कांग्रेस-TMC विलय प्रस्ताव का हुसैन दलवई ने किया स्वागत, शरद पवार को भी जोड़ने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संभावित विलय के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम विपक्षी एकजुटता को मज़बूत करने में सहायक होगा। दलवई ने यह भी सुझाव दिया कि शरद पवार को भी इस एकता की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।
दलवई का बयान: विचारधारा एक, मतभेद बेमानी
दलवई ने अपने बयान में कहा, 'मेरी राय में यह प्रस्ताव अच्छा है। सोनिया गांधी के संबंध सबसे अच्छे हैं। देश में जिस स्तर पर राजनीति हो रही है, उसे देखते हुए आपसी झगड़ों और मतभेदों को किनारे रख देना चाहिए।' उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस और TMC की विचारधारा में कोई मूलभूत अंतर नहीं है, और यही बात शरद पवार की पार्टी पर भी लागू होती है।
उन्होंने आगे कहा, 'कांग्रेस की विचारधारा और TMC की विचारधारा में क्या अंतर है? कांग्रेस की विचारधारा और शरद पवार की विचारधारा में भी क्या अंतर है? मेरी राय में शरद पवार को भी साथ लाया जाना चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडी अलायंस को पुनर्जीवित करने और विपक्षी दलों के बीच तालमेल बढ़ाने की चर्चाएँ तेज़ हो रही हैं।
'ऑपरेशन टाइगर' को बताया साज़िश
दलवई ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा उद्धव ठाकरे गुट के नेताओं को तोड़ने की कथित रणनीति — जिसे मीडिया में 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया — पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे जानबूझकर फैलाई जा रही बातें करार दिया। दलवई ने कहा, 'वे जानबूझकर इस तरह की बातें फैला रहे हैं। असल में जो लोग चुनकर आए हैं, वे शिवसेना की वजह से चुने गए हैं, और इसमें इंडी अलायंस का भी बड़ा हाथ है।'
गौरतलब है कि यही 'ऑपरेशन टाइगर' शब्द अब पश्चिम बंगाल में TMC सांसदों को तोड़ने के कथित प्रयासों के संदर्भ में भी इस्तेमाल हो रहा है, जिसे दलवई ने राजनीतिक साज़िश का हिस्सा बताया।
ओवैसी के SIR बयान पर तीखी प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के विशेष गहन समीक्षा (SIR) पर दिए गए बयान पर दलवई ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'सिर्फ मुसलमानों को अलग करके देखना गलत है। जो कोई भी यहाँ पैदा हुआ है, वह नागरिक है और उसे इसमें शामिल किया जाना चाहिए।'
दलवई ने यह भी कहा कि परिवारों में अधिक बच्चे होने के पीछे धर्म नहीं, बल्कि चिकित्सा सुविधाओं और शिक्षा की कमी जैसे सामाजिक-आर्थिक कारण होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह स्थिति आदिवासी समेत कई समुदायों में देखी जाती है, और आज मुसलमानों में भी परिवार नियोजन को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है।
विभाजनकारी राजनीति पर चेतावनी
दलवई ने जनसांख्यिकी और नागरिकता के मुद्दों पर की जाने वाली विभाजनकारी राजनीति को देश की एकता के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सभी समुदायों को समान दृष्टि से देखना ज़रूरी है और ऐसी राजनीति से बचना चाहिए जो समाज को बाँटती हो।
कांग्रेस-TMC विलय की संभावना और इंडी अलायंस की मज़बूती पर आने वाले दिनों में विपक्षी नेताओं के बीच और चर्चाएँ होने की उम्मीद है।