22 जुलाई 2026
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हनुमानगढ़ी विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — नमाज सीढ़ियों पर नहीं, 52 बीघा परिसर में पढ़ी गई थी

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हनुमानगढ़ी विवाद: बृजभूषण शरण सिंह बोले — नमाज सीढ़ियों पर नहीं, 52 बीघा परिसर में पढ़ी गई थी

सारांश

बृजभूषण शरण सिंह का स्पष्टीकरण सीधा था — नमाज सीढ़ियों पर नहीं, 52 बीघा परिसर में पढ़ी गई। लेकिन यह सफाई खुद एक नया विवाद बन गई है। 2003 की एक घटना, योगी के तीखे आरोप और BJP नेता की दो-चरणीय सफाई — अयोध्या की राजनीति एक बार फिर धर्म और इतिहास के चौराहे पर खड़ी है।

मुख्य बातें

बृजभूषण शरण सिंह ने 22 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि नमाज हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि 52 बीघा परिसर के भीतर पढ़ी गई थी।
उन्होंने माना कि उनका पहला जवाब अधूरा था — मीडिया के 'सीढ़ियों पर नमाज' वाले सवाल का सीधा इनकार करने में पूरा संदर्भ छूट गया।
हनुमानगढ़ी के 'मुस्लिम निर्माण' वाले बयान पर भी सफाई दी — इसे अयोध्या माहात्म्य के धार्मिक संदर्भ से जोड़ा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर जनसभा में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हनुमानगढ़ी सीढ़ियों पर नमाज की अनुमति देने का आरोप लगाया था।
विवाद की जड़ वर्ष 2003 की कथित घटना से जुड़ी है, जो अब एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में उठ खड़ी हुई है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बृजभूषण शरण सिंह ने 22 जुलाई 2026 को अयोध्या में अपने पूर्व बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हनुमानगढ़ी मंदिर की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी, बल्कि यह घटना मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर हुई थी। उनका यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब उनके पिछले बयानों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में तीखी बहस छिड़ी हुई है।

क्या था विवाद

विवाद की जड़ वर्ष 2003 की एक कथित घटना है, जब हनुमानगढ़ी के निकट नमाज पढ़े जाने के दावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा हंगामा खड़ा हुआ था। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में एक जनसभा में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा था, "क्या कोई जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा का पाठ करा सकता है? क्या समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की कोई सरकार ऐसा कर सकती है? फिर उन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने देने जैसा पाप क्यों किया?"

बृजभूषण का स्पष्टीकरण

बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को कहा कि मीडिया ने उनसे सीधा सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी, और उन्होंने उस सवाल का जवाब 'नहीं' में दिया था। उन्होंने माना कि उनका जवाब अधूरा था।

उन्होंने कहा, "मीडिया का सवाल बहुत सीधा था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। मैंने इसका साफ इनकार किया। हाँ, मुझे यह भी स्पष्ट करना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नहीं, लेकिन मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर नमाज पढ़ी गई थी, यह अलग बात है। जब मुझसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने के बारे में पूछा गया तो मैं इस सवाल से ही हैरान था और मैंने साफ तौर पर इसे नकार दिया।"

हनुमानगढ़ी के निर्माण पर भी दी सफाई

BJP नेता ने हनुमानगढ़ी के निर्माण को लेकर दिए अपने उस पुराने बयान पर भी सफाई दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'हनुमानगढ़ी का निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था।' उन्होंने इसे अधूरा बयान बताते हुए धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझाने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, "अगर 'अयोध्या माहात्म्य' को देखें तो भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि अयोध्या के मुख्य द्वार के उत्तर दिशा में भगवान हनुमान और दक्षिण दिशा में सुग्रीव विराजमान हैं। जब स्वयं भगवान शिव हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का वर्णन करते हैं, तो यह किसी व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती। यह एक गढ़ी यानी किलेनुमा धार्मिक स्थल है।"

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह विवाद उसी महीने सामने आया है जब राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर पहुँचे थे। अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हनुमानगढ़ी के इतिहास और पवित्रता को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने BJP के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

आगे क्या होगा

बृजभूषण शरण सिंह के नए स्पष्टीकरण के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनज़र अयोध्या से जुड़े धार्मिक-राजनीतिक मुद्दे केंद्र में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2003 की कथित घटना का बार-बार उठाया जाना उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो कहीं ज़्यादा संवेदनशील ज़मीन है। यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या पहले से ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद से घिरी है, और BJP के भीतर ही बयानों की असंगति उजागर हो रही है। योगी आदित्यनाथ ने 'सीढ़ियों पर नमाज' को राजनीतिक हथियार बनाया, लेकिन उनकी ही पार्टी के नेता ने परोक्ष रूप से उस दावे को संशोधित कर दिया। मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक विरोधाभास को नज़रअंदाज़ कर रही है, जबकि असली सवाल यह है कि 2003 की घटना का सत्यापन आज तक क्यों नहीं हुआ।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बृजभूषण शरण सिंह ने हनुमानगढ़ी विवाद पर क्या सफाई दी?
उन्होंने कहा कि नमाज हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के 52 बीघा क्षेत्र के भीतर या किसी संत के स्थान पर पढ़ी गई थी। उनका कहना है कि मीडिया ने 'सीढ़ियों पर नमाज' का सीधा सवाल पूछा था, जिसका उन्होंने 'नहीं' में जवाब दिया, लेकिन पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं कर पाए।
हनुमानगढ़ी नमाज विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?
इस विवाद की जड़ वर्ष 2003 की एक कथित घटना है, जब हनुमानगढ़ी के निकट नमाज पढ़े जाने के दावे को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा हंगामा खड़ा हुआ था। हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद यह मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में क्या कहा था?
योगी आदित्यनाथ ने बीकापुर में एक जनसभा में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उनकी पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। उन्होंने जामा मस्जिद के अंदर हनुमान चालीसा पाठ का उदाहरण देते हुए इसे 'पाप' करार दिया था।
बृजभूषण शरण सिंह ने हनुमानगढ़ी के 'मुस्लिम निर्माण' वाले बयान पर क्या कहा?
उन्होंने इसे अधूरा बयान बताया और 'अयोध्या माहात्म्य' का हवाला देते हुए कहा कि भगवान शिव ने स्वयं हनुमानगढ़ी के अस्तित्व का वर्णन किया है, इसलिए यह किसी व्यक्ति द्वारा बनाई गई इमारत नहीं हो सकती। उनके अनुसार यह एक 'गढ़ी' यानी किलेनुमा धार्मिक स्थल है।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ रहा है?
हनुमानगढ़ी से जुड़े बयानों ने BJP, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। यह विवाद राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद अयोध्या को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आया है, और आगामी राजनीतिक गतिविधियों के मद्देनज़र इसके और गहराने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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