हरभजन सिंह ने किशोरों पर सोशल मीडिया की अश्लीलता के दुष्प्रभाव पर उठाया सवाल
सारांश
Key Takeaways
- सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री का प्रसार तेजी से हो रहा है।
- किशोरों पर इसके नकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
- भारत में भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
- सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान और रचनात्मकता के लिए होना चाहिए।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी के सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया पर बढ़ती अश्लीलता और इसके किशोरों पर पड़ने वाले प्रभाव के मुद्दे को उठाया है। उन्होंने गुरुवार को राज्यसभा में इस विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
हरभजन सिंह ने कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर विषय है और सोशल मीडिया पर फैल रही अश्लील और अशोभनीय सामग्री पर तुरंत नियंत्रण की आवश्यकता है। उनके अनुसार, यह केवल तकनीकी या कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे समाज, नैतिकता और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा हुआ गंभीर प्रश्न है।
उन्होंने कहा कि आजकल सोशल मीडिया ज्ञान, संवाद और नवाचार का एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है, परंतु इसके साथ ही अश्लील सामग्री का प्रसार भी तेजी से हो रहा है, जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे बच्चों और किशोरों पर पड़ रहा है।
हरभजन ने कई शोधों का हवाला देते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चे इस तरह की सामग्री तक आसानी से पहुँच रहे हैं, जो उनके मानसिक विकास पर विपरीत असर डाल रही है। यह न केवल व्यक्तिगत नैतिकता का सवाल है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का भी गंभीर मुद्दा है।
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि 13 या 14 वर्ष का बच्चा, जो सही और गलत का अंतर सीख रहा है, सोशल मीडिया पर अश्लील चित्र और वीडियो देखता है, तो उसके मन में महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना कैसे विकसित होगी। यह प्रवृत्ति समाज में अपराध और उत्पीड़न जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है।
हरभजन ने बताया कि कई देशों ने इस खतरे को समझते हुए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि फ्रांस ने कानून बनाकर कई वेबसाइटों पर सख्त आयु सत्यापन अनिवार्य किया है, और यूनाइटेड किंगडम ने अपने ऑनलाइन सुरक्षा कानून के तहत कई वयस्क वेबसाइटों के लिए पहचान और आयु की पुष्टि अनिवार्य की है। ऑस्ट्रेलिया ने भी बच्चों की सुरक्षा के लिए ऑनलाइन अश्लील सामग्री की निगरानी के लिए कड़े नियम बनाए हैं।
हरभजन ने कहा कि ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि विकसित देश इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं। भारत में, जहाँ हमारी सभ्यता नारी सम्मान, संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित है, इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। हमें तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लील सामग्री की निगरानी, आयु सत्यापन की व्यवस्था, और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए। उनका मानना है कि सोशल मीडिया का उपयोग ज्ञान और रचनात्मकता के लिए होना चाहिए, न कि समाज को दूषित करने वाली सामग्री के लिए।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक मूलभूत आधार है, लेकिन यह आवश्यक है कि कोई भी गतिविधि बच्चों के हितों को नुकसान न पहुँचाए, इसलिए उस पर संतुलित और जिम्मेदार नियंत्रण होना चाहिए।