20 अगस्त 2026
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धारचूला में कुलागाड़ पुल टूटा, कुमाऊं स्काउट्स ने 7 घंटे में 300 से अधिक लोगों को बचाया

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धारचूला में कुलागाड़ पुल टूटा, कुमाऊं स्काउट्स ने 7 घंटे में 300 से अधिक लोगों को बचाया

सारांश

धारचूला के तवाघाट के पास कुलागाड़ पुल टूटने से 300 से अधिक लोग तेज़ जलधारा के बीच फंस गए। कुमाऊं स्काउट्स ने रस्सियों और सीढ़ियों के सहारे 7 घंटे के अथक अभियान में सभी को सुरक्षित निकाला — मानसून के मौसम में सेना की आपदा राहत क्षमता की एक और मिसाल।

मुख्य बातें

धारचूला के तवाघाट के पास कुलागाड़ पुल क्षतिग्रस्त होने से बड़ी संख्या में लोग तेज़ जलधारा के दूसरी ओर फंस गए।
कुमाऊं स्काउट्स की HADR टुकड़ी सूचना मिलते ही कुछ मिनटों में घटनास्थल पर पहुँची।
जवानों ने रस्सियाँ बाँधकर और सीढ़ी की सहायता से 7 घंटे से अधिक समय तक बचाव अभियान चलाया।
300 से अधिक स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सकुशल निकाला गया; किसी के हताहत होने की सूचना नहीं।
अभियान के दौरान धारचूला के स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा गया।

धारचूला के तवाघाट के निकट कुलागाड़ पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद भारतीय सेना की कुमाऊं स्काउट्स टुकड़ी ने 20 अगस्त को तेज़ जलधारा के बीच फंसे 300 से अधिक स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सुरक्षित निकाला। 7 घंटे से अधिक समय तक चला यह बचाव अभियान उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सेना की आपदा राहत क्षमता का एक और उदाहरण बन गया।

घटनाक्रम: पुल टूटा, सेना तुरंत सक्रिय

कुलागाड़ पुल को नुकसान पहुँचने की सूचना मिलते ही कुमाऊं स्काउट्स की मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) टुकड़ी को तत्काल सक्रिय किया गया। सेना के जवान कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुँच गए। पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बड़ी संख्या में लोग तेज़ बहाव वाली जलधारा के दूसरी ओर अटक गए थे, जिससे उनके लिए बाहर निकलने का कोई सुरक्षित मार्ग नहीं बचा था।

बचाव अभियान: रस्सियाँ, सीढ़ियाँ और अटूट साहस

घटनास्थल पर पहुँचते ही जवानों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। तेज़ बहाव के आर-पार रस्सियाँ बाँधकर और सीढ़ी की सहायता से बचाव अभियान शुरू किया गया। जवानों ने एक-एक व्यक्ति को सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। यह अभियान लगातार 7 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा। इस पूरे दौरान धारचूला के स्थानीय प्रशासन के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखा गया।

अभियान का परिणाम

भारतीय सेना के अनुसार, कुमाऊं स्काउट्स की टुकड़ी ने 300 से अधिक स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सकुशल निकालने में सफलता हासिल की। अभियान के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। सेना ने इस अभियान को साहस, टीम भावना और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।

आम जनता पर असर

कुलागाड़ पुल धारचूला क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो स्थानीय आवाजाही और पर्यटन दोनों के लिए उपयोग होती है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र में आवागमन बाधित हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सीज़न में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में नदियों का जलस्तर और बहाव दोनों खतरनाक स्तर पर होते हैं।

क्या होगा आगे

पुल की मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है। भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि आपात स्थितियों में नागरिकों की सहायता के लिए उसकी टुकड़ियाँ सदैव तत्पर रहती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मानसून सीज़न में उत्तराखंड के पहाड़ी पुलों की नियमित संरचनात्मक जाँच क्यों नहीं होती। कुलागाड़ जैसे पुल स्थानीय आवाजाही की जीवनरेखा हैं, और उनके अचानक क्षतिग्रस्त होने से हर बार सेना को आगे आना पड़ता है — जो राहत तो देता है, पर बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरी को नहीं छुपाता। सेना की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, किंतु यह स्थायी समाधान का विकल्प नहीं है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धारचूला में कुलागाड़ पुल कैसे क्षतिग्रस्त हुआ?
स्रोत में पुल क्षतिग्रस्त होने का सटीक कारण नहीं बताया गया है, हालाँकि मानसून सीज़न में तेज़ जलधारा और बाढ़ के कारण क्षेत्र में पुलों को नुकसान पहुँचना सामान्य है। पुल के टूटने से तवाघाट के पास बड़ी संख्या में लोग जलधारा के दूसरी ओर फंस गए।
कुमाऊं स्काउट्स ने बचाव अभियान कैसे चलाया?
कुमाऊं स्काउट्स के जवानों ने तेज़ जलधारा के आर-पार रस्सियाँ बाँधकर और सीढ़ी की सहायता से एक-एक व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुँचाया। यह अभियान 7 घंटे से अधिक समय तक लगातार चला।
इस बचाव अभियान में कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया?
भारतीय सेना के अनुसार, कुमाऊं स्काउट्स की टुकड़ी ने 300 से अधिक स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सकुशल निकाला। अभियान के दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
क्या धारचूला में आवागमन अभी भी बाधित है?
कुलागाड़ पुल के क्षतिग्रस्त होने से क्षेत्र में आवागमन प्रभावित हुआ है। पुल की मरम्मत और वैकल्पिक मार्ग को लेकर स्थानीय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
भारतीय सेना उत्तराखंड में आपदा राहत में क्या भूमिका निभाती है?
भारतीय सेना की HADR (मानवीय सहायता एवं आपदा राहत) टुकड़ियाँ उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव अभियान चलाती हैं। कुलागाड़ पुल की घटना इसी की एक कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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