दिल्ली वायु प्रदूषण: GRAP-2 के बावजूद सांस लेना मुश्किल, नागरिक बोले — स्वच्छ हवा देना सरकार की ज़िम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
राजधानी नई दिल्ली में 3 नवंबर 2026 को वायु प्रदूषण का संकट इस कदर गहरा गया है कि आम नागरिकों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। प्रदूषण के गंभीर स्तर को देखते हुए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-2 (GRAP-2) लागू किया जा चुका है, फिर भी निवासियों का कहना है कि स्वच्छ हवा में साँस लेना अभी भी संभव नहीं हो पा रहा।
नागरिकों का दर्द: 15-20 दिनों से घर में क़ैद
एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि वे पिछले 15 से 20 दिनों से घर से बाहर नहीं निकल पाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले वे प्रतिदिन सुबह करीब एक घंटे सैर पर जाते थे, लेकिन अब प्रदूषण की वजह से यह दिनचर्या पूरी तरह बाधित हो गई है। उन्होंने सवाल उठाया, 'जब लोगों को स्वच्छ हवा और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ ही नहीं मिलेंगी, तो आम नागरिकों का जीवन कैसे चलेगा?'
उन्होंने केंद्र और राज्य, दोनों सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि चाहे सरकार 'चार इंजन की हो, तीन इंजन की हो या डबल इंजन की' — आम जनता को किसी से भी ठोस राहत नहीं मिल रही। सरकारें हवा और पानी जैसी आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने में विफल साबित हो रही हैं।
वरिष्ठ निवासी देवेंद्र गोयल की चेतावनी
स्थानीय निवासी देवेंद्र गोयल ने बताया कि उनकी उम्र करीब 60 वर्ष है, लेकिन अब सड़क पर निकलते ही दम घुटने जैसा अनुभव होता है। उनके शब्दों में, 'हवा इतनी ज़हरीली हो गई है कि साँस लेना भी मुश्किल हो रहा है।'
गोयल ने कहा कि BS-6 वाहनों को लागू करने और GRAP जैसी पाबंदियाँ थोपने के बावजूद प्रदूषण में कोई ख़ास सुधार दिखाई नहीं दे रहा। उनका मानना है कि प्रदूषण रोकने के लिए सरकार की मंशा और इच्छाशक्ति सबसे ज़रूरी है, लेकिन कोई भी सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाती नज़र नहीं आती।
निर्माण कार्यों पर भ्रष्टाचार के आरोप
देवेंद्र गोयल ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों की निगरानी के बावजूद बिल्डरों द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा जा रहा है। उन्होंने कथित तौर पर भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए कहा कि पैसे लेकर निर्माण कार्यों को जारी रहने दिया जाता है, जिससे आम जनता प्रदूषण की मार झेलने पर मजबूर है।
गोयल ने स्पष्ट किया कि केवल वाहनों पर पाबंदी लगाने से यह समस्या हल नहीं होगी। निर्माण गतिविधियों, प्रशासनिक लापरवाही और प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर भी सख्त कार्रवाई ज़रूरी है।
GRAP-2 का असर और सीमाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली हर साल सर्दियों की दहलीज़ पर इसी संकट से जूझती है। GRAP-2 के तहत कुछ निर्माण कार्यों और प्रदूषणकारी वाहनों पर प्रतिबंध का प्रावधान है, लेकिन नागरिकों के अनुसार ज़मीनी स्तर पर अनुपालन कमज़ोर है। गौरतलब है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 'गंभीर' और 'बहुत खराब' श्रेणियों के बीच बनी रहती है।
आगे की राह
नागरिकों की यह पीड़ा एक बड़े सवाल को सामने लाती है — क्या दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तात्कालिक पाबंदियाँ काफ़ी हैं, या दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव की ज़रूरत है? अब सभी की नज़रें केंद्र और राज्य सरकारों पर टिकी हैं कि वे इस बढ़ते जन-असंतोष के जवाब में क्या ठोस कदम उठाती हैं।