आईआईएम काशीपुर की बड़ी पहल: रेलवे, अस्पताल, पंचायती राज और शिक्षा में बनेंगे कुशल प्रोफेशनल

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आईआईएम काशीपुर की बड़ी पहल: रेलवे, अस्पताल, पंचायती राज और शिक्षा में बनेंगे कुशल प्रोफेशनल

सारांश

आईआईएम काशीपुर ने रेलवे, हॉस्पिटल, पंचायती राज और शिक्षा क्षेत्र के लिए विशेष कार्यकारी एमबीए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इस वर्ष ५४६ विद्यार्थियों को डिग्री मिली, जिनमें ३९.१९%25 महिलाएं हैं। ५०० सरकारी प्रिंसिपल-प्रोफेसर भी प्रशिक्षित किए गए।

Key Takeaways

  • आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए विशेष कार्यकारी एमबीए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं।
  • इस शैक