पूर्वोत्तर में शांति-स्थिरता पर असम CM हिमंता सरमा और गजराज कोर GOC लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला की अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 18 जुलाई 2025 को गुवाहाटी में भारतीय सेना की गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में पूर्वोत्तर भारत में शांति, स्थिरता और सुरक्षा की मौजूदा स्थिति तथा आगे की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री सरमा ने बैठक को 'फायदेमंद' बताते हुए एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'गजराज कोर के GOC लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला के साथ अच्छी बातचीत हुई। इस क्षेत्र में गजराज कोर का गौरवशाली इतिहास रहा है और यह शांति और स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। आगे की राह पर चर्चा की गई।' हालाँकि उन्होंने बातचीत की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
अधिकारियों के अनुसार, इस वार्ता से असम सरकार और भारतीय सेना के बीच सुरक्षा चुनौतियों से निपटने तथा सीमावर्ती एवं दूरदराज के इलाकों में विकास कार्यों में सहयोग के प्रति करीबी तालमेल का संकेत मिलता है।
गजराज कोर की भूमिका और महत्व
असम के तेजपुर में मुख्यालय वाली गजराज कोर भारतीय सेना की उन प्रमुख ऑपरेशनल इकाइयों में से एक है जो पूर्वी सीमा की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। यह कोर केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है — बाढ़, प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन स्थितियों में नागरिक प्रशासन की सहायता करना तथा कल्याणकारी आउटरीच कार्यक्रम चलाना भी इसके दायित्वों में शामिल है।
पूर्वोत्तर में सुरक्षा की बदलती तस्वीर
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूर्वोत्तर में कानून-व्यवस्था की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। पिछले कुछ वर्षों में कई विद्रोही समूहों ने केंद्र सरकार और असम सरकार के साथ शांति समझौते किए हैं, जिससे क्षेत्र में हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। गौरतलब है कि यह सहयोग केवल सुरक्षा तक नहीं, बल्कि विकास और जन-कल्याण तक भी विस्तृत है।
सरकार और सेना की साझेदारी
इस बैठक ने राज्य प्रशासन और सशस्त्र बलों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा का केंद्र-बिंदु सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा पूर्वोत्तर में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करना था।
आगे क्या
बैठक के बाद किसी औपचारिक संयुक्त बयान की घोषणा नहीं हुई, लेकिन मुख्यमंत्री के बयानों से संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच समन्वय का यह सिलसिला जारी रहेगा। क्षेत्र में बढ़ते विकास कार्यों और शांति प्रक्रिया की निरंतरता को देखते हुए, सेना और राज्य सरकार के बीच इस प्रकार की नियमित उच्चस्तरीय बैठकें महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।