31 अक्टूबर 2026
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गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, एसटी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की रक्षा के लिए बड़ा फैसला

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गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी, एसटी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की रक्षा के लिए बड़ा फैसला

सारांश

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ द्वारा अधिसूचना पर अंतरिम रोक के बाद गोवा सरकार अब सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएगी। CM सावंत की अगुवाई में हुई उच्चस्तरीय बैठक में सर्वसम्मत निर्णय — 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एसटी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की यह लड़ाई निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

गोवा सरकार ने एसटी समुदाय के विधानसभा में राजनीतिक आरक्षण की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया।
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने एसटी आबादी के अनुमानित आँकड़ों से जुड़ी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाई।
30 अक्टूबर 2026 को CM प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक में सर्वसम्मत निर्णय।
जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मिलने नई दिल्ली जाएगा।
सरकार का लक्ष्य 2027 गोवा विधानसभा चुनाव से पहले इस लंबित माँग को पूरा करना है।

गोवा सरकार ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के विधानसभा में राजनीतिक आरक्षण को सुरक्षित रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्णय लिया है। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ द्वारा एसटी आबादी के अनुमानित आँकड़ों से संबंधित अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद उठाया गया है। 30 अक्टूबर 2026 को पणजी में मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह सर्वसम्मत निर्णय लिया गया।

उच्चस्तरीय बैठक में क्या तय हुआ

30 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस बैठक में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कानूनी प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में गोवा विधानसभा अध्यक्ष डॉ. गणेश गांवकर, जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर, महाधिवक्ता देविदास पंगम, गोवा भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष दामू नाइक, अधिवक्ता नरेंद्र सावईकर तथा एसटी समुदाय के कई प्रमुख नेता और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि मामले को सर्वोच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा और एसटी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण दिलाने की प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएँगे।

आगे की कानूनी रणनीति

पहले कदम के रूप में जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा। यह प्रतिनिधिमंडल भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात करेगा और हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कानूनी प्रभावों पर चर्चा कर आगे की रणनीति पर मार्गदर्शन माँगेगा।

गौरतलब है कि गोवा सरकार राज्य विधानसभा में एसटी समुदाय के लिए आरक्षण की प्रक्रिया को अमल में लाने के लिए पहले भी केंद्र सरकार के समक्ष यह माँग उठाती रही है। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा संबंधित अधिसूचना पर रोक लगाए जाने के बाद अब यह मामला एक निर्णायक कानूनी मोड़ पर पहुँच गया है।

समुदाय की चिंताएँ और राजनीतिक पृष्ठभूमि

आदिवासी नेताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों ने राजनीतिक आरक्षण लागू होने में हो रही देरी पर खुलकर नाराज़गी ज़ाहिर की है। उनका कहना है कि यह मसला लंबे समय से लंबित है और न्यायालयी अंतरिम आदेशों के कारण प्रक्रिया और जटिल हो गई है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील हो गया है।

एसटी समुदाय को विधानसभा में राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का सवाल गोवा में संवैधानिक अधिकारों और समावेशी लोकतंत्र की दृष्टि से लंबे समय से चर्चा में रहा है।

मुख्यमंत्री की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने दोहराया कि उनकी सरकार गोवा विधानसभा में एसटी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर कानूनी अड़चनों को दूर करने और समुदाय के संवैधानिक एवं राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास जारी रखेगी।

सावंत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले इस लंबे समय से लंबित माँग को पूरा करने के लिए दृढ़संकल्पित है और आदिवासी समुदाय को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें सर्वोच्च न्यायालय में दायर होने वाली याचिका और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ प्रतिनिधिमंडल की बैठक पर टिकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरिम रोक हटाने और अधिसूचना को बहाल कराने की प्रक्रिया पर सर्वोच्च न्यायालय का रुख ही आगे की दिशा तय करेगा। यह मामला गोवा में आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व के भविष्य को निर्धारित करने वाला साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह इस तथ्य को नहीं छुपाता कि एसटी समुदाय का राजनीतिक आरक्षण वर्षों से लटका हुआ है। असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार ने पहले अधिसूचना जारी करते समय कानूनी मजबूती सुनिश्चित की थी — जिस पर हाईकोर्ट ने ही रोक लगा दी। 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच यह कदम कानूनी प्रतिबद्धता और चुनावी गणित, दोनों से प्रेरित लगता है; आदिवासी समुदाय के लिए असली कसौटी न्यायालय में जीत नहीं, बल्कि विधानसभा में सीटों पर वास्तविक प्रतिनिधित्व होगी।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रही है?
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने एसटी आबादी के अनुमानित आँकड़ों से जुड़ी अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी, जिससे विधानसभा में एसटी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण की प्रक्रिया अटक गई। इस रोक को चुनौती देने और आरक्षण प्रक्रिया को बहाल कराने के लिए गोवा सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय जाने का निर्णय लिया है।
इस मामले में अगला कानूनी कदम क्या होगा?
जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा और भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मिलकर आगे की कानूनी रणनीति पर मार्गदर्शन माँगेगा। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।
गोवा में एसटी समुदाय को राजनीतिक आरक्षण की माँग कब से चली आ रही है?
गोवा में एसटी समुदाय की विधानसभा में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग लंबे समय से लंबित है। आदिवासी नेताओं ने बार-बार देरी पर नाराज़गी जताई है और संवैधानिक अधिकारों के तहत विधानसभा में उचित प्रतिनिधित्व की माँग की है।
इस बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
30 अक्टूबर 2026 को पणजी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में CM डॉ. प्रमोद सावंत, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. गणेश गांवकर, जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तवडकर, महाधिवक्ता देविदास पंगम, गोवा BJP अध्यक्ष दामू नाइक, अधिवक्ता नरेंद्र सावईकर और एसटी समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे।
2027 के गोवा चुनाव से इस मुद्दे का क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने स्पष्ट किया है कि सरकार 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले एसटी समुदाय की इस लंबित माँग को पूरा करने के लिए दृढ़संकल्पित है। इससे यह मुद्दा कानूनी के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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