ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से भारत का रणनीतिक महत्व बढ़ेगा: मेजर जनरल ध्रुव कटोच
सारांश
मुख्य बातें
मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया है। उनके अनुसार, इस परियोजना के जरिए भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक सक्रिय और निर्णायक खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में 9 जून को दिए गए अपने बयान में उन्होंने कहा कि सैन्य उपस्थिति बढ़ने से इस इलाके में भारत का रणनीतिक दबदबा और मजबूत होगा।
ग्रेट निकोबार की भौगोलिक अहमियत
कटोच ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह की भौगोलिक बनावट को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि यह द्वीपसमूह उत्तर से दक्षिण तक धनुष के आकार में फैला हुआ है, जिसमें कुल 570 छोटे-बड़े द्वीप हैं। उत्तरी द्वीप म्यांमार के कोको आईलैंड से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि दक्षिणी छोर इंडोनेशिया से लगभग 100 किलोमीटर दूर है।
उन्होंने 6 डिग्री चैनल के सामरिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हिंद महासागर से प्रशांत महासागर की ओर जाने वाली लगभग 90 फीसदी शिपिंग इसी चैनल से होकर गुजरती है, जो आगे मलक्का स्ट्रेट से जुड़ता है। यह भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निगरानी और प्रभाव की अनूठी स्थिति में रखता है।
नौसैनिक बेस और सैन्य विस्तार
कटोच ने बताया कि ग्रेट निकोबार में भारत के पास पहले से एक नौसैनिक बेस मौजूद है, हालांकि वह अपेक्षाकृत छोटा है। इस बेस को और सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "जैसे ही वहाँ सैन्य उपस्थिति बढ़ेगी, इस इलाके का रणनीतिक महत्व भी उसी अनुपात में बढ़ेगा। यहाँ भारत भी एक प्लेयर बन गया है, क्योंकि हमारे पास यहाँ बहुत सारे द्वीप हैं।"
सिप्री रिपोर्ट और रक्षा खर्च पर विश्लेषण
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की हालिया रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कटोच ने कहा कि रक्षा खर्च के आँकड़े "तकरीबन सही" हैं। उन्होंने भारत के रक्षा बजट को उचित ठहराते हुए कहा, "चीन और पाकिस्तान के साथ हमारी चुनौतीपूर्ण सीमाएँ हैं और समुद्री चुनौतियाँ भी बहुत हैं। जब भारत की जनसंख्या पूरी दुनिया में सबसे अधिक है, तो उस लिहाज से हमारा रक्षा खर्च उतना ज्यादा नहीं है, लेकिन हमारी जरूरत के मुताबिक यह सही है।"
परमाणु नीति: प्रतिरोध, प्रयोग नहीं
परमाणु हथियारों के बारे में कटोच ने स्पष्ट किया कि भारत की परमाणु क्षमता युद्ध लड़ने के लिए नहीं, बल्कि परमाणु युद्ध रोकने के लिए है। उन्होंने कहा, "हमारे डिलीवरी मीन्स तीन तरह के हैं — जमीन, वायु और जल। इसका अर्थ यह नहीं कि हम इनका इस्तेमाल करेंगे। इसका अर्थ यह है कि दूसरे देश हमारे खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पहले दो बार सोचेंगे।" परमाणु संख्या को लेकर उन्होंने कहा कि यह अत्यंत गोपनीय विषय है और इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं, हालाँकि सिप्री के आँकड़ों पर उन्हें कोई आश्चर्य नहीं है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और हिंद-प्रशांत रणनीति का अहम स्तंभ बनता जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने पर भारत न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा में, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों की निगरानी में भी एक निर्णायक भूमिका निभाने में सक्षम होगा।