हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ब्लैकमेल-साजिश मामले में महिला आरोपी की याचिका खारिज, उना अदालत में ट्रायल जारी रहेगा
सारांश
Key Takeaways
- न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने 27 अप्रैल 2026 को कुलजीत कौर उर्फ शालू की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज की।
- मामला 2020 में चिंतपूर्णी थाना, उना में दर्ज हुआ था; मुख्य आरोपी नरेंद्र कुमार पर दुष्कर्म और ब्लैकमेल के आरोप हैं।
- कुलजीत कौर कुरुक्षेत्र, हरियाणा में जिम ट्रेनर हैं और उन पर आपराधिक साजिश में शामिल होने का आरोप है।
- हाईकोर्ट ने माना कि ब्लैकमेल की रकम हिमाचल प्रदेश में प्राप्त हुई, इसलिए उना अदालत का अधिकार क्षेत्र वैध है।
- IPC धारा 120-बी, 384 और 506 के तहत तय आरोप बरकरार; उना की निचली अदालत में ट्रायल जारी रहेगा।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 27 अप्रैल 2026 को कथित ब्लैकमेल और आपराधिक साजिश से जुड़े एक संवेदनशील मामले में महिला आरोपी कुलजीत कौर उर्फ शालू की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने उना की निचली अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले का ट्रायल उना की अदालत में ही जारी रहेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
2020 में उना जिले के चिंतपूर्णी थाना क्षेत्र में दर्ज एफआईआर में गंभीर आरोप लगाए गए थे। शिकायत के अनुसार, मुख्य आरोपी नरेंद्र कुमार ने एक महिला के साथ दुष्कर्म किया और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरों व वीडियो के ज़रिए उसे ब्लैकमेल कर भारी रकम वसूली। आरोप है कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में जिम ट्रेनर के रूप में कार्यरत कुलजीत कौर ने इस पूरे घटनाक्रम में आरोपी का साथ दिया और आपराधिक साजिश में शामिल रही।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि कथित अपराध कुरुक्षेत्र, हरियाणा में हुआ, इसलिए हिमाचल प्रदेश की अदालत को इस मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है। उन्होंने खुद को झूठा फंसाए जाने का भी दावा किया। वहीं, राज्य सरकार और पीड़िता की ओर से इस दलील का कड़ा विरोध किया गया और कहा गया कि ब्लैकमेल के ज़रिए वसूली गई रकम हिमाचल प्रदेश में प्राप्त हुई, जिससे यहाँ की अदालत का अधिकार क्षेत्र स्थापित होता है।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्य — विशेषकर पीड़िता के बयान और बैंक लेन-देन — यह संकेत देते हैं कि अपराध कई चरणों में अलग-अलग स्थानों पर अंजाम दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी एक संबंधित स्थान की अदालत को सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है। गौरतलब है कि भले ही दुष्कर्म की घटना हरियाणा में हुई हो, ब्लैकमेल और धन वसूली का हिस्सा हिमाचल प्रदेश से जुड़ा हुआ है।
आरोप और धाराएँ
फैसले में यह भी कहा गया कि पीड़िता के बयान में कुलजीत कौर की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है और प्रथम दृष्टया उनके विरुद्ध आरोप बनते हैं। निचली अदालत द्वारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120-बी (आपराधिक साजिश), 384 (जबरन वसूली) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय करना सही पाया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उना की निचली अदालत में ट्रायल अब आगे बढ़ेगा। यह मामला डिजिटल साक्ष्य और अंतर-राज्यीय अपराध में अधिकार क्षेत्र के प्रश्न की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है।