DUSU चुनाव में ABVP की जीत: प्रफुल्ल पटेल बोले — जेनजी को सस्ती राजनीति नहीं, भविष्य चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने 20 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जीत को विपक्ष के लिए एक स्पष्ट संदेश बताया — कि आज की युवा पीढ़ी (जेनजी) अपने करियर और भविष्य को लेकर सजग है, न कि राजनीतिक नारेबाज़ी से प्रभावित। मीडिया से बातचीत में पटेल ने कहा कि छात्रों ने अपने मतदान के ज़रिये यह साफ कर दिया है कि वे तथाकथित 'सस्ती राजनीति' में कोई दिलचस्पी नहीं रखते।
पटेल का विपक्ष पर सीधा निशाना
प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए एक अप्रत्यक्ष मंच रहा है — जहाँ NSUI, ABVP और वामपंथी छात्र संगठन सभी चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने कहा कि इस बार छात्रों ने जिसे चुना, वह अपने आप में एक संकेत है कि युवा उन मुद्दों में रुचि नहीं रखते जो केवल राजनीतिक बहस के लिए उठाए जाते हैं। हालाँकि उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ओर था, जो उस समय इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित कर रहे थे।
परीक्षा पेपर लीक और सरकार की जवाबदेही
पटेल ने छात्रों की परीक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता का सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस मामले में संज्ञान लिया और एक मंत्री ने छात्रहित में इस्तीफा भी दिया। केंद्र सरकार ने परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
बिहार के मंत्रियों ने भी की ABVP की सराहना
बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के हर फैसले में छात्र और युवा हमेशा केंद्र में रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी नेता हाल के विरोध-प्रदर्शनों से राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन DUSU के नतीजों ने उनकी रणनीति की सीमाएँ उजागर कर दी हैं। बिहार के मंत्री संजय सिंह ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का आभार जताया और ABVP को शुभकामनाएँ दीं।
कांग्रेस का पलटवार
दूसरी ओर, कांग्रेस चंडीगढ़ के अध्यक्ष एचएस लकी ने DUSU नतीजों की व्याख्या पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और ABVP अपनी छोटी जीतों को बड़ा बनाकर पेश करती हैं, जबकि पंजाब विश्वविद्यालय में NSUI-समर्थित पैनल के उम्मीदवार को सर्वाधिक वोट मिले। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में जो उपाध्यक्ष जीते, वह NSUI के बागी उम्मीदवार थे जिन्हें सर्वाधिक मत मिले। उनके अनुसार गढ़वाल विश्वविद्यालय सहित कई अन्य विश्वविद्यालयों में हाल ही में हुए चुनावों में NSUI की जीत हुई, लेकिन इन्हें मीडिया में उचित स्थान नहीं मिला।
आगे क्या
DUSU चुनाव के नतीजों पर राजनीतिक बयानबाज़ी का यह दौर आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने की संभावना है, खासकर तब जब कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है। युवा मतदाताओं का रुझान और छात्र राजनीति का परिदृश्य राष्ट्रीय दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।