18 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हनुमान बेनीवाल ने चूरू कार्यक्रम बीच में छोड़ा, युवाओं के हंगामे पर माइक फेंककर निकले

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हनुमान बेनीवाल ने चूरू कार्यक्रम बीच में छोड़ा, युवाओं के हंगामे पर माइक फेंककर निकले

सारांश

नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल का चूरू के छपर में आरएलपी कार्यालय उद्घाटन से बीच में निकलना चर्चा में है। युवाओं के लगातार हंगामे से नाराज़ बेनीवाल ने माइक मंच पर फेंका और बिना भाषण पूरा किए चले गए — वीडियो राजस्थान में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

हनुमान बेनीवाल ने रविवार रात चूरू के छपर कस्बे में आरएलपी कार्यालय उद्घाटन कार्यक्रम बीच में छोड़ दिया।
भीड़ में युवाओं के एक समूह ने लगातार शोर-शराबा कर 40-45 मिनट के भाषण में बाधा डाली।
बेनीवाल ने मंच पर माइक्रोफोन फेंका और कहा — 'मैं यहाँ दोबारा नहीं आऊंगा।' कार्यक्रम में लगभग 4,000-5,000 लोग उपस्थित थे; आयोजन रात 11:30 बजे तक खिंचा।
बेनीवाल ने आयोजकों पर भी सवाल उठाए — देर रात स्कूली बच्चों की उपस्थिति और अनुशासन की कमी पर।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर राजस्थान में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रमुख और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे राजस्थान के चूरू जिले के छपर कस्बे में आयोजित एक जनसभा को बीच में ही छोड़कर जाते दिख रहे हैं। यह घटना रविवार रात आरएलपी कार्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान हुई, जब भीड़ में मौजूद युवाओं के एक समूह ने बार-बार शोर-शराबा कर उनके भाषण में बाधा डाली।

घटनाक्रम: कैसे बिगड़ी सभा

छपर के रतनगढ़ रोड पर आरएलपी कार्यालय का उद्घाटन रविवार शाम 7:15 बजे निर्धारित था, लेकिन बेनीवाल रात 11:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे। स्थानीय आयोजकों के अनुसार, सभा में लगभग 4,000 से 5,000 लोग उपस्थित थे। बेनीवाल ने करीब 40-45 मिनट तक भाषण दिया, लेकिन इस दौरान युवाओं के एक हिस्से ने लगातार नारेबाज़ी और हंगामा जारी रखा।

शुरुआत में बेनीवाल ने संयम बनाए रखते हुए भीड़ से अपील की। उन्होंने कहा, 'क्या तुमने कभी कोई नेता देखा है? तुम ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हो?' उन्होंने युवाओं से कार्यक्रम को शांतिपूर्वक चलने देने की गुज़ारिश भी की।

बेनीवाल की नाराज़गी और सख्त चेतावनी

बार-बार अनुरोध के बावजूद व्यवधान थमा नहीं, तो बेनीवाल की नाराज़गी खुलकर सामने आई। उन्होंने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मैं यहाँ दोबारा नहीं आऊंगा। मैं बिना भाषण दिए ही जा रहा हूँ। ऐसा तो है नहीं कि आप कल सुबह वोट डालने जा रहे हैं। आप बस लोगों का समय बर्बाद कर रहे हैं।'

उन्होंने हंगामे की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा, 'क्या आपको विपक्ष के किसी व्यक्ति ने भेजा है? ये लोग कौन हैं? आयोजकों ने इन्हें क्यों नहीं रोका?' इसके कुछ ही देर बाद उन्होंने माइक्रोफोन मंच पर फेंका और कार्यक्रम से बाहर निकल गए, जिससे वहाँ मौजूद समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता हैरान रह गए।

आयोजकों पर भी उठाए सवाल

जाने से पहले बेनीवाल ने कार्यक्रम के आयोजकों की भी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि देर रात तक स्कूली बच्चों को कार्यक्रम में क्यों बिठाया गया था। उनका कहना था कि किसी नेता को संबोधन के लिए आमंत्रित करने से पहले आयोजकों की ज़िम्मेदारी है कि वे अनुशासन सुनिश्चित करें।

बेनीवाल ने चूरू जिले की राजनीतिक स्थिति का भी ज़िक्र किया और दावा किया कि इस जिले की राजनीति के चलते उन्हें राजस्थान भर में कई राजनीतिक टकरावों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुश्किल दौर में वे चूरू के लोगों के साथ खड़े रहे, जबकि कई अन्य नेता बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए।

राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना वीडियो

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला राजस्थान में राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ दर्शाती हैं कि जन-सभाओं में भीड़ प्रबंधन और अनुशासन सुनिश्चित करना राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब आरएलपी राजस्थान में अपनी संगठनात्मक उपस्थिति को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि बेनीवाल अपने बेबाक और आक्रामक राजनीतिक तेवरों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह का हंगामा और उनका इस तरह बाहर निकलना असामान्य माना जा रहा है। आने वाले दिनों में आरएलपी इस प्रकरण पर अपनी आंतरिक प्रतिक्रिया कैसे देती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी संगठनात्मक मज़बूती पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। बेनीवाल ने विपक्षी साज़िश का संदेह ज़रूर जताया, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई — और बिना प्रमाण के ऐसे आरोप उनकी विश्वसनीयता को भी कमज़ोर कर सकते हैं। मुख्यधारा की कवरेज वायरल वीडियो पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि आरएलपी चूरू जैसे ज़िले में अपनी पैठ बनाने के लिए जो ज़मीन तैयार कर रही थी, वह इस एक घटना से कितनी प्रभावित होती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान बेनीवाल चूरू कार्यक्रम से क्यों निकले?
भीड़ में मौजूद युवाओं के एक समूह ने बार-बार शोर-शराबा कर उनके भाषण में बाधा डाली, जिससे नाराज़ होकर बेनीवाल ने माइक मंच पर फेंका और कार्यक्रम अधूरा छोड़कर चले गए। उन्होंने कई बार शांत रहने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमा।
यह घटना कहाँ और कब हुई?
यह घटना राजस्थान के चूरू जिले के छपर कस्बे में रविवार रात आरएलपी कार्यालय के उद्घाटन समारोह के दौरान हुई। बेनीवाल रात 11:30 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे और करीब 40-45 मिनट तक भाषण दिया।
बेनीवाल ने कार्यक्रम में क्या कहा?
बेनीवाल ने हंगामा करने वालों से पूछा कि क्या उन्हें विपक्ष ने भेजा है। उन्होंने आयोजकों की आलोचना करते हुए कहा कि देर रात स्कूली बच्चों को कार्यक्रम में बिठाना उचित नहीं था और अनुशासन सुनिश्चित करना आयोजकों की ज़िम्मेदारी थी।
इस घटना का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर राजस्थान में राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। आलोचकों का कहना है कि अपनी ही पार्टी के कार्यक्रम में इस तरह का हंगामा आरएलपी की संगठनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है।
हनुमान बेनीवाल कौन हैं?
हनुमान बेनीवाल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के संस्थापक और प्रमुख हैं तथा नागौर लोकसभा सीट से सांसद हैं। वे राजस्थान में जाट समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते हैं और अपने बेबाक राजनीतिक तेवरों के लिए जाने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 1 साल पहले