अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में शिवलिंग का रंग बदलता है दिन में, सावन सोमवार पर उमड़ी भक्तों की भीड़
सारांश
मुख्य बातें
अमृतसर स्थित श्री दुर्गियाना मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान शिव का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए पहुँचे। मंदिर के पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, यहाँ का स्फटिक शिवलिंग दिन में अपना रंग बदलता है — जो इस प्राचीन मंदिर की सबसे विशेष धार्मिक विशेषता मानी जाती है।
शिवलिंग की अद्भुत विशेषता
पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री ने बताया, 'इस मंदिर के शिवलिंग का स्फटिक नीले रंग का होता है, लेकिन खास बात यह है कि दिन में शिवलिंग का रंग बदल जाता है। कभी बर्फ जैसा सफेद, तो कभी नीला और कभी पारदर्शी — शीशे के समान — जिसमें आप अपना चेहरा देख सकते हैं।' उन्होंने इसे 'महादेव की लीला' बताया।
सावन में विशेष श्रृंगार और रुद्राभिषेक
शास्त्री जी ने बताया कि श्री दुर्गियाना मंदिर अत्यंत प्राचीन है और सावन के पवित्र महीने में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का फूलों और विविध सजावटी सामग्री से भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्होंने कहा कि सावन माह में यहाँ 24 घंटे लगातार रुद्राभिषेक होता है। विशेष रूप से 15 अगस्त को भी 24 घंटे अखंड रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं।
व्रत और भक्ति की परंपरा
शास्त्री जी के अनुसार, सावन के चार सोमवार व्रत रखे जाते हैं और पाँचवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। कुछ भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, तो कुछ निर्जला। उन्होंने कहा, 'भोलेनाथ एकमात्र ऐसे देव हैं जो बड़ी सहजता से प्रसन्न हो जाते हैं — जल अर्पित करने मात्र से भी वे संतुष्ट हो जाते हैं।'
अमरनाथ यात्रा से ऐतिहासिक संबंध
पुजारी ने यह भी बताया कि ऐतिहासिक दृष्टि से अमरनाथ यात्रा की पवित्र छड़ी कभी इसी मंदिर से प्रस्थान करती थी। उन्होंने बताया कि कालांतर में यह परंपरा पहले जम्मू और फिर श्रीनगर स्थानांतरित हो गई। यह तथ्य मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और अधिक रेखांकित करता है।
भक्तों की आस्था और उपस्थिति
श्रावण के पहले सोमवार को मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक किया और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 15 अगस्त के अखंड रुद्राभिषेक में भाग लेने के इच्छुक भक्त सीधे मंदिर में उपस्थित हो सकते हैं। सावन के शेष सोमवारों पर भी यह आयोजन जारी रहेगा।