बुरहानपुर के 130 साल पुराने मंदिर में सावन पर सवा लाख शिवलिंग, 8 साल से जारी है अनोखी परंपरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में श्रावण माह के अवसर पर एक अनूठी आस्था का नज़ारा देखने को मिल रहा है। शहर के एक 130 साल पुराने मंदिर में पिछले 8 वर्षों से प्रतिवर्ष सवा लाख शिवलिंग निर्मित किए जाते हैं — और इस बार यह नौवाँ संस्करण है। महिलाओं, बच्चों और बुज़ुर्गों की सामूहिक भागीदारी इस आयोजन को बुरहानपुर की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बना चुकी है।
आयोजन का स्वरूप और समयसारणी
स्थानीय निवासी शकुंतला गंगे ने बताया कि शिवलिंग निर्माण का यह कार्यक्रम प्रतिदिन दोपहर 2 बजे आरंभ होता है और शाम 5 बजे तक चलता है। उन्होंने कहा, 'हम हर साल सवा लाख शिवलिंग बनाते हैं।' इसके पश्चात सुबह 4 बजे भोलेनाथ का अभिषेक, आरती और प्रसाद वितरण का क्रम होता है।
समुदाय की श्रद्धा और सहभागिता
ऊषा मिश्रा ने बताया कि यह आयोजन सामूहिक हर्षोल्लास का पर्व बन चुका है, जिसमें कथा, भजन और कीर्तन भी शामिल होते हैं। अनीता अमर यादव के अनुसार, इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य शहर के समस्त नागरिकों की सुख-समृद्धि और आर्थिक खुशहाली की कामना है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
अमर यादव ने जानकारी दी कि यह मंदिर 130 वर्ष पुराना है और बुरहानपुर जिले में दशहरे के आयोजन का केंद्र भी यही रहा है। इसी मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न होता है। 18 तारीख से यहाँ राम कथा और खाटू-श्याम महाराज के भजन का भी आयोजन प्रस्तावित है।
आगे क्या
इस वर्ष नौवें संस्करण के साथ यह परंपरा और व्यापक रूप ले रही है। आयोजकों का संकल्प है कि यह सिलसिला आने वाले वर्षों में भी अनवरत जारी रहे और बुरहानपुर की आध्यात्मिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाया जाए।