हैशपे क्रिप्टो फ्रॉड: ईडी ने ₹40 करोड़ के घोटाले में इमरान बाशा और हितेश कुमार को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 3 सितंबर 2026 को ₹40 करोड़ के हैशपे क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी मामले में दो मुख्य आरोपियों — इमरान बाशा और हितेश कुमार — को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। पीएमएलए की विशेष अदालत ने दोनों को पाँच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जाँच पुडुचेरी साइबर क्राइम पुलिस द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। ईडी के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने 1 सितंबर 2026 को चेन्नई, कोयंबटूर और कोलकाता में 11 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया, जिसमें अपराध से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।
धोखाधड़ी का तरीका
जाँच में सामने आया कि हितेश कुमार, इमरान बाशा और सैयद उस्मान उर्फ बाबू ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 'हैशपे' नाम से एक फर्जी निवेश योजना संचालित की। इसे क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के रूप में प्रस्तुत किया गया और आम निवेशकों को 'टीसीएक्स' नामक क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग के जरिए आकर्षक रिटर्न का झूठा वादा कर फँसाया गया।
ईडी के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों को लुभाने के लिए भव्य प्रमोशनल कार्यक्रम आयोजित किए, बॉलीवुड हस्तियों को शामिल किया और सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर प्रचार अभियान चलाया। हैशपे टोकन का मूल्य कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया ताकि और निवेश आकर्षित हो सके। जैसे ही निवेशकों ने पैसे निकालने की कोशिश की, उन पर रोक लगा दी गई।
मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि आरोपियों ने इस योजना के जरिए लगभग ₹40 करोड़ जुटाए। यह रकम शेल कंपनियों, सहयोगियों और आरोपियों के परिवार के सदस्यों से जुड़े बैंक खातों में डायवर्ट की गई। निवेशकों की रकम का एक बड़ा हिस्सा इमरान बाशा और हितेश कुमार के निजी खातों के साथ-साथ उनसे जुड़ी व्यावसायिक संस्थाओं में भेजा गया। अपराध से अर्जित आय का उपयोग आलीशान जीवनशैली और अचल संपत्तियाँ खरीदने में किया गया।
गिरफ्तारी और अदालती कार्रवाई
तलाशी अभियान के बाद 3 सितंबर 2026 को इमरान बाशा और हितेश कुमार को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। विशेष पीएमएलए अदालत ने दोनों आरोपियों को पाँच दिन की ईडी हिरासत में भेजा है। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है और अन्य आरोपियों पर भी शिकंजा कसा जा सकता है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े निवेश घोटाले पूरे देश में तेज़ी से बढ़ रहे हैं। ईडी की यह कार्रवाई डिजिटल संपत्ति धोखाधड़ी के विरुद्ध बढ़ती सख्ती का संकेत है। जाँच एजेंसी तीसरे मुख्य आरोपी सैयद उस्मान उर्फ बाबू और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।