गाजियाबाद हत्याकांड: ओमप्रकाश राजभर का ऐलान — 'कोई दोषी नहीं बचेगा', सपा पर तीखा पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शनिवार, 30 मई को गाजियाबाद हत्याकांड पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि इस अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी दोषियों को कानून के दायरे में सज़ा दिलाई जाएगी। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को केवल गाजियाबाद की घटना पर नहीं, बल्कि चंदौली, मऊ और बाराबंकी की हिंसक घटनाओं पर भी आवाज़ उठानी चाहिए।
मंत्री राजभर का बयान
राजभर ने कहा, 'एक हत्या हुई है और परिवार शोक में डूबा है। हमारी संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं। कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के दायरे में सभी की गिरफ्तारी होगी और दोषियों को सज़ा दिलाई जाएगी।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
सपा पर पलटवार — चंदौली, मऊ, बाराबंकी का ज़िक्र
राजभर ने सपा की चुनिंदा आलोचना को निशाने पर लेते हुए कहा, 'चंदौली में अखिलेश यादव की जाति के 4 लोगों ने सपा की महिला मंच की जिला अध्यक्ष को घर में घुसकर पीटा। दो दिन पहले मऊ के हलदरपुर थाने में चार यादवों ने एक राजभर की गोली मारकर हत्या की। बाराबंकी में राजभर समाज के एक और युवक की गर्दन काट दी गई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं पर सपा और अखिलेश यादव की चुप्पी सवाल खड़े करती है।
अखिलेश यादव के आरोप
गौरतलब है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और हत्या, लूट व बलात्कार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा था कि गाजियाबाद से गाजीपुर तक हर दिन कई हत्याएं हो रही हैं।
केरल के 'वंदे मातरम' विवाद पर भी बोले राजभर
इसी दौरान राजभर ने केरल में 'वंदे मातरम' को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच उपजे विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को इस देश में रहना है, तो उसे वंदे मातरम कहना ही होगा। प्रधानमंत्री ने यह बयान संविधान के दायरे में रहते हुए दिया है, और देश में हर किसी को इसका पालन करना होगा।'
आगे क्या
गाजियाबाद हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई जारी है और राजभर के बयान के बाद दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी का दबाव प्रशासन पर बढ़ गया है। यह मामला उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक तकरार का नया केंद्र बन गया है।