गुजरात 'शी टीम' ने डीजीपी मलिक और वरिष्ठ नागरिकों संग मनाया रक्षाबंधन, राखी बांध जताया सुरक्षा का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस की 'शी टीम' ने शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक की कलाई पर 'रक्षा सूत्र' बांधकर इस पर्व को एक अनूठे अंदाज़ में मनाया। राज्यभर में फैली शी टीमों ने वरिष्ठ नागरिकों, सेवारत और सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों के घरों पर जाकर सुरक्षा और सद्भाव का यह उत्सव मनाया।
मुख्य घटनाक्रम
अहमदाबाद के गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन से जुड़ी शी टीम की सदस्यों ने डीजीपी मलिक से शिष्टाचार मुलाकात की और उनकी कलाई पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु की कामना की। इस भावपूर्ण पहल में सुरक्षा के प्रतीक इस पवित्र धागे के ज़रिए पुलिस और समाज के बीच के रिश्ते को और मज़बूत किया गया।
इसी क्रम में अहमदाबाद शहर पुलिस की शी टीम सदस्यों ने पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत को भी राखी बांधी। यह आयोजन केवल पुलिस कार्यालयों तक सीमित नहीं रहा — टीम के सदस्य व्यक्तिगत रूप से लोगों के घरों तक पहुँचे।
राज्यभर में फैली पहल
पूरे गुजरात में शी टीमों ने वरिष्ठ नागरिकों और पुलिस समुदाय के सदस्यों — जिनमें सेवानिवृत्त अधिकारी भी शामिल थे — के आवासों पर जाकर राखियाँ और रक्षा सूत्र बांधे। इन मुलाकातों का उद्देश्य केवल त्योहार मनाना नहीं था, बल्कि पुलिस और आम नागरिकों के बीच आपसी विश्वास और संपर्क को प्रगाढ़ करना भी था।
गौरतलब है कि यह पहल 'शी टीम' के उस व्यापक दायित्व का हिस्सा है, जिसके तहत ये टीमें महिलाओं की सुरक्षा और समाज के कमज़ोर वर्गों की मदद के लिए स्थानीय स्तर पर सक्रिय रहती हैं।
डीजीपी की प्रतिक्रिया
पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने महिला पुलिसकर्मियों की इस सामुदायिक पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने महिलाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में शी टीम के योगदान की सराहना की और इस तरह के सामुदायिक जुड़ाव को पुलिसिंग का अभिन्न अंग बताया।
'शी टीम' की भूमिका और महत्व
गुजरात पुलिस की 'शी टीम' मुख्यतः महिला पुलिसकर्मियों से बनी विशेष इकाइयाँ हैं, जो स्थानीय स्तर पर महिला सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करती हैं और ज़रूरतमंदों को सहयोग देती हैं। रक्षाबंधन पर यह पहल इन टीमों के सामुदायिक पुलिसिंग दृष्टिकोण को रेखांकित करती है — जहाँ कानून-व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी बराबर महत्व रखती है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पुलिस और नागरिकों के बीच संवाद बढ़ाने की ज़रूरत पर बल दिया जा रहा है। आने वाले दिनों में शी टीम की ऐसी सामुदायिक गतिविधियाँ गुजरात के अन्य ज़िलों में भी विस्तारित होने की उम्मीद है।