4 सितंबर 2026
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मेकेदातु प्रोजेक्ट में तेजी: कर्नाटक के जल मंत्री ने अधिकारियों को 5,096 हेक्टेयर वन भूमि के बदले जमीन चिह्नित करने का आदेश दिया

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मेकेदातु प्रोजेक्ट में तेजी: कर्नाटक के जल मंत्री ने अधिकारियों को 5,096 हेक्टेयर वन भूमि के बदले जमीन चिह्नित करने का आदेश दिया

सारांश

कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु परियोजना को रफ्तार देने के लिए कमर कस ली है — जल मंत्री ने 5,096 हेक्टेयर डूबने वाली वन भूमि के बदले वैकल्पिक जमीन चिह्नित करने का आदेश दिया। 8 सितंबर को दिल्ली में होने वाली केंद्रीय बैठक तय करेगी कि 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' मुआवजे के रूप में मान्य होगी या नहीं।

मुख्य बातें

जल संसाधन मंत्री एन.
चेलुवरयास्वामी ने 4 सितंबर को विकास सौधा, बेंगलुरु में सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों के साथ समीक्षा बैठक की।
परियोजना से 5,096 हेक्टेयर वन भूमि जलमग्न होगी; इसके बदले प्रतिपूरक भूमि उपलब्ध कराना अनिवार्य।
राजस्व विभाग ने 20,000 हेक्टेयर भूमि की प्रारंभिक पहचान की; 5,000 हेक्टेयर प्राथमिकता पर चाहिए।
मांड्या जिले में 30,000 हेक्टेयर 'डीम्ड फॉरेस्ट' भूमि से पूरी आवश्यकता पूरी होने की संभावना।
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव 7 सितंबर को दिल्ली जाएंगे; 8 सितंबर को केंद्र के साथ निर्णायक बैठक।
तमिलनाडु परियोजना का विरोध कर रहा है; कावेरी जल बँटवारे को लेकर अंतर-राज्यीय विवाद जारी।

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरयास्वामी ने शुक्रवार, 4 सितंबर को बेंगलुरु स्थित विकास सौधा में सभी संबंधित जिलों के डिप्टी कमिश्नरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की और मेकेदातु बहुउद्देशीय परियोजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में तत्काल तेजी लाने का निर्देश दिया। मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस परियोजना की जल्द से जल्द आधारशिला रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु इस परियोजना का लगातार विरोध करता रहा है, जिससे यह कदम अंतर-राज्यीय जल विवाद के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक में मंत्री चेलुवरयास्वामी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के कारण जलमग्न होने वाली 5,096 हेक्टेयर वन भूमि के बदले मुआवजे के रूप में वैकल्पिक भूमि की पहचान बिना किसी देरी के की जाए और रिपोर्ट शीघ्र सौंपी जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस रिपोर्ट में रिहायशी इलाकों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए — केवल 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' और राजस्व विभाग की भूमि को ही प्रतिपूरक भूमि के रूप में चिह्नित किया जाए।

राजस्व विभाग ने पहले ही लगभग 20,000 हेक्टेयर भूमि की प्रारंभिक पहचान कर ली है, लेकिन वनीकरण के लिए उपयुक्त 5,000 हेक्टेयर भूमि प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराना अनिवार्य है।

जिलेवार तैयारी और नोडल अधिकारी

चामराजनगर, मांड्या और बेंगलुरु साउथ जिलों में 1:2 के अनुपात में प्रतिपूरक भूमि की पहचान की संभावना पर चर्चा हुई। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल मांड्या जिले में उपलब्ध लगभग 30,000 हेक्टेयर 'डीम्ड फॉरेस्ट' भूमि से ही संबंधित विभाग की मंजूरी मिलने पर पूरी आवश्यकता पूरी की जा सकती है।

मांड्या के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि जिले से 772 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने की तैयारी पहले ही पूरी हो चुकी है। चित्रदुर्ग, रायचूर, दावणगेरे, बागलकोट, यादगीर, हावेरी, गदग, विजयनगर, बेंगलुरु रूरल और चामराजनगर जिलों ने 'सी और डी' श्रेणी की भूमि का सर्वेक्षण पूरा कर रिपोर्ट सौंप दी है।

मंत्री ने मांड्या के डिप्टी कमिश्नर को राजस्व भूमि के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया और वन भूमि से जुड़ी प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए एक अतिरिक्त वरिष्ठ अधिकारी को भी नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।

केंद्र से बातचीत की तैयारी

राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव 7 सितंबर को दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 8 सितंबर को होने वाली केंद्र सरकार के साथ बातचीत में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्या 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' को प्रतिपूरक भूमि के रूप में स्वीकार किया जा सकता है — यह निर्णय परियोजना की आगे की गति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

