22 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हनुमानगढ़ी नमाज विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया

सारांश

भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर सफाई दी — उनका कहना है कि सीढ़ियों पर नमाज न होने की बात को 52 बीघा परिसर के संदर्भ से काटकर पेश किया गया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी के बयान से टकराव की बात को सिरे से नकारा।

मुख्य बातें

बृजभूषण शरण सिंह ने 21 जुलाई को गोंडा में हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर अपना पक्ष स्पष्ट किया।
उनका कहना है कि 17 जुलाई के बयान में हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज न होने की बात कही थी, लेकिन 52 बीघा परिसर का संदर्भ न जोड़ने से विवाद बढ़ा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या संत समाज के बयान का विरोध करने की नहीं थी।
18वीं शताब्दी में एक मुस्लिम शासक द्वारा 52 बीघा भूमि पट्टे के ऐतिहासिक संदर्भ को भी उन्होंने स्पष्ट किया; शुजाउद्दौला निर्माणकर्ता वाली धारणा को अधूरा बताया।
भाजपा नेता ने कहा कि यदि उनके बयान से किसी की धार्मिक भावना आहत हुई हो तो वे खेद व्यक्त करते हैं।

भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने 21 जुलाई को गोंडा में हनुमानगढ़ी नमाज विवाद पर अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनके 17 जुलाई के वक्तव्य को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत किया गया, जिससे अनावश्यक विवाद खड़ा हो गया। उनका आशय केवल यह था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी — न कि इस घटना से इनकार करना कि परिसर या 52 बीघा क्षेत्र के भीतर कोई घटना हुई।

बयान में क्या हुई चूक

बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, जब मीडिया ने उनसे पूछा कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई, तो उन्होंने तत्काल 'नहीं' कहा। उनका कहना है कि उसी क्षण यह स्पष्ट करना आवश्यक था कि घटना सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि परिसर या 52 बीघा क्षेत्र के भीतर की है — यही एक वाक्य न जोड़ पाने से पूरा मामला विवादास्पद हो गया।

उन्होंने कहा कि प्रश्न सुनते ही वे भावनात्मक रूप से आहत हो गए, क्योंकि वे हनुमान जी के अनन्य भक्त हैं और अयोध्या से उनका गहरा जुड़ाव है। इस भावनात्मक अवस्था में दिए गए संक्षिप्त उत्तर को मीडिया ने एकांगी रूप में प्रसारित किया।

मुख्यमंत्री योगी के बयान से टकराव नहीं

बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा किसी भी स्तर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करने की नहीं थी। उनके शब्दों में — 'मुख्यमंत्री का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का पक्ष भी सही है और मेरा बयान भी अपने संदर्भ में सही था।' उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया मानो वे मुख्यमंत्री की बात काट रहे हों, जबकि ऐसी कोई भावना उनके मन में नहीं थी।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रामजन्मभूमि पहले से ही विभिन्न कारणों से चर्चा में रहती है और यदि हनुमानगढ़ी को लेकर भी इसी प्रकार के विवाद खड़े किए जाते रहे तो इससे अयोध्या की गरिमा प्रभावित होगी।

हनुमानगढ़ी के ऐतिहासिक संदर्भ पर स्पष्टीकरण

हनुमानगढ़ी के निर्माण में एक मुस्लिम शासक की भूमिका के उल्लेख पर भी बृजभूषण शरण सिंह ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान का केवल आधा हिस्सा सामने लाया गया। उनके अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का उल्लेख किया है, इसलिए यह कहना कि इसका निर्माण किसी व्यक्ति विशेष ने कराया, पूर्णतः सही नहीं होगा।

उन्होंने दावा किया कि 18वीं शताब्दी में एक मुस्लिम शासक याचक के रूप में हनुमानगढ़ी पहुंचा था और वहाँ से लाभ मिलने के बाद उसने नागा साधुओं और मुस्लिम पक्ष के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान 52 बीघा भूमि का पट्टा दिया और निर्माण कार्य में सहयोग किया। बाद में यह जानकारी इंटरनेट पर इस रूप में प्रसारित हो गई कि हनुमानगढ़ी का निर्माण शुजाउद्दौला ने कराया था, जबकि इसके पीछे का पूरा ऐतिहासिक संदर्भ भिन्न है।

