हनुमानगढ़ी विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — नमाज सीढ़ियों पर नहीं, 52 बीघा परिसर में पढ़ी गई थी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 22 जुलाई 2026 को अयोध्या में अपने पूर्व बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी, बल्कि यह घटना मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर हुई थी। उनका यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब उनके पिछले बयानों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ी हुई है।
क्या था विवाद
विवाद की जड़ वर्ष 2003 की एक कथित घटना है, जब हनुमानगढ़ी के निकट नमाज पढ़े जाने के दावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा हंगामा खड़ा हुआ था। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में एक जनसभा में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा था, "क्या कोई जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करा सकता है? क्या समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की कोई सरकार ऐसा कर सकती है? फिर उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने देने जैसा पाप क्यों किया?"
बृजभूषण का स्पष्टीकरण
बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को कहा कि मीडिया ने उनसे सीधा सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी, और उन्होंने उस सवाल का जवाब 'नहीं' में दिया था। उन्होंने माना कि उनका जवाब अधूरा था।
उन्होंने कहा, "मीडिया का सवाल बहुत सीधा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। मैंने इसका साफ इनकार किया। हाँ, मुझे यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नहीं, लेकिन मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर नमाज पढ़ी गई थी, यह अलग बात है। जब मुझसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के बारे में पूछा गया तो मैं इस सवाल से ही हैरान था और मैंने साफ तौर पर इसे नकार दिया।"
हनुमानगढ़ी के निर्माण पर भी दी सफाई
BJP नेता ने हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर दिए अपने उस पुराने बयान पर भी सफाई दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था।' उन्होंने इसे अधूरा बयान बताते हुए धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझाने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, "अगर 'अयोध्या माहात्म्य' को देखें तो भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि अयोध्या के मुख्य द्वार के उत्तर दिशा में भगवान हनुमान और दक्षिण दिशा में सुग्रीव विराजमान हैं। जब स्वयं भगवान शिव हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का वर्णन करते हैं, तो यह किसी व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती। यह एक गढ़ी यानी किलेनुमा धार्मिक स्थल है।"
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद उसी महीने सामने आया है जब राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर पहुँचे थे। अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हनुमानगढ़ी के इतिहास और पवित्रता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने BJP के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
आगे क्या होगा
बृजभूषण शरण सिंह के नए स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनज़र अयोध्या से जुड़े धार्मिक-राजनीतिक मुद्दे केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2003 की कथित घटना का बार-बार उठाया जाना उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।