जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद केरल में भाजपा का अगला दांव: सी. सदानंदन मास्टर पर निगाहें
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार, 23 जून 2026 को अपना मंत्री पद से इस्तीफा सौंप दिया, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकार कर लिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उन्हें राज्यसभा में दोबारा न भेजने के निर्णय के बाद केरल के केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार केरल को एक और कैबिनेट प्रतिनिधि देगी।
मुख्य घटनाक्रम
कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही उनका मंत्री पद भी स्वतः समाप्त हो गया। सूत्रों के अनुसार, वे अब केरल में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में लौट सकते हैं और उन्होंने स्वयं भी राज्य में पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई है। हालाँकि, BJP ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कोई जिम्मेदारी दी जाएगी या राज्य संगठन में कोई भूमिका सौंपी जाएगी।
कुरियन का राजनीतिक सफर
पेशे से वकील और सर्वोच्च न्यायालय में प्रैक्टिस कर चुके जॉर्ज कुरियन 1980 में BJP के गठन के समय से ही पार्टी से जुड़े रहे हैं। वे पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, कोर कमेटी सदस्य और प्रवक्ता जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। जब ओ. राजगोपाल केंद्रीय मंत्री थे, तब कुरियन उनके विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी कार्यरत थे।
जून 2024 में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में उन्हें मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री के रूप में शामिल किया गया था — उस समय वे संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में अगस्त 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया, जो सीट केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा सदस्य बनने के बाद रिक्त हुई थी।
हालाँकि, केरल की चुनावी राजनीति में कुरियन का सफर कभी सफल नहीं रहा। उन्होंने कई विधानसभा चुनाव लड़े, जिनमें हालिया चुनाव में कंजीरापल्ली सीट से भी किस्मत आजमाई, लेकिन जीत नहीं मिली।
केरल से BJP का चौथा अनुभव
गौरतलब है कि कुरियन ऐसे चौथे नेता बन गए हैं जो केरल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए लेकिन दूसरा कार्यकाल हासिल नहीं कर सके। इससे पहले ओ. राजगोपाल, के.जे. अल्फोंस और वी. मुरलीधरन भी राज्यसभा के रास्ते संसद पहुँचे और केंद्रीय मंत्री बने, लेकिन दूसरे कार्यकाल से वंचित रहे। यह ऐसे समय में आया है जब BJP केरल में अपनी जड़ें मजबूत करने की लगातार कोशिश कर रही है।
केरल का मौजूदा प्रतिनिधित्व
फिलहाल केंद्र सरकार में केरल से BJP के एकमात्र मंत्री अभिनेता से राजनेता बने सुरेश गोपी हैं, जिन्होंने त्रिशूर लोकसभा सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
आगे क्या होगा
राजनीतिक हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि क्या BJP के राज्यसभा उम्मीदवार सी. सदानंदन मास्टर को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी। यदि ऐसा नहीं होता, तो मोदी कैबिनेट में केरल का प्रतिनिधित्व केवल एक मंत्री तक सीमित रह जाएगा — जो राज्य में पार्टी की विस्तार रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।