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ईडी की छापेमारी: मड्रेक्स से जुड़ी कंपनी पर क्रिप्टो से अनधिकृत सीमा पार लेनदेन का आरोप

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ईडी की छापेमारी: मड्रेक्स से जुड़ी कंपनी पर क्रिप्टो से अनधिकृत सीमा पार लेनदेन का आरोप

सारांश

ईडी ने क्रिप्टो से अनधिकृत सीमा पार धन हस्तांतरण के आरोप में बेंगलुरु की कंपनी आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज के 4 ठिकानों पर 27 अक्टूबर को छापेमारी की। कंपनी पर मड्रेक्स और सेबर मनी प्लेटफॉर्म के जरिए RBI की अनुमति के बिना USDT-USDC स्टेबलकॉइन से भुगतान सेवाएँ देने का आरोप है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर छापेमारी की।
जांच एम/एस आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ है, जो कथित तौर पर 'मड्रेक्स' और 'सेबर मनी' प्लेटफॉर्म संचालित करती है।
आरोप है कि कंपनी यूएसडीटी और यूएसडीसी स्टेबलकॉइन के जरिए RBI की अनुमति के बिना सीमा पार भुगतान सेवाएँ दे रही थी।
कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत की गई।
ईडी ने बरामदगी या जांच के अन्य निष्कर्षों की विस्तृत जानकारी अभी तक सार्वजनिक नहीं की है; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु और मध्य प्रदेश में कुल चार ठिकानों पर छापेमारी की, जो कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबलकॉइन के माध्यम से अनधिकृत सीमा पार धन हस्तांतरण से जुड़ी बेंगलुरु की कंपनी एम/एस आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित हैं। यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 की धारा 37 के तहत ईडी के बेंगलुरु जोनल कार्यालय द्वारा की गई।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी के अनुसार, जांच की शुरुआत उस कंपनी के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर हुई जो कथित तौर पर 'मड्रेक्स' और 'सेबर मनी' नाम से डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालित करती है। इन प्लेटफॉर्मों पर यूएसडीटी (USDT) और यूएसडीसी (USDC) जैसे स्टेबलकॉइन का उपयोग कर अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण की सुविधा दिए जाने का आरोप है।

गौरतलब है कि ये स्टेबलकॉइन अमेरिकी डॉलर से जुड़े क्रिप्टो टोकन होते हैं, जिनका मूल्य स्थिर रहता है और इन्हें सीमा पार भुगतान में पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर रहकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

कंपनी पर क्या हैं आरोप

एजेंसी का कहना है कि कंपनी की वेबसाइटों पर ऑन-रैंप और ऑफ-रैंप सेवाओं का प्रचार किया जा रहा था। ऑन-रैंप सेवा के तहत भारतीय रुपये, अमेरिकी डॉलर और यूरो जैसी पारंपरिक मुद्राओं को बिटकॉइन या यूएसडीटी जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट में बदला जाता है, जबकि ऑफ-रैंप के जरिए क्रिप्टोकरेंसी बेचकर प्राप्त राशि सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित की जा सकती है।

ईडी के अनुसार, इन दोनों सेवाओं के संयुक्त उपयोग से पारंपरिक मुद्रा को पहले क्रिप्टो में बदलकर दूसरे देश भेजा जा सकता है और फिर वहाँ उसे स्थानीय मुद्रा में परिवर्तित किया जा सकता है — इस प्रकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से अनुमोदित औपचारिक सीमा पार भुगतान व्यवस्था को दरकिनार किए जाने की आशंका है।

जांच का दायरा और फेमा उल्लंघन की आशंका

ईडी की प्रारंभिक गोपनीय जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर एजेंसी को संदेह है कि कंपनी RBI से बिना किसी अधिकृत अनुमति के सीमा पार भुगतान सेवाएँ उपलब्ध करा रही थी, जो फेमा के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन को लेकर नीतिगत स्पष्टता अभी भी विकसित हो रही है और सरकार व नियामक संस्थाएँ अनधिकृत डिजिटल लेनदेन पर शिकंजा कस रही हैं।

फिलहाल, ईडी ने छापेमारी के दौरान की गई बरामदगी या जांच के अन्य विस्तृत निष्कर्षों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। एजेंसी ने केवल इतना बताया कि बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक स्थान पर तलाशी ली गई।

आगे की जांच

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला भारत में क्रिप्टो-आधारित फिनटेक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि फेमा अनुपालन और RBI की अनुमति के बिना सीमा पार भुगतान सेवाएँ देना कानूनी जोखिम से भरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्टेबलकॉइन-आधारित ऑन-रैंप/ऑफ-रैंप सेवाओं के लिए स्पष्ट नियमन अभी अधूरा है। इस अस्पष्टता का फायदा उठाकर कई कंपनियाँ 'भुगतान नवाचार' की आड़ में अनधिकृत विदेशी विनिमय गतिविधि चला सकती हैं — और ईडी की यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र को एक स्पष्ट संदेश है। असली सवाल यह है कि क्या भारत नियमन की कमी को दूर करेगा या केवल प्रवर्तन के जरिए इस उद्योग को नियंत्रित करता रहेगा।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने मड्रेक्स से जुड़ी कंपनी पर छापेमारी क्यों की?
ईडी ने 27 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु की कंपनी एम/एस आरपीएफएएस टेक्नोलॉजीज के ठिकानों पर इसलिए छापेमारी की क्योंकि उस पर मड्रेक्स और सेबर मनी प्लेटफॉर्म के जरिए RBI की अनुमति के बिना क्रिप्टोकरेंसी से सीमा पार धन हस्तांतरण का आरोप है। यह कार्रवाई फेमा, 1999 के तहत की गई।
मड्रेक्स और सेबर मनी प्लेटफॉर्म क्या करते हैं?
ईडी के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म ऑन-रैंप और ऑफ-रैंप सेवाओं के जरिए पारंपरिक मुद्राओं को क्रिप्टोकरेंसी में और वापस मुद्रा में बदलने की सुविधा देते हैं। आरोप है कि इनके माध्यम से USDT और USDC जैसे स्टेबलकॉइन का उपयोग कर अनधिकृत अंतरराष्ट्रीय भुगतान किए जा रहे थे।
फेमा के तहत इस मामले में क्या उल्लंघन का आरोप है?
आरोप है कि कंपनी बिना RBI की अनुमति के सीमा पार भुगतान सेवाएँ दे रही थी, जो विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन हो सकता है। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि क्रिप्टो लेनदेन के जरिए अधिकृत विदेशी मुद्रा माध्यमों को जानबूझकर दरकिनार किया गया।
छापेमारी में अब तक क्या मिला है?
ईडी ने अभी तक बरामदगी या जांच के विस्तृत निष्कर्षों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। एजेंसी ने केवल यह बताया कि बेंगलुरु में तीन और मध्य प्रदेश में एक ठिकाने पर तलाशी ली गई और जांच जारी है।
यह मामला भारत में क्रिप्टो फिनटेक कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह मामला भारत में क्रिप्टो-आधारित भुगतान सेवाओं के नियमन को लेकर बढ़ती सख्ती का संकेत है। RBI की अनुमति के बिना डिजिटल एसेट के जरिए सीमा पार भुगतान देना फेमा के तहत दंडनीय हो सकता है, और यह कार्रवाई क्षेत्र की अन्य कंपनियों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है।
राष्ट्र प्रेस
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