29 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नासिक कुंभ: राष्ट्रपति मुर्मू 31 अक्टूबर को करेंगी ध्वजारोहण, 550 शंखनाद व 6,500 आदिवासियों की महाआरती बनेगी इतिहास

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नासिक कुंभ: राष्ट्रपति मुर्मू 31 अक्टूबर को करेंगी ध्वजारोहण, 550 शंखनाद व 6,500 आदिवासियों की महाआरती बनेगी इतिहास

सारांश

नासिक कुंभ के इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति का आगमन — 31 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से ध्वजारोहण होगा। 550 शंखनादियों और 6,500 आदिवासी बंधुओं की एकसाथ महाआरती, 13 अखाड़ों का एकमंच — यह आयोजन धार्मिक एकता और राष्ट्रीय गौरव का नया अध्याय लिखेगा।

मुख्य बातें

31 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से नासिक कुंभ का ध्वजारोहण होगा — कुंभ इतिहास में राष्ट्रपति की पहली भागीदारी।
आयोजन 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक तीन दिन चलेगा; सिंहस्थ प्राधिकरण, नासिक महानगरपालिका व प्रशासन का संयुक्त आयोजन।
मुख्य आकर्षण: 550 लोगों का एकसाथ शंखनाद और 6,500 आदिवासी बंधुओं द्वारा भव्य महाआरती।
13 अखाड़ों के श्रीमहंत, शंकराचार्य, रामानंदाचार्य व वैष्णवाचार्य एक मंच पर — त्र्यंबकेश्वर-नासिक की दशकों पुरानी परंपरागत दूरी पहली बार होगी समाप्त।
आयोजन में राष्ट्रपति, उपमुख्यमंत्री, महापौर और नगरपालिका आयुक्त — सभी महिलाएँ — एक साथ उपस्थित रहेंगी।

नासिक में आगामी 31 अक्टूबर 2026 को होने वाले कुंभ ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर तैयारियाँ अंतिम चरण में पहुँच गई हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से यह ध्वजारोहण संपन्न होगा — जो नासिक कुंभ के इतिहास में किसी राष्ट्रपति की पहली भागीदारी होगी। अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज के अनुसार, 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय महोत्सव में 550 लोगों का शंखनाद और 6,500 आदिवासी बंधुओं की भव्य महाआरती मुख्य आकर्षण रहेगी।

मुख्य घटनाक्रम

भक्ति चरण दास महाराज ने बताया कि यह तीन दिवसीय आयोजन सिंहस्थ प्राधिकरण, नासिक महानगरपालिका और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से हो रहा है। उन्होंने कहा, 'ध्वजारोहण 31 अक्टूबर को होने जा रहा है। प्रशासन के निमंत्रण पर देशभर के महापुरुष और अखाड़ों के प्रतिनिधि नासिक पधारे हैं।' रामतीर्थ सेवा समिति के सहयोग से आयोजन की रूपरेखा तय की गई है।

ऐतिहासिक महत्त्व

जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने कहा कि नासिक कुंभ के इतिहास में पहली बार कोई राष्ट्रपति इस पावन आयोजन में सम्मिलित हो रही हैं — यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की उपस्थिति में राष्ट्रपति के करकमलों से पूर्व वैदिक संकल्प के ध्वजारोहण का कार्यक्रम सनातन परंपरा की एकता का प्रतीक बनेगा।

गौरतलब है कि इस आयोजन में 13 अखाड़ों के श्रीमहंत, शंकराचार्य, रामानंदाचार्य और वैष्णवाचार्य एक मंच पर आएँगे। यह इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि वर्षों से त्र्यंबकेश्वर और नासिक के अखाड़ों के बीच पारंपरिक दूरी बनी रही थी — अब पहली बार दोनों पक्ष एक ही मंच पर आ रहे हैं।

महिला नेतृत्व का प्रतीक

भक्ति चरण दास महाराज ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि इस आयोजन की रूपरेखा में महिला नेतृत्व की एक अनूठी झलक दिखती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं एक महिला हैं; महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री पद पर भी महिला हैं; नासिक की महापौर एवं नासिक महानगरपालिका की आयुक्त भी महिलाएँ हैं। उनके अनुसार, यह पूरी योजना देश की राष्ट्रपति के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