नागा साधुओं की रक्षक भूमिका

बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि इतिहास में हनुमानगढ़ी पर कई बार आक्रमण हुए, लेकिन वहाँ के नागा साधुओं ने हमेशा इसकी रक्षा की और किसी भी आक्रांता को सफल नहीं होने दिया। उनके अनुसार, रामजन्मभूमि और हनुमानगढ़ी दोनों ही सनातन आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं और उनकी रक्षा के लिए संत समाज ने दीर्घकालिक संघर्ष किया है।

माफी और आगे की राह

भाजपा नेता ने कहा कि यदि 17 जुलाई को दिए गए उनके वक्तव्य से किसी की धार्मिक भावना आहत हुई हो तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी मंशा न किसी को ठेस पहुंचाने की थी और न ही मुख्यमंत्री या संत समाज के विचारों का विरोध करने की। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब अयोध्या पहले से ही राष्ट्रीय और धार्मिक चर्चाओं के केंद्र में है, और इस प्रकार के बयानों की संवेदनशीलता स्वतः ही बढ़ जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि एक अनुभवी सांसद से ऐसी 'चूक' कैसे हुई जब अयोध्या जैसे संवेदनशील विषय पर हर शब्द तौलकर बोलना अपेक्षित है। विवाद का केंद्र केवल शब्दों की व्याख्या नहीं है — यह उस व्यापक राजनीतिक दबाव को भी उजागर करता है जो भाजपा के भीतर अयोध्या-केंद्रित बयानों पर बनता है। मुख्यमंत्री के बयान से किसी भी प्रकार के मतभेद की संभावना को तत्काल नकारने की आवश्यकता यह दर्शाती है कि पार्टी में एकल-स्वर की अपेक्षा कितनी प्रबल है। साथ ही, हनुमानगढ़ी के ऐतिहासिक संदर्भ पर उनका विस्तृत स्पष्टीकरण इस बात का संकेत है कि धार्मिक स्थलों के इतिहास को लेकर सार्वजनिक विमर्श अभी भी कितना विखंडित और विवादास्पद है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमानगढ़ी नमाज विवाद क्या है?
यह विवाद उस घटना से जुड़ा है जिसमें अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी के परिसर या उसके 52 बीघा क्षेत्र के भीतर नमाज पढ़े जाने की बात सामने आई। भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह के एक बयान को लेकर यह विवाद और गहरा गया, जिसे उन्होंने बाद में संदर्भहीन बताया।
बृजभूषण शरण सिंह ने 17 जुलाई को क्या कहा था जिससे विवाद हुआ?
मीडिया के सवाल पर उन्होंने कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई। उनका कहना है कि उस समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि घटना 52 बीघा परिसर के भीतर की है, जिससे उनके बयान को गलत अर्थ में लिया गया।
क्या बृजभूषण शरण सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विरोध किया था?
नहीं। बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या संत समाज के बयान का विरोध करने की कभी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान, संतों का पक्ष और उनका अपना बयान — तीनों अपने-अपने संदर्भ में सही हैं।
हनुमानगढ़ी और 52 बीघा भूमि का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
बृजभूषण शरण सिंह के अनुसार, 18वीं शताब्दी में एक मुस्लिम शासक याचक के रूप में हनुमानगढ़ी पहुंचा और वहाँ से लाभ मिलने के बाद उसने नागा साधुओं को 52 बीघा भूमि का पट्टा दिया और निर्माण में सहयोग किया। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर प्रचलित यह धारणा कि हनुमानगढ़ी का निर्माण शुजाउद्दौला ने कराया, पूरे ऐतिहासिक संदर्भ को सामने नहीं रखती।
बृजभूषण शरण सिंह ने इस विवाद पर क्या खेद व्यक्त किया?
उन्होंने कहा कि यदि 17 जुलाई के उनके वक्तव्य से किसी की धार्मिक भावना आहत हुई हो तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उनका कहना था कि उनकी मंशा न किसी को ठेस पहुंचाने की थी और न ही मुख्यमंत्री या संत समाज का विरोध करने की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 4 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 7 महीने पहले