ऐतिहासिक महत्त्व
जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने कहा कि नासिक कुंभ के इतिहास में पहली बार कोई राष्ट्रपति इस पावन आयोजन में सम्मिलित हो रही हैं — यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की उपस्थिति में राष्ट्रपति के करकमलों से पूर्व वैदिक संकल्प के ध्वजारोहण का कार्यक्रम सनातन परंपरा की एकता का प्रतीक बनेगा।
गौरतलब है कि इस आयोजन में 13 अखाड़ों के श्रीमहंत, शंकराचार्य, रामानंदाचार्य और वैष्णवाचार्य एक मंच पर आएँगे। यह इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वर्षों से त्र्यंबकेश्वर और नासिक के अखाड़ों के बीच पारंपरिक दूरी बनी रही थी — अब पहली बार दोनों पक्ष एक ही मंच पर आ रहे हैं।
महिला नेतृत्व का प्रतीक
भक्ति चरण दास महाराज ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस आयोजन की रूपरेखा में महिला नेतृत्व की एक अनूठी झलक दिखती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं एक महिला हैं; महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री पद पर भी महिला हैं; नासिक की महापौर एवं नासिक महानगरपालिका की आयुक्त भी महिलाएँ हैं। उनके अनुसार, यह पूरी योजना देश की राष्ट्रपति के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।
आम जनता पर असर
भक्ति चरण दास महाराज के अनुसार, यह आयोजन उन लोगों के लिए भी एक ऐतिहासिक अवसर होगा जिन्होंने कभी रामकुंड नहीं देखा या गोदावरी कुंभ के बारे में अधिक नहीं जानते। विभिन्न झाँकियों, कलापथकों और चित्ररथों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति जागरण तथा विज्ञान-अध्यात्म का संदेश दिया जाएगा।
प्रशासनिक तैयारी
आयोजन की तैयारियों में मेलाधिकारी शेखर सिंह, मनीषा खत्री, गिराम साहब, गिरीश महाजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी निरंतर जुटे हैं। भक्ति चरण दास महाराज ने भरोसा जताया कि आने वाला सिंहस्थ अत्यंत दिव्य और भव्य होगा — और इस ध्वजारोहण से उसकी शुभ शुरुआत होगी।