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दिलीप घोष का ममता पर तीखा हमला: ‘धरना जबरन कराया, TMC के सांसद-विधायक भी नदारद’

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दिलीप घोष का ममता पर तीखा हमला: ‘धरना जबरन कराया, TMC के सांसद-विधायक भी नदारद’

सारांश

भाजपा नेता दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के धरने को ‘जबरन कराया गया’ बताया और दावा किया कि TMC के 80 में से केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही पहुँचे। शिवसेना का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे ‘परिवारवाद के खिलाफ़ लड़ाई’ करार दिया — एक ऐसा बयान जो बंगाल की भीतरी राजनीतिक खींचतान की ओर इशारा करता है।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 3 जून को न्यूटाउन में ममता बनर्जी के धरने को ‘जबरन कराया गया’ बताया।
TMC के 80 विधायकों में से सिर्फ़ 8 और 6 सांसद ही धरने में शामिल हुए।
धरना अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में आयोजित किया गया था।
घोष ने शिवसेना का उदाहरण देकर TMC के भीतर ‘परिवारवाद विरोधी’ असंतोष का संकेत दिया।
बुलडोजर कार्रवाई पर पलटवार: ‘ममता दीदी, अपनी पार्टी बचाइए, दूसरों के घर की चिंता छोड़िए।’

पश्चिम बंगाल के मंत्री और भाजपा नेता दिलीप घोष ने 3 जून को न्यूटाउन में तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरने पर तीखा कटाक्ष किया और दावा किया कि यह प्रदर्शन ‘जबरन’ कराया गया था, जिसमें पार्टी के अधिकांश सांसद और विधायक तक शामिल नहीं हुए। घोष का यह बयान TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में मंगलवार को आयोजित धरने के एक दिन बाद आया।

धरने में कितने विधायक-सांसद पहुँचे

रिपोर्टों के अनुसार, 80 विधायकों वाली TMC में से केवल 8 विधायक ही ममता बनर्जी के साथ मंच पर मौजूद रहे, जबकि पार्टी के सिर्फ़ 6 सांसद ही धरने में दिखाई दिए। इन्हीं आँकड़ों को आधार बनाकर घोष ने सत्तारूढ़ दल के भीतर असंतोष का संकेत देने की कोशिश की।

दिलीप घोष का तंज

मीडिया से बातचीत में घोष ने कहा, ‘यह धरना व्यापक नहीं था, यह जबरन कराया गया था। इस धरने में पार्टी के सांसद और न ही विधायक शामिल हुए। केवल वे लोग मौजूद थे, जिनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं थी। ममता बनर्जी को समझना चाहिए कि अभी रास्ते पर उतरने का समय नहीं आया है; थोड़ा शांति रखें और आराम करें।’

‘परिवारवाद के खिलाफ़ लड़ाई’

TMC के कथित नाराज़ विधायकों के साथ हो रही बैठकों पर घोष ने शिवसेना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ‘शिवसेना जैसी पुरानी पार्टी, सत्ता के खेल में जब टूट गई तो TMC की क्या बात है? मुझे लगता है कि ये लड़ाई परिवारवाद के खिलाफ है। TMC के विधायक परिवारवाद से बाहर जाना चाहते हैं।’ गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी की बढ़ती भूमिका और पार्टी के पुराने नेताओं के बीच तनाव की चर्चाएँ लंबे समय से चल रही हैं।

बाबुन बनर्जी और अन्य मुद्दों पर बयान

ममता बनर्जी के भाई बाबुन बनर्जी के भाजपा में संभावित शामिल होने की अटकलों पर घोष ने कहा, ‘जो लोग हमारे नेताओं का नाम लेकर उन्हें गाली देते थे, वही अब उन्हें माला पहना रहे हैं और उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं। समय बदलता है, लेकिन जनता जानती है कि उन्होंने क्या-क्या किया है। जब जनता मूल्यांकन और निर्णय करेगी, तभी सही फैसला होगा।’

खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुई कथित फायरिंग पर घोष ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति अपनी राय रख सकता है, लेकिन कानून हाथ में लेना गलत है। बिहार की सरकार इस पर कार्रवाई करेगी।’ वहीं, पश्चिम बंगाल में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर ममता बनर्जी के सवालों पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, ‘ममता दीदी, अपनी पार्टी को बचाइए; दूसरों के घर के बारे में चिंता छोड़ दीजिए।’

क्या होगा आगे

आने वाले दिनों में TMC की आंतरिक बैठकों और भाजपा के लगातार तेज़ होते हमलों पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी, ख़ासकर तब जब राज्य में पंचायत और निकाय राजनीति का माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सत्तारूढ़ दल के लिए असहज प्रश्न खड़े करता है, भले ही पार्टी इसे लॉजिस्टिक कारण बताए। शिवसेना से तुलना रणनीतिक है — भाजपा यह संकेत देना चाहती है कि बंगाल में भी ‘ब्रेक-अवे’ संभव है। हालाँकि, बंगाल की ज़मीनी राजनीति महाराष्ट्र जैसी नहीं — और ऐसे दावों को चुनावी नतीजों से पहले बार-बार आज़माया जा चुका है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के धरने को ‘जबरन’ क्यों कहा?
दिलीप घोष ने दावा किया कि TMC के 80 विधायकों में से केवल 8 विधायक और 6 सांसद ही धरने में शामिल हुए, जिससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि प्रदर्शन व्यापक समर्थन से नहीं बल्कि दबाव में आयोजित था। उन्होंने कहा कि इसमें ‘केवल वे लोग मौजूद थे, जिनके पास जाने के लिए कोई और जगह नहीं थी।’
ममता बनर्जी ने धरना क्यों दिया था?
यह धरना TMC सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में मंगलवार को आयोजित किया गया था। ममता बनर्जी ने पार्टी सांसद पर हुए हमले को राजनीतिक मुद्दा बनाते हुए सड़क पर उतरने का फैसला किया।
दिलीप घोष ने शिवसेना का ज़िक्र क्यों किया?
घोष ने TMC के कथित नाराज़ विधायकों के संदर्भ में शिवसेना का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब शिवसेना जैसी पुरानी पार्टी सत्ता के खेल में टूट सकती है तो TMC की क्या बात है, और यह लड़ाई ‘परिवारवाद के खिलाफ़’ है।
बाबुन बनर्जी के भाजपा में शामिल होने पर घोष ने क्या कहा?
घोष ने सीधा जवाब देने के बजाय कटाक्ष किया कि जो लोग कभी भाजपा नेताओं को गाली देते थे, वही अब उन्हें माला पहना रहे हैं। उन्होंने अंतिम फैसला जनता के मूल्यांकन पर छोड़ दिया।
बुलडोजर कार्रवाई पर ममता के सवाल का घोष ने क्या जवाब दिया?
घोष ने पलटवार करते हुए कहा, ‘ममता दीदी, अपनी पार्टी को बचाइए; दूसरों के घर के बारे में चिंता छोड़ दीजिए।’ यह बयान बंगाल के बाहर हो रही बुलडोजर कार्रवाइयों पर ममता बनर्जी की आपत्तियों के जवाब में आया।
राष्ट्र प्रेस
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