धमतरी अदालत का बड़ा फैसला: हेलमेट से दोस्त की हत्या करने वाले खुशवंत साहू को आजीवन सश्रम कारावास
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में 3 दिसंबर 2024 को हुए बीरेंद्र देवांगन हत्याकांड में अदालत ने 27 अगस्त 2025 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी खुशवंत उर्फ खूबू साहू को आजीवन सश्रम कारावास की सजा दी। अपर सत्र न्यायाधीश, धमतरी ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103(1) के तहत आरोपी को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
मुख्य घटनाक्रम
3 दिसंबर 2024 को बीरेंद्र देवांगन (55), निवासी पदमपुर, के लापता होने की रिपोर्ट थाना सिहावा में दर्ज कराई गई थी। उसी दिन गंगरेल रोड पर मानव वन के निकट एक लावारिस मोटरसाइकिल मिलने की सूचना पर थाना रूद्री पुलिस मौके पर पहुँची और जाँच में वह वाहन बीरेंद्र देवांगन का निकला। 6 दिसंबर 2024 को मानव वन और शिवा रिसॉर्ट के बीच एक अज्ञात शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बाद में बीरेंद्र देवांगन के रूप में हुई।
पोस्टमार्टम और अन्य साक्ष्यों से हत्या की पुष्टि होने पर पुलिस ने गहन जाँच शुरू की। पुलिस के अनुसार, पुरानी रंजिश के चलते आरोपी ने अपने ही मित्र बीरेंद्र देवांगन के सिर पर हेलमेट से वार कर उसकी हत्या की थी।
जाँच और साक्ष्य
थाना रूद्री पुलिस और साइबर टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी खुशवंत उर्फ खूबू साहू (37), निवासी गौरा चौक, कर्मा मंदिर के पास, धनोरा, जिला दुर्ग, की भूमिका उजागर की। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध सत्र प्रकरण क्रमांक 20/2025 एवं थाना सिविल लाइन रूद्री अपराध क्रमांक 76/2024 में न्यायालय में चालान पेश किया गया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को निर्णायक मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया।
अदालत का फैसला
अपर सत्र न्यायाधीश एवं द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश, धमतरी ने 27 अगस्त को सुनाए फैसले में आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास तथा ₹500 अर्थदंड की सजा दी। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त छह माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा।
पुलिस को पुरस्कार
इस मामले में उत्कृष्ट जाँच के लिए पुलिस अधीक्षक धमतरी भावना पांडेय ने तत्कालीन थाना प्रभारी रूद्री उपनिरीक्षक अमित बघेल, उपनिरीक्षक लक्ष्मीकांत शुक्ला और सहायक उपनिरीक्षक घनश्याम वर्मा को पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है। धमतरी पुलिस ने आधुनिक तकनीकी जाँच, सीसीटीवी विश्लेषण और साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन को इस सफलता का आधार बताया है।
क्या होगा आगे
यह मामला छत्तीसगढ़ में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर त्वरित न्याय का उदाहरण बनकर सामने आया है। गौरतलब है कि घटना से लेकर सजा तक का यह सफर करीब नौ महीनों में पूरा हुआ, जो न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से उल्लेखनीय है। आरोपी के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प उपलब्ध है।