जॉर्ज कुरियन का मंत्री पद से इस्तीफा मंजूर, राष्ट्रपति मुर्मु ने अनुच्छेद 75 के तहत तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने 23 जून 2026 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री की सलाह पर संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। मध्य प्रदेश से उनका राज्यसभा कार्यकाल 24 जून 2026 को समाप्त हो जाने के कारण संवैधानिक अनिवार्यता के चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
इस्तीफे की वजह
संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, केंद्रीय मंत्री का संसद का सदस्य होना अनिवार्य है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से पहले ही संकेत दे दिए गए थे कि कुरियन को राज्यसभा के लिए दोबारा नहीं भेजा जाएगा। 21 जून 2026 को उनका कार्यकाल समाप्त होते ही मंत्री पद से हटना अपरिहार्य हो गया। पार्टी की ओर से इस्तीफे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जॉर्ज कुरियन: राजनीतिक परिचय
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम जिले के निवासी हैं और 1980 में BJP की स्थापना के समय से ही पार्टी के सदस्य रहे हैं। उन्होंने केरल BJP के उपाध्यक्ष, प्रवक्ता, अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटीज के बोर्ड सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं।
मंत्री के रूप में कार्यकाल
कुरियन ने 9 जून 2024 को मोदी सरकार 3.0 में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में शपथ ली थी। 11 जून 2024 को उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। उनकी नियुक्ति को केरल में पार्टी की ईसाई समुदाय तक पहुँच बनाने की रणनीति का हिस्सा माना गया था।
केरल चुनाव और राजनीतिक भविष्य
केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कुरियन कंजिराप्पल्ली सीट से BJP उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ईसाई समुदाय के प्रमुख चेहरे के रूप में उनकी पहचान को देखते हुए, उनका मंत्रिपरिषद से बाहर होना केरल में पार्टी की अल्पसंख्यक आउटरीच रणनीति पर असर डाल सकता है। गौरतलब है कि BJP के लिए केरल में ईसाई मतदाताओं तक पहुँच बनाना एक दीर्घकालिक प्राथमिकता रही है।
आगे की स्थिति
फिलहाल उनके मंत्रालयों के प्रभार के पुनर्वितरण को लेकर सरकार की ओर से कोई घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कुरियन का पार्टी में भविष्य की भूमिका इस बात पर निर्भर करेगी कि BJP केरल में अपनी रणनीति को किस दिशा में ले जाती है।