आम जनता पर असर

भक्ति चरण दास महाराज के अनुसार, यह आयोजन उन लोगों के लिए भी एक ऐतिहासिक अवसर होगा जिन्होंने कभी रामकुंड नहीं देखा या गोदावरी कुंभ के बारे में अधिक नहीं जानते। विभिन्न झाँकियों, कलापथकों और चित्ररथों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति जागरण तथा विज्ञान-अध्यात्म का संदेश दिया जाएगा।

प्रशासनिक तैयारी

आयोजन की तैयारियों में मेलाधिकारी शेखर सिंह, मनीषा खत्री, गिराम साहब, गिरीश महाजन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी निरंतर जुटे हैं। भक्ति चरण दास महाराज ने भरोसा जताया कि आने वाला सिंहस्थ अत्यंत दिव्य और भव्य होगा — और इस ध्वजारोहण से उसकी शुभ शुरुआत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह एकता प्रतीकात्मक रहती है या सिंहस्थ के स्नान पर्वों तक भी बनी रहती है। 6,500 आदिवासी बंधुओं की भागीदारी उस समावेशी सनातन आख्यान को रेखांकित करती है जिसे संत समाज राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करना चाहता है — लेकिन इसकी दीर्घकालिक प्रासंगिकता इस बात पर निर्भर करेगी कि आदिवासी समुदायों की भागीदारी उत्सव से आगे नीतिगत स्तर तक भी सुनिश्चित होती है या नहीं।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक कुंभ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का ध्वजारोहण कब और कहाँ होगा?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 31 अक्टूबर 2026 को नासिक में सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण करेंगी। यह नासिक कुंभ के इतिहास में किसी राष्ट्रपति की पहली भागीदारी होगी।
नासिक कुंभ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में क्या-क्या होगा?
30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक चलने वाले इस आयोजन में 550 लोगों का शंखनाद, 6,500 आदिवासी बंधुओं की महाआरती, गोदावरी की भजन-संध्या, झाँकियाँ और कलापथक शामिल हैं। 13 अखाड़ों के संत-महंत एक मंच पर आएँगे।
त्र्यंबकेश्वर और नासिक अखाड़ों के बीच पुरानी दूरी क्या थी और इसे कैसे समाप्त किया जा रहा है?
वर्षों से एक परंपरा चली आ रही थी जिसमें त्र्यंबकेश्वर के अखाड़े नासिक नहीं जाते थे और नासिक के अखाड़े त्र्यंबकेश्वर नहीं जाते थे। इस बार 13 अखाड़ों के सभी श्रीमहंत, शंकराचार्य और रामानंदाचार्य को एक मंच पर लाकर यह भेद समाप्त किया जा रहा है।
इस आयोजन में 6,500 आदिवासी बंधुओं की क्या भूमिका होगी?
लगभग 6,500 आदिवासी बंधु राष्ट्रपति की उपस्थिति में एकसाथ भव्य दिव्य महाआरती करेंगे। अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता के अनुसार, यह आयोजन सनातन परंपरा में समावेश और एकता का प्रतीक होगा।
नासिक कुंभ ध्वजारोहण की तैयारियों में कौन-से अधिकारी शामिल हैं?
आयोजन की तैयारियों में मेलाधिकारी शेखर सिंह, मनीषा खत्री, गिराम साहब और गिरीश महाजन सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय रूप से जुटे हैं। रामतीर्थ सेवा समिति और सिंहस्थ प्राधिकरण के संयुक्त प्रयास से यह आयोजन संपन्न हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 20 घंटे पहले
  2. 6 दिन पहले
    सिंहस्थ कुंभ मेला: गिरीश महाजन ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को 31 अक्टूबर के ध्वजारोहण का निमंत्रण दिया, राष्ट्रपति मुर्मु रहेंगी मुख्य अतिथि
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले