ई-वीजा धारकों के लिए 11 नए प्रवेश द्वार: भारत के अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की संख्या बढ़कर 88 हुई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 10 अगस्त 2026 को ई-वीजा धारक विदेशी नागरिकों के लिए 11 नए अंतरराष्ट्रीय प्रवेश पोर्ट्स अधिसूचित किए, जिनमें 9 लैंड पोर्ट्स और 2 हवाई अड्डे शामिल हैं। इस विस्तार के बाद ई-वीजा धारकों के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय पोर्ट्स की कुल संख्या 77 से बढ़कर 88 हो गई है, जो भारत की वीजा-सुगमता नीति में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नए पोर्ट्स में क्या शामिल है
नए अधिसूचित हवाई अड्डों में भोपाल और तिरुपति को शामिल किया गया है। नए लैंड पोर्ट्स में अगरतला, दर्रांगा, गेड़े, घोजाडांगा, हरिदासपुर, जयगांव, डावकी, मोरेह और अटारी (रोड) शामिल हैं। ये पोर्ट्स मुख्यतः भारत की पूर्वोत्तर और पश्चिमोत्तर सीमाओं पर स्थित हैं, जो पड़ोसी देशों के साथ संपर्क को और सुदृढ़ करेंगे।
इस विस्तार के बाद ई-वीजा धारक विदेशी नागरिक अब 37 हवाई अड्डों, 38 बंदरगाहों और 13 लैंड पोर्ट्स के माध्यम से भारत में प्रवेश कर सकेंगे।
ई-वीजा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, भारत वर्तमान में लगभग 95 प्रतिशत ई-वीजा आवेदनों का निपटारा 72 घंटे से भी कम समय में करता है। कुल जारी किए जाने वाले वीजा में ई-वीजा की हिस्सेदारी 78 प्रतिशत तक पहुँच चुकी है, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाती है।
ई-वीजा सुविधा 17 विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध है — पर्यटक, व्यवसाय, चिकित्सा, छात्र, ट्रांजिट, पर्वतारोहण और क्रूज यात्रियों के लिए समूह विजिटर वीजा सहित।
ई-वीजा का विस्तार: एक दशक की यात्रा
गौरतलब है कि भारत में ई-वीजा सुविधा की शुरुआत वर्ष 2014 में केवल 43 देशों के नागरिकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन (ETA) के रूप में की गई थी। एक दशक में यह सुविधा 172 देशों के नागरिकों तक विस्तारित हो चुकी है — यह विस्तार भारत की बदलती विदेश और पर्यटन नीति का प्रतिबिंब है।
केंद्र सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वीजा व्यवस्था को अधिक उदार, सरल और तकनीक-आधारित बनाया गया है, जिसका उद्देश्य वैध विदेशी यात्रियों को सुविधा देने के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को भी मज़बूत करना है।
पर्यटन और व्यापार पर संभावित असर
सरकार का मानना है कि नए पोर्ट्स के जुड़ने से पर्यटन, व्यापार, चिकित्सा यात्रा और अंतरराष्ट्रीय संपर्क को बल मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वोत्तर सीमा पर नए लैंड पोर्ट्स से बांग्लादेश और म्यांमार के साथ सीमा-पार आवाजाही अधिक सुव्यवस्थित होगी, जबकि भोपाल और तिरुपति हवाई अड्डों के शामिल होने से मध्य भारत और आंध्र प्रदेश में धार्मिक व सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक पर्यटन बाज़ार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धी वीजा नीतियाँ अपनाने पर ज़ोर दे रहा है। आने वाले महीनों में इस नीति के क्रियान्वयन और विदेशी आगमन के आँकड़ों पर नज़र रखी जाएगी।