ईडी की नार्को-टेरर नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: पंजाब और जम्मू-कश्मीर में 9 ठिकानों पर छापे, ₹49.9 लाख के खाते फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 24 जुलाई 2026 को नार्को-टेरर फंडिंग के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करते हुए पंजाब और जम्मू-कश्मीर (नियंत्रण रेखा के निकट) में स्थित 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई और जम्मू-कश्मीर पुलिस तथा पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज मामलों की जाँच के क्रम में की गई। इस अभियान में कई महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़, बैंक रिकॉर्ड और आपत्तिजनक सामग्री ज़ब्त की गई, साथ ही करीब ₹49.9 लाख की राशि वाले बैंक खाते फ्रीज किए गए।
बहुस्तरीय नार्को-टेरर नेटवर्क का खुलासा
ईडी की जाँच में एक संगठित और बहुस्तरीय नार्को-टेरर फंडिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है, जो पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच सक्रिय था। जाँच के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन पंजाब के सतनाम सिंह और मनजीत सिंह उर्फ मान जैसे हैंडलर कर रहे थे। वहीं, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले में नियंत्रण रेखा के निकट रहने वाले सफीर अहमद और कफील अहमद भी इस नेटवर्क का हिस्सा बताए गए हैं।
ईडी के अनुसार, पाकिस्तान से हेरोइन की खेप उन हैंडलरों के ज़रिए भारत भेजी जाती थी, जिनका संबंध कथित तौर पर आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से बताया गया है। ये हैंडलर कश्मीर में मौजूद आरोपियों के संपर्क में रहते थे और अमरोही सीमा/नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों के रास्ते हेरोइन की तस्करी करते थे।
मुख्य घटनाक्रम: 31 किलो हेरोइन की बरामदगी
जाँच में सामने आया कि एक मामले में 35 पैकेट हेरोइन भारत लाई गई थी। इनमें से 5 पैकेट स्थानीय स्तर पर रखे या वितरित किए गए, जबकि 30 पैकेट ट्रक के टायर में छिपाकर श्रीनगर भेजे गए। यह खेप बाद में पंजाब के कैरियर सरबजीत सिंह और हनी बसरा को सौंपी गई। सितंबर 2023 में बनिहाल में दोनों को रोककर तलाशी ली गई, जहाँ से करीब 31 किलोग्राम वज़न के 30 पैकेट हेरोइन बरामद की गई।
गौरतलब है कि जाँच में ऐसे कई अन्य मामलों का भी खुलासा हुआ, जिनमें श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर से पंजाब तक 60 किलोग्राम से अधिक हेरोइन इसी संगठित नेटवर्क के ज़रिए पहुँचाई गई। इसके लिए अलग-अलग कैरियर और ट्रांसपोर्टरों की सेवाएँ ली जाती थीं।
तस्करी के तरीके और वित्तीय साक्ष्य
ईडी ने पाया कि पंजाब का नेटवर्क फर्ज़ी दस्तावेज़, नकली वाहन कागज़ात, वाहनों में बनाई गई गुप्त जगहों, कई वाहनों और नकद लेनदेन का इस्तेमाल कर हेरोइन की ढुलाई और वितरण करता था। जाँच में मनजीत सिंह उर्फ मान और सरबजीत सिंह के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा होने के साक्ष्य भी मिले हैं।
ईडी के अनुसार, हेरोइन की बिक्री से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को वित्तीय सहायता देने में किया जाता था — यही इस मामले को सामान्य नशा तस्करी से अलग और अधिक गंभीर बनाता है।
छापेमारी में क्या मिला
छापेमारी के दौरान ईडी ने महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़, बैंक रिकॉर्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री ज़ब्त की। इसके अलावा, करीब ₹49.9 लाख की राशि वाले कई बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सुरक्षा एजेंसियाँ सीमा-पार नार्को-टेरर नेटवर्क के विरुद्ध अपनी मुहिम तेज़ कर रही हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले की आगे की जाँच जारी है। ईडी द्वारा ज़ब्त दस्तावेज़ों और बैंक रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियाँ खोली जा सकती हैं। जाँच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में और गिरफ्तारियाँ और संपत्तियों की कुर्की से इनकार नहीं किया जा सकता।