26 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से भारत का रणनीतिक महत्व बढ़ेगा: मेजर जनरल ध्रुव कटोच

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से भारत का रणनीतिक महत्व बढ़ेगा: मेजर जनरल ध्रुव कटोच

सारांश

ग्रेट निकोबार सिर्फ एक द्वीप नहीं — यह हिंद-प्रशांत की चाबी है। मेजर जनरल ध्रुव कटोच के अनुसार, 90% वैश्विक शिपिंग जिस 6 डिग्री चैनल से गुजरती है, उस पर नजर रखने की क्षमता भारत को एक नई सामरिक ऊँचाई देती है।

मुख्य बातें

मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत की रणनीतिक जरूरत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में 570 द्वीप हैं; उत्तरी सिरा म्यांमार से 40 किमी और दक्षिणी सिरा इंडोनेशिया से 100 किमी दूर है।
हिंद महासागर से प्रशांत महासागर जाने वाली 90% शिपिंग 6 डिग्री चैनल और मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरती है।
ग्रेट निकोबार में मौजूदा नौसैनिक बेस को और सुदृढ़ किया जा रहा है।
कटोच ने SIPRI के रक्षा खर्च के आँकड़ों को 'तकरीबन सही' बताया; परमाणु नीति को प्रतिरोध-केंद्रित करार दिया।

मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया है। उनके अनुसार, इस परियोजना के जरिए भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और निर्णायक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में 9 जून को दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि सैन्य उपस्थिति बढ़ने से इस इलाके में भारत का रणनीतिक दबदबा और मजबूत होगा।

ग्रेट निकोबार की भौगोलिक अहमियत

कटोच ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक बनावट को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह द्वीपसमूह उत्तर से दक्षिण तक धनुष के आकार में फैला हुआ है, जिसमें कुल 570 छोटे-बड़े द्वीप हैं। उत्तरी द्वीप म्यांमार के कोको आईलैंड से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि दक्षिणी छोर इंडोनेशिया से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।

उन्होंने 6 डिग्री चैनल के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हिंद महासागर से प्रशांत महासागर की ओर जाने वाली लगभग 90 फीसदी शिपिंग इसी चैनल से होकर गुजरती है, जो आगे मलक्का स्ट्रेट से जुड़ता है। यह भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निगरानी और प्रभाव की अनूठी स्थिति में रखता है।

नौसैनिक बेस और सैन्य विस्तार

कटोच ने बताया कि ग्रेट निकोबार में भारत के पास पहले से एक नौसैनिक बेस मौजूद है, हालांकि वह अपेक्षाकृत छोटा है। इस बेस को और सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जैसे ही वहाँ सैन्य उपस्थिति बढ़ेगी, इस इलाके का रणनीतिक महत्व भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। यहाँ भारत भी एक प्लेयर बन गया है, क्योंकि हमारे पास यहाँ बहुत सारे द्वीप हैं।"

सिप्री रिपोर्ट और रक्षा खर्च पर विश्लेषण

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कटोच ने कहा कि रक्षा खर्च के आँकड़े "तकरीबन सही" हैं। उन्होंने भारत के रक्षा बजट को उचित ठहराते हुए कहा, "चीन और पाकिस्तान के साथ हमारी चुनौतीपूर्ण सीमाएँ हैं और समुद्री चुनौतियाँ भी बहुत हैं। जब भारत की जनसंख्या पूरी दुनिया में सबसे अधिक है, तो उस लिहाज से हमारा रक्षा खर्च उतना ज्यादा नहीं है, लेकिन हमारी जरूरत के मुताबिक यह सही है।"

परमाणु नीति: प्रतिरोध, प्रयोग नहीं

परमाणु हथियारों के बारे में कटोच ने स्पष्ट किया कि भारत की परमाणु क्षमता युद्ध लड़ने के लिए नहीं, बल्कि परमाणु युद्ध रोकने के लिए है। उन्होंने कहा, "हमारे डिलीवरी मीन्स तीन तरह के हैं — जमीन, वायु और जल। इसका अर्थ यह नहीं कि हम इनका इस्तेमाल करेंगे। इसका अर्थ यह है कि दूसरे देश हमारे खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पहले दो बार सोचेंगे।" परमाणु संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गोपनीय विषय है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं, हालाँकि सिप्री के आँकड़ों पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं है।

भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और हिंद-प्रशांत रणनीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने पर भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा में, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी में भी एक निर्णायक भूमिका निभाने में सक्षम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह परियोजना पर्यावरणीय विवादों और विस्थापन की चिंताओं से घिरी हुई है — जिनका इस बयान में कोई उल्लेख नहीं। 6 डिग्री चैनल पर नियंत्रण भारत को वास्तविक सामरिक लाभ देता है, परंतु इसकी कीमत पर जैव-विविधता और आदिवासी अधिकारों का सवाल मुख्यधारा की रक्षा-चर्चा में अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। परमाणु प्रतिरोध की जो व्याख्या कटोच ने दी, वह भारत की आधिकारिक 'नो फर्स्ट यूज' नीति के अनुरूप है — लेकिन सिप्री के आँकड़े यह भी संकेत देते हैं कि दक्षिण एशिया में परमाणु शस्त्रागार का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक दीर्घकालिक जोखिम बना हुआ है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के दक्षिणी छोर पर भारत की सामरिक और आधारभूत संरचना को मजबूत करने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। यह द्वीप इंडोनेशिया से मात्र 100 किलोमीटर दूर है और वैश्विक शिपिंग के लिए अहम 6 डिग्री चैनल के निकट स्थित है।
6 डिग्री चैनल का भारत के लिए क्या सामरिक महत्व है?
हिंद महासागर से प्रशांत महासागर जाने वाली लगभग 90 फीसदी शिपिंग 6 डिग्री चैनल से होकर गुजरती है, जो आगे मलक्का स्ट्रेट से जुड़ता है। ग्रेट निकोबार में सैन्य उपस्थिति बढ़ने से भारत इस रणनीतिक जलमार्ग पर प्रभावी निगरानी रख सकेगा।
भारत का परमाणु सिद्धांत क्या है और सिप्री रिपोर्ट इस पर क्या कहती है?
भारत की परमाणु नीति 'नो फर्स्ट यूज' पर आधारित है — अर्थात परमाणु हथियार युद्ध लड़ने के लिए नहीं, बल्कि परमाणु हमले को रोकने के लिए हैं। SIPRI की रिपोर्ट में भारत के परमाणु शस्त्रागार के आँकड़ों का उल्लेख है, जिसे कटोच ने 'तकरीबन सही' बताया, हालाँकि उन्होंने इसे अत्यंत गोपनीय विषय करार दिया।
भारत का रक्षा खर्च अन्य देशों की तुलना में कैसा है?
कटोच के अनुसार, चीन और पाकिस्तान के साथ चुनौतीपूर्ण सीमाओं और व्यापक समुद्री जिम्मेदारियों को देखते हुए भारत का रक्षा खर्च उसकी जरूरत के अनुरूप है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विशाल जनसंख्या के अनुपात में यह खर्च वास्तव में अधिक नहीं है।
अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह में भारत की मौजूदा सैन्य स्थिति क्या है?
ग्रेट निकोबार में भारत के पास पहले से एक नौसैनिक बेस मौजूद है, जिसे अब और सुदृढ़ किया जा रहा है। 570 द्वीपों वाले इस द्वीपसमूह की उत्तरी स्थिति म्यांमार के कोको आईलैंड से 40 किमी और दक्षिणी सिरा इंडोनेशिया से 100 किमी दूर है, जो इसे सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले