आईडीएफ का दावा: ईरान की बहाल रक्षा प्रणालियाँ फिर तबाह, ऑपरेशन नस्र से पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने 8 जून 2026 को दावा किया कि उसके वायु सेना के दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ईरान की उन रणनीतिक रक्षा प्रणालियों को नष्ट कर दिया, जिन्हें ईरानी शासन ने ऑपरेशन रोरिंग लायन के बाद से फिर से बहाल करने की कोशिश की थी। IDF के अनुसार यह कार्रवाई सैन्य खुफिया जानकारी के आधार पर की गई।
मुख्य घटनाक्रम
IDF ने अपनी आधिकारिक एक्स (X) पोस्ट में बताया कि वायु सेना के दर्जनों लड़ाकू विमानों ने ईरान के कई अलग-अलग इलाकों में तैनात रक्षा प्रणालियों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। IDF का कहना है कि ये प्रणालियाँ ईरानी शासन द्वारा अपनी डिटेक्शन और रक्षा क्षमताओं को फिर से खड़ा करने के प्रयास का हिस्सा थीं। इस ताज़ा हमले में उन सभी पुनर्स्थापित रक्षा ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है।
ऑपरेशन रोरिंग लायन से संबंध
गौरतलब है कि ऑपरेशन रोरिंग लायन के दौरान IDF ने ईरानी शासन की रक्षा प्रणालियों पर गहराई तक जाकर हमला किया था, जिससे उनकी हवाई सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुँचा था। IDF के मुताबिक, ताज़ा हमले ने ईरानी हवाई क्षेत्र में इजरायली वायु सेना की कार्रवाई करने की स्वतंत्रता और क्षमता को और मजबूत किया है।
ईरान का पलटवार — ऑपरेशन नस्र
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 'ऑपरेशन नस्र' (ऑपरेशन विजय) शुरू किया। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज के अनुसार, IRGC ने एक बयान में कहा कि उसकी एयरोस्पेस फोर्स के जवानों ने सोमवार को इजरायल के नेवतिम और तेल नोफ एयरबेस पर हवाई हमले किए।
IRGC के बयान में कहा गया कि यह ऑपरेशन इजरायल की ओर से ईरान के तीन अलग-अलग इलाकों में स्थित कई रडार ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों के जवाब में किया गया। फार्स न्यूज के अनुसार, IRGC ने इसे इजरायली शासन द्वारा युद्धविराम उल्लंघन का परिणाम बताया, जिसमें ईरानी क्षेत्र के भीतर लक्ष्यों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया था।
बढ़ता तनाव और युद्ध के हालात
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार घातक हमले जारी हैं, जिसने एक बार फिर व्यापक सैन्य संघर्ष की आशंका पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता का कारण बन सकती है।
आगे क्या
दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी हमलों का यह सिलसिला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई कूटनीतिक हस्तक्षेप इस बढ़ते टकराव को रोक सकता है।