फिरहाद हकीम की कंपनियों पर न्यायिक जांच टीम का छापा, कोलकाता में भ्रष्टाचार जांच तेज़
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग की टीम ने 3 सितंबर को कोलकाता में पूर्व नगरपालिका मामलों एवं शहरी विकास मंत्री तथा कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम से जुड़ी दो कॉर्पोरेट कंपनियों के दफ्तरों में तलाशी ली। यह कार्रवाई 2011 से 2026 के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की व्यापक जांच का हिस्सा है।
कहाँ और कैसे हुई छापेमारी
जांच टीम दोपहर में दक्षिण कोलकाता के टॉलीगंज सर्कुलर रोड पर स्थित हकीम पॉलीमेकर्स प्राइवेट लिमिटेड और हकीम केमिकल्स के कार्यालयों में पहुँची। कोलकाता पुलिस की उपस्थिति में यह तलाशी अभियान चलाया गया। कंपनियों की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों कंपनियाँ हकीम की हैं।
जांच का मकसद
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, आयोग की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि क्या कथित भ्रष्टाचार से अर्जित धन इन कंपनियों में निवेश किया गया था। साथ ही, टीम यह भी जाँच रही थी कि इन कंपनियों के कामकाज और पिछली राज्य सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार के बीच कोई सीधा संबंध है या नहीं। सूत्रों ने यह भी बताया कि जांच टीम के पहुँचने पर हकीम या उनके परिवार का कोई भी सदस्य दोनों कार्यालयों में मौजूद नहीं था।
फिरहाद हकीम कौन हैं
फिरहाद हकीम, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'बॉबी' के नाम से जाने जाते हैं, तृणमूल कांग्रेस के चार बार विधायक रह चुके हैं। इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्होंने कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार राकेश सिंह को 56,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। गौरतलब है कि इस चुनाव में राज्य में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था।
न्यायिक आयोग की पृष्ठभूमि
14 जुलाई को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 2011 से 2026 के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार के दौरान संस्थागत भ्रष्टाचार के विभिन्न आरोपों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन की घोषणा की थी। इस आयोग के प्रमुख कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बिस्वजीत बसु (सेवानिवृत्त) हैं।
आयोग की संरचना
आयोग की जांच एक वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की देखरेख में की जा रही है। इसका प्रशासनिक कार्य एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी संभाल रहे हैं, जबकि तकनीकी पहलुओं की ज़िम्मेदारी पश्चिम बंगाल राजस्व सेवा के एक अधिकारी को सौंपी गई है। यह जांच पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पिछली सरकार के कार्यकाल की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।