धारचूला में कुलागाड़ पुल टूटा, कुमाऊं स्काउट्स ने 7 घंटे में 300 से अधिक लोगों को बचाया
सारांश
मुख्य बातें
धारचूला के तवाघाट के निकट कुलागाड़ पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भारतीय सेना की कुमाऊं स्काउट्स टुकड़ी ने 20 अगस्त को तेज़ जलधारा के बीच फंसे 300 से अधिक स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सुरक्षित निकाला। 7 घंटे से अधिक समय तक चला यह बचाव अभियान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सेना की आपदा राहत क्षमता का एक और उदाहरण बन गया।
घटनाक्रम: पुल टूटा, सेना तुरंत सक्रिय
कुलागाड़ पुल को नुकसान पहुँचने की सूचना मिलते ही कुमाऊं स्काउट्स की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) टुकड़ी को तत्काल सक्रिय किया गया। सेना के जवान कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुँच गए। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बड़ी संख्या में लोग तेज़ बहाव वाली जलधारा के दूसरी ओर अटक गए थे, जिससे उनके लिए बाहर निकलने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं बचा था।
बचाव अभियान: रस्सियाँ, सीढ़ियाँ और अटूट साहस
घटनास्थल पर पहुँचते ही जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। तेज़ बहाव के आर-पार रस्सियाँ बाँधकर और सीढ़ी की सहायता से बचाव अभियान शुरू किया गया। जवानों ने एक-एक व्यक्ति को सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। यह अभियान लगातार 7 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा। इस पूरे दौरान धारचूला के स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा गया।
अभियान का परिणाम
भारतीय सेना के अनुसार, कुमाऊं स्काउट्स की टुकड़ी ने 300 से अधिक स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सकुशल निकालने में सफलता हासिल की। अभियान के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सेना ने इस अभियान को साहस, टीम भावना और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
आम जनता पर असर
कुलागाड़ पुल धारचूला क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो स्थानीय आवाजाही और पर्यटन दोनों के लिए उपयोग होती है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र में आवागमन बाधित हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीज़न में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में नदियों का जलस्तर और बहाव दोनों खतरनाक स्तर पर होते हैं।
क्या होगा आगे
पुल की मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि आपात स्थितियों में नागरिकों की सहायता के लिए उसकी टुकड़ियाँ सदैव तत्पर रहती हैं।