30 अक्टूबर 2026
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वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल की ई-नीलामी संपन्न, हिमाचल सरकार को ₹2,000 करोड़ राजस्व का अनुमान

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वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल की ई-नीलामी संपन्न, हिमाचल सरकार को ₹2,000 करोड़ राजस्व का अनुमान

सारांश

25 साल के कानूनी संघर्ष के बाद हिमाचल सरकार ने शिमला के प्रतिष्ठित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल की ई-नीलामी सफलतापूर्वक संपन्न की। 47.1% राजस्व-साझाकरण के साथ 35 साल की लाइसेंस अवधि में ₹2,000 करोड़ का अनुमानित राजस्व — और संपत्ति का स्वामित्व राज्य के पास बरकरार।

मुख्य बातें

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को शिमला के वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल की प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी पूरी होने की घोषणा की।
नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1% राजस्व-साझाकरण प्रस्ताव प्राप्त हुआ।
लाइसेंस अवधि 35 वर्ष ; अनुमानित कुल राजस्व ₹2,000 करोड़ ; अग्रिम शुल्क ₹24 करोड़ ; न्यूनतम निवेश ₹50 करोड़ ।
राज्य को प्रतिमाह लगभग ₹3 करोड़ आवर्ती राजस्व मिलने का अनुमान; वार्षिक 3% वृद्धि।
लगभग 25 वर्षों के मुकदमे के बाद सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही से संपत्ति राज्य को मिली; ₹400 करोड़ नकद भी राज्य के नियंत्रण में।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे राज्य हित की रक्षा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि शिमला स्थित पाँच सितारा होटल 'वाइल्ड फ्लावर हॉल' के संचालन और प्रबंधन के लाइसेंस अधिकार देने के लिए आयोजित प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इस नीलामी में वार्षिक सकल राजस्व का 47.1 प्रतिशत का राजस्व-साझाकरण प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसे अधिकारियों ने अभूतपूर्व बताया है। उल्लेखनीय है कि यह उपलब्धि लगभग 25 वर्षों से चल रहे कानूनी विवाद के अंत के बाद संभव हो सकी है।

नीलामी से राज्य को क्या मिलेगा

सरकारी अनुमान के अनुसार, इस व्यवस्था से राज्य के खजाने में प्रतिमाह लगभग ₹3 करोड़ का आवर्ती राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। 35 वर्षों की लाइसेंस अवधि में इस राशि में प्रतिवर्ष 3 प्रतिशत की वृद्धि भी तय है।

सरकार के अनुसार, पूरी लाइसेंस अवधि में कुल अनुमानित राजस्व ₹2,000 करोड़ तक पहुँचने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, ₹24 करोड़ का अग्रिम लाइसेंस शुल्क और होटल संपत्ति में ₹50 करोड़ का न्यूनतम निवेश भी अनिवार्य किया गया है।

25 वर्षों के मुकदमे का अंत

यह सफलता एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली है। सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष न्यायिक कार्यवाही के बाद होटल की संपत्ति राज्य सरकार को वापस सौंपी गई। इसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने होटल की भूमि और संपत्ति, संयुक्त उद्यम कंपनी और उससे संबंधित परिसंपत्तियों एवं अधिकारों के साथ-साथ लगभग ₹400 करोड़ की नकद राशि पर भी पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण हासिल कर लिया है।

गौरतलब है कि यह मामला करीब एक चौथाई सदी तक विभिन्न अदालतों में लंबित रहा, और इसका अंतिम निपटारा राज्य के हक में हुआ।

मुख्यमंत्री सुक्खू की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि 'राज्य सरकार हर प्रमुख परियोजना और सार्वजनिक संपत्ति में राज्य के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।'

सुक्खू ने यह भी कहा कि 'राज्य सरकार राज्य और उसकी जनता के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगी और हर मामले को दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाना जारी रखेगी।' उन्होंने इस सफलता को लगातार राज्य हित में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका का परिणाम बताया।

संपत्ति का स्वामित्व और भविष्य की योजना

यह व्यवस्था लाइसेंस मॉडल पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि होटल और उसकी अंतर्निहित परिसंपत्तियों का पूर्ण स्वामित्व राज्य सरकार के पास बरकरार रहेगा, जबकि संचालन और प्रबंधन निजी लाइसेंसधारक के हाथों में होगा। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए अपनी पर्यटन संपत्तियों को सक्रिय रूप से मुद्रीकृत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

पारदर्शी ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से यह उपलब्धि राज्य के लिए एक नई मिसाल साबित हो सकती है — आगे अन्य सार्वजनिक संपत्तियों के मामलों में भी इसी मॉडल को अपनाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षण यह होगा कि 35 वर्षों की लंबी अवधि में लाइसेंसधारक इस प्रतिबद्धता पर कायम रहे या नहीं। ₹2,000 करोड़ का अनुमान आधार राजस्व मान्यताओं पर टिका है जो पर्यटन उद्योग की चक्रीय प्रकृति को देखते हुए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह सरकार के लिए जीत जरूर है, लेकिन क्रियान्वयन की निगरानी और अनुबंध की पारदर्शिता ही इसे वास्तविक सफलता बनाएगी।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल की ई-नीलामी क्या है?
हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला स्थित पाँच सितारा वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के संचालन और प्रबंधन के लाइसेंस अधिकार देने के लिए प्रतिस्पर्धी ई-नीलामी आयोजित की, जो 30 अक्टूबर 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इसमें वार्षिक सकल राजस्व का 47.1% राजस्व-साझाकरण प्रस्ताव प्राप्त हुआ।
हिमाचल सरकार को इस नीलामी से कितना राजस्व मिलेगा?
सरकारी अनुमान के अनुसार, 35 वर्षों की लाइसेंस अवधि में कुल लगभग ₹2,000 करोड़ राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। इसके अलावा ₹24 करोड़ का अग्रिम लाइसेंस शुल्क और ₹50 करोड़ का न्यूनतम निवेश भी अनिवार्य है; मासिक आवर्ती राजस्व लगभग ₹3 करोड़ अनुमानित है।
वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में 25 साल का मुकदमा किस बारे में था?
यह होटल की संपत्ति के स्वामित्व और अधिकारों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा कानूनी विवाद था। सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के बाद होटल की संपत्ति, संयुक्त उद्यम कंपनी और लगभग ₹400 करोड़ की नकद राशि राज्य सरकार को वापस मिली।
क्या नीलामी के बाद होटल का स्वामित्व बदलेगा?
नहीं। यह लाइसेंस मॉडल है, जिसमें होटल की भूमि और संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व राज्य सरकार के पास बरकरार रहेगा। केवल संचालन और प्रबंधन का अधिकार निजी लाइसेंसधारक को दिया गया है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसे 25 वर्षों के मुकदमे के बाद राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य और जनता के हितों पर कोई समझौता नहीं करेगी और हर मामले को दृढ़ता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाना जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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