गुजरात: 3 साल में 29,500 आदिवासी महिलाओं को ₹162 करोड़ की डेयरी सहायता, 2026-27 में ₹65 करोड़ और
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने पिछले तीन वर्षों में 29,500 से अधिक आदिवासी महिलाओं को इंटीग्रेटेड डेयरी डेवलपमेंट स्कीम के तहत कुल ₹162.28 करोड़ की पशुपालन सहायता प्रदान की है। 27 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी सामने आई, जिसमें बताया गया कि यह योजना आदिवासी महिलाओं को डेयरी-आधारित आजीविका स्थापित करने में वित्तीय सहयोग देती है।
योजना का ताज़ा आवंटन और लक्ष्य
आदिवासी विकास विभाग के अनुसार, राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹65 करोड़ आवंटित किए हैं, जिससे 11,206 महिलाओं को लाभान्वित किया जाएगा। प्रत्येक लाभार्थी को ₹58,000 की सहायता दिए जाने का प्रावधान है। 2007-08 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत अब तक राज्य भर की आदिवासी महिलाओं को 1.96 लाख से अधिक दुधारू पशु वितरित किए जा चुके हैं।
वर्षवार लाभार्थियों का विवरण
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में 6,860 महिलाओं को ₹30.87 करोड़ की सहायता मिली। 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 13,616 लाभार्थी हो गई और सहायता राशि बढ़कर ₹78.97 करोड़ हो गई। 2025-26 में 9,042 महिलाओं को ₹52.44 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना की पहुँच तेज़ी से बढ़ रही है।
वित्तीय संरचना और पात्रता
एक पशु इकाई की कुल लागत ₹90,000 तय की गई है, जिसमें दुधारू पशु की खरीद, बीमा, परिवहन, पशु आहार, पशु चिकित्सा उपचार और व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं। इस राशि की संरचना इस प्रकार है: ₹29,000 का बैंक ऋण, ₹29,000 की केंद्र सरकार की सब्सिडी, ₹29,000 की राज्य सरकार की सहायता और ₹3,000 का लाभार्थी का स्वयं का योगदान। यह योजना गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में लागू है और गरीबी रेखा से नीचे उन आदिवासी परिवारों की महिलाओं को लक्षित करती है, जिनका स्कोर शून्य से 20 के बीच है।
द्वितीय पशु की सुविधा और प्रशिक्षण
योजना की एक विशेषता यह है कि दूसरे दुधारू पशु की पात्रता को ऋण चुकौती से जोड़ा गया है। जो लाभार्थी पहले पशु की आय से 60 प्रतिशत से अधिक ऋण समय पर चुका देती हैं, वे दूसरे पशु की हकदार बन जाती हैं। इसके साथ ही लाभार्थियों को वैज्ञानिक पशुपालन और पशु देखभाल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जिसमें स्थानीय डेयरी सहकारी समितियों को नियमित दूध आपूर्ति पर ज़ोर दिया जाता है।
पलायन रोकने और आजीविका सुदृढ़ करने का प्रयास
घर के निकट डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देकर यह योजना आदिवासी परिवारों को आय का स्थिर स्रोत उपलब्ध कराने और रोज़गार की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने का भी लक्ष्य रखती है। पात्र महिलाएँ अपने क्षेत्र के आदिवासी विकास कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। राज्य सरकार इस योजना को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लागू कर रही है, जबकि आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल विभाग की पहलों की देखरेख करते हैं। आने वाले वर्षों में इस योजना के विस्तार की संभावना बनी हुई है।