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अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में शिवलिंग का रंग बदलता है दिन में, सावन सोमवार पर उमड़ी भक्तों की भीड़

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अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में शिवलिंग का रंग बदलता है दिन में, सावन सोमवार पर उमड़ी भक्तों की भीड़

सारांश

अमृतसर के श्री दुर्गियाना मंदिर का स्फटिक शिवलिंग दिन में रंग बदलता है — कभी बर्फ जैसा सफेद, कभी नीला, कभी दर्पण-सा पारदर्शी। सावन में 24 घंटे रुद्राभिषेक और 15 अगस्त को विशेष अखंड आयोजन इस प्राचीन मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खास बनाता है।

मुख्य बातें

अमृतसर के श्री दुर्गियाना मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया गया।
मंदिर के पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, यहाँ का स्फटिक शिवलिंग दिन में रंग बदलता है — सफेद, नीला और पारदर्शी।
सावन माह में यहाँ 24 घंटे लगातार रुद्राभिषेक होता है; 15 अगस्त को विशेष अखंड रुद्राभिषेक का आयोजन।
सावन के चार सोमवार व्रत रखे जाते हैं और पाँचवें को उद्यापन की परंपरा है।
ऐतिहासिक रूप से अमरनाथ यात्रा की पवित्र छड़ी कभी इसी मंदिर से प्रस्थान करती थी।

अमृतसर स्थित श्री दुर्गियाना मंदिर में श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान शिव का दिव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए पहुँचे। मंदिर के पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, यहाँ का स्फटिक शिवलिंग दिन में अपना रंग बदलता है — जो इस प्राचीन मंदिर की सबसे विशेष धार्मिक विशेषता मानी जाती है।

शिवलिंग की अद्भुत विशेषता

पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री ने बताया, 'इस मंदिर के शिवलिंग का स्फटिक नीले रंग का होता है, लेकिन खास बात यह है कि दिन में शिवलिंग का रंग बदल जाता है। कभी बर्फ जैसा सफेद, तो कभी नीला और कभी पारदर्शी — शीशे के समान — जिसमें आप अपना चेहरा देख सकते हैं।' उन्होंने इसे 'महादेव की लीला' बताया।

सावन में विशेष श्रृंगार और रुद्राभिषेक

शास्त्री जी ने बताया कि श्री दुर्गियाना मंदिर अत्यंत प्राचीन है और सावन के पवित्र महीने में प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का फूलों और विविध सजावटी सामग्री से भव्य श्रृंगार किया जाता है। उन्होंने कहा कि सावन माह में यहाँ 24 घंटे लगातार रुद्राभिषेक होता है। विशेष रूप से 15 अगस्त को भी 24 घंटे अखंड रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं।

व्रत और भक्ति की परंपरा

शास्त्री जी के अनुसार, सावन के चार सोमवार व्रत रखे जाते हैं और पाँचवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। कुछ भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, तो कुछ निर्जला। उन्होंने कहा, 'भोलेनाथ एकमात्र ऐसे देव हैं जो बड़ी सहजता से प्रसन्न हो जाते हैं — जल अर्पित करने मात्र से भी वे संतुष्ट हो जाते हैं।'

अमरनाथ यात्रा से ऐतिहासिक संबंध

पुजारी ने यह भी बताया कि ऐतिहासिक दृष्टि से अमरनाथ यात्रा की पवित्र छड़ी कभी इसी मंदिर से प्रस्थान करती थी। उन्होंने बताया कि कालांतर में यह परंपरा पहले जम्मू और फिर श्रीनगर स्थानांतरित हो गई। यह तथ्य मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और अधिक रेखांकित करता है।

भक्तों की आस्था और उपस्थिति

श्रावण के पहले सोमवार को मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक किया और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 15 अगस्त के अखंड रुद्राभिषेक में भाग लेने के इच्छुक भक्त सीधे मंदिर में उपस्थित हो सकते हैं। सावन के शेष सोमवारों पर भी यह आयोजन जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो वैज्ञानिक व्याख्या से परे भक्तों की श्रद्धा को जीवित रखती है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्फटिक (क्वार्ट्ज क्रिस्टल) प्रकाश और तापमान के अनुसार अपना रंग-दर्शन बदल सकता है, जो इस घटना की एक संभावित प्राकृतिक व्याख्या है — हालाँकि मंदिर इसे दैवीय लीला के रूप में प्रस्तुत करता है। अमरनाथ यात्रा के साथ मंदिर का ऐतिहासिक संबंध एक ऐसा तथ्य है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है और यह पंजाब की शैव परंपरा की गहराई को दर्शाता है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री दुर्गियाना मंदिर का शिवलिंग रंग क्यों बदलता है?
मंदिर के पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, यहाँ का शिवलिंग स्फटिक का बना है और दिन में इसका रंग बदलता रहता है — कभी बर्फ जैसा सफेद, कभी नीला और कभी दर्पण की तरह पारदर्शी। इसे भक्त महादेव की दिव्य लीला मानते हैं।
अमृतसर के दुर्गियाना मंदिर में सावन के दौरान क्या विशेष होता है?
सावन माह में यहाँ प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का फूलों और सजावटी सामग्री से भव्य श्रृंगार होता है। इसके अलावा पूरे माह 24 घंटे लगातार रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है और भक्त जलाभिषेक व मनोकामना-पूजन के लिए बड़ी संख्या में आते हैं।
15 अगस्त को दुर्गियाना मंदिर में क्या आयोजन है?
पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, 15 अगस्त को मंदिर में 24 घंटे अखंड रुद्राभिषेक का विशेष आयोजन होगा। इच्छुक श्रद्धालु रुद्राभिषेक करवाने या उसमें शामिल होने के लिए सीधे मंदिर में आ सकते हैं।
सावन सोमवार का व्रत कैसे रखा जाता है?
परंपरा के अनुसार सावन के चार सोमवार व्रत रखे जाते हैं और पाँचवें सोमवार को उद्यापन किया जाता है। कुछ भक्त फलाहार व्रत रखते हैं, तो कुछ निर्जला — यह पूरी तरह व्यक्ति की आस्था और श्रद्धा पर निर्भर करता है।
दुर्गियाना मंदिर का अमरनाथ यात्रा से क्या संबंध है?
पुजारी मेघा श्याम लाल शास्त्री के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से अमरनाथ यात्रा की पवित्र छड़ी अमृतसर स्थित श्री दुर्गियाना मंदिर से ही प्रस्थान करती थी। बाद में यह परंपरा जम्मू और फिर श्रीनगर स्थानांतरित हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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