सोना ₹1,53,681 और चांदी ₹2,28,685 पर फिसली; अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 19 साल के शिखर पर
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर बुधवार, 19 अगस्त को सोने और चांदी दोनों कीमती धातुओं में तीखी गिरावट दर्ज हुई — अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 19 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँचने, कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और वैश्विक सुरक्षित-निवेश धारणा में बदलाव के दबाव में। अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,53,681 प्रति 10 ग्राम पर और सितंबर डिलीवरी वाली चांदी ₹2,28,685 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई।
MCX पर कीमतों की चाल
MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स का भाव पिछले बंद स्तर ₹1,54,262 प्रति 10 ग्राम से गिरकर दिन के निचले स्तर ₹1,53,404 तक पहुँचा — यानी ₹858 (0.55%) की गिरावट। खबर लिखे जाने तक यह ₹581 (0.38%) की गिरावट के साथ ₹1,53,681 पर स्थिर हुआ।
चांदी पर दबाव और अधिक रहा। सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले बंद ₹2,32,419 प्रति किलोग्राम से टूटकर दिन के निचले स्तर ₹2,27,931 तक आई — ₹4,488 (1.93%) की गिरावट। बाद में यह ₹3,734 (1.61%) नीचे ₹2,28,685 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर
वैश्विक हाजिर बाजार में सोना $4,350 प्रति औंस से नीचे कारोबार करता नजर आया, जबकि हाजिर चांदी लगभग $62.8 प्रति औंस के आसपास दबाव में रही। मजबूत डॉलर इंडेक्स ने भी सोने की चाल को प्रभावित किया, क्योंकि डॉलर के मजबूत होने से डॉलर-मूल्यांकित धातुएँ अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए महँगी हो जाती हैं।
बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की भूमिका
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग 19 वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच चुकी है, और अन्य सरकारी बॉन्ड यील्ड भी कई दशकों के रिकॉर्ड पर कारोबार कर रहे हैं। ऊँचे बॉन्ड यील्ड निवेशकों को निश्चित रिटर्न वाले विकल्पों की ओर खींचते हैं, जिससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों — जैसे सोना और चांदी — की माँग घटती है।
इसके साथ ही, अमेरिकी WTI क्रूड लगभग $85.5 प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड लगभग $91.5 प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें वैश्विक महँगाई की आशंका बढ़ाती हैं, जो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊँचा बनाए रखने की संभावना को और मजबूत करती है — और यह कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक संकेत है।
भू-राजनीतिक तनाव और आगे की दिशा
मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितता भी बाजार की दिशा पर असर डाल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा स्थिति और समुद्री जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में सोने और चांदी की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड चेयरमैन के संभावित संकेतों पर निर्भर करेगी। यदि बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल में तेजी बनी रही, तो कीमती धातुओं पर दबाव जारी रह सकता है — हालाँकि किसी नए वैश्विक संकट या ब्याज दर कटौती की उम्मीद मजबूत होने पर ये धातुएँ फिर से सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं।