हरीश रावत का भावुक वीडियो: 'मां की सौगंध, नौकरी के बदले कभी एक पैसा नहीं लिया'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 18 सितंबर 2026 को फेसबुक पर एक भावुक वीडियो पोस्ट कर नौकरी के बदले पैसे लेने के आरोपों को सिरे से खारिज किया। वीडियो में वे अपनी माँ की तस्वीर हाथ में थामे, माँ की सौगंध खाते हुए खुद को निर्दोष बता रहे हैं। देहरादून से साझा किए गए इस संदेश ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
क्या हैं आरोप और रावत का जवाब
रावत पर कथित तौर पर नौकरी दिलाने, राजनीतिक पद दिलाने और अन्य सिफारिशों के बदले धन लेने के आरोप लगाए गए हैं। वीडियो में उन्होंने कहा, 'मां, मैं आपकी सौगंध खाता हूं, आपके दूध की सौगंध खाता हूं। मैंने कभी किसी को नौकरी देने के बदले एक पैसा लेना तो छोड़िए, मैंने उससे कभी चाय और पानी तक नहीं पिया।'
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक पद और अन्य कामों के लिए की गई हज़ारों सिफारिशों में से किसी के लिए भी उन्होंने कोई सौदा नहीं किया। उनके शब्दों में — 'जिसको दिया होगा, मैंने दिया होगा, मां।'
तीन माताओं का जिक्र और भावुक अपील
वीडियो में रावत ने भावुक होते हुए तीन माताओं का उल्लेख किया — जगत जननी, देवी भवानी (माँ दुर्गा) और उत्तराखंड की धरती माँ। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव में उनके विरुद्ध षड्यंत्र रचकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
रावत ने माँ जगदंबा से प्रार्थना का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक वे इस 'कलंक' को नहीं धो देते, तब तक वे संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा, 'शरीर आज्ञा दे न दे, स्वास्थ्य आज्ञा दे न दे, मगर मुझे अपनी सफाई के लिए लोगों के बीच जाना ही पड़ता है।'
सहयोगी चंदन की संपत्ति सीज़ होने पर चिंता
रावत ने वीडियो में अपने सहयोगी चंदन की जीवन भर की कमाई सीज़ किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'जिसने छाया की तरह मेरे साथ इतने साल सेवा की, आज उसकी ज़िंदगी भर की कमाई को सीज़ कर दिया गया है। उसके बच्चों की आजीविका कहाँ से चलेगी।'
उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इतने संसाधन भी नहीं हैं कि वे अपने घर का खर्च उठा सकें, जो इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है।
पुराने आरोपों का संदर्भ
रावत के अनुसार, 2017 और 2022 में भी उनके खिलाफ इसी तरह के झूठे आरोप गढ़े गए थे, जिनका कोई साक्ष्य नहीं था। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ अखबारों के जरिए मुहिम चलाकर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने सार्वजनिक मंच से भावनात्मक अपील करते हुए अपनी सफाई दी हो। आलोचकों का कहना है कि ऐसी अपीलें तब आती हैं जब जाँच का दबाव बढ़ता है।
आगे क्या होगा
रावत ने संकेत दिया है कि वे जनता के बीच जाकर अपनी बात रखते रहेंगे। यह देखना होगा कि उत्तराखंड की राजनीति में इस वीडियो का क्या असर पड़ता है और क्या इस मामले में कोई औपचारिक जाँच आगे बढ़ती है।