तमिलनाडु का विरोध और अंतर-राज्यीय पेच

मेकेदातु परियोजना कावेरी नदी पर प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य बेंगलुरु सहित आसपास के क्षेत्रों को पेयजल एवं बिजली उपलब्ध कराना है। तमिलनाडु का तर्क है कि यह बाँध कावेरी जल के प्रवाह को प्रभावित करेगा और उसके हिस्से के पानी को रोकेगा। यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामलों की पृष्ठभूमि में और भी संवेदनशील हो जाता है। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार की यह सक्रियता ऐसे समय में आई है जब राज्य में जल संकट और बेंगलुरु की बढ़ती जनसंख्या की पेयजल माँग लगातार दबाव बना रही है।

आगे क्या होगा

8 सितंबर की केंद्रीय बैठक के नतीजे परियोजना के वन मंजूरी प्रक्रिया को निर्धारित करेंगे। यदि 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' को प्रतिपूरक भूमि के रूप में मान्यता मिलती है, तो मांड्या जिले की भूमि से अधिकांश आवश्यकता एकमुश्त पूरी हो सकती है। राज्य सरकार की ओर से आधारशिला रखने की समयसीमा अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन मंत्री के निर्देशों का स्वर स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार इसे शीघ्रता से आगे बढ़ाना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो असली परीक्षा 8 सितंबर की केंद्रीय बैठक में होगी। 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' को प्रतिपूरक भूमि के रूप में मान्यता मिलना या न मिलना — यह एक तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक निर्णय होगा जो परियोजना की पूरी समयरेखा को प्रभावित करेगा। तमिलनाडु का विरोध और सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले इस पूरी प्रक्रिया को और जटिल बनाते हैं। कर्नाटक की यह सक्रियता बेंगलुरु के जल संकट की वास्तविकता को दर्शाती है, लेकिन बिना अंतर-राज्यीय सहमति और केंद्रीय मंजूरी के आधारशिला की घोषणा केवल राजनीतिक संदेश बनकर रह सकती है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदातु परियोजना क्या है और यह क्यों विवादास्पद है?
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक सरकार की कावेरी नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय बाँध योजना है, जिसका उद्देश्य बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों को पेयजल और बिजली उपलब्ध कराना है। तमिलनाडु इसका विरोध करता है क्योंकि उसे आशंका है कि यह बाँध कावेरी के जल प्रवाह को प्रभावित करेगा और उसके हिस्से का पानी रोकेगा।
5,096 हेक्टेयर वन भूमि के लिए मुआवजे की व्यवस्था कैसे होगी?
परियोजना के कारण 5,096 हेक्टेयर वन भूमि जलमग्न होगी, जिसके बदले राज्य सरकार को प्रतिपूरक भूमि उपलब्ध करानी होगी। राजस्व विभाग ने 20,000 हेक्टेयर भूमि की प्रारंभिक पहचान की है, और मांड्या जिले में उपलब्ध 30,000 हेक्टेयर 'डीम्ड फॉरेस्ट' भूमि से पूरी आवश्यकता पूरी होने की संभावना है।
8 सितंबर की दिल्ली बैठक में क्या तय होगा?
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव 7 सितंबर को दिल्ली जाएंगे और 8 सितंबर को केंद्र सरकार के साथ बैठक होगी। इस बैठक में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 'डीम्ड फॉरेस्ट लैंड' को प्रतिपूरक भूमि के रूप में स्वीकार किया जा सकता है या नहीं, जो परियोजना की वन मंजूरी प्रक्रिया के लिए निर्णायक होगा।
मांड्या जिले की इस परियोजना में क्या भूमिका है?
मांड्या जिले के डिप्टी कमिश्नर को राजस्व भूमि के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। जिला 772 हेक्टेयर राजस्व भूमि उपलब्ध कराने के लिए तैयार है और यहाँ 30,000 हेक्टेयर 'डीम्ड फॉरेस्ट' भूमि उपलब्ध है, जो पूरी प्रतिपूरक भूमि की आवश्यकता को पूरा कर सकती है।
कर्नाटक के किन जिलों ने भूमि सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंप दी है?
चित्रदुर्ग, रायचूर, दावणगेरे, बागलकोट, यादगीर, हावेरी, गदग, विजयनगर, बेंगलुरु रूरल और चामराजनगर जिलों ने 'सी और डी' श्रेणी की भूमि का सर्वेक्षण पूरा कर उपलब्ध भूमि की रिपोर्ट सौंप दी है।
राष्ट्र प्रेस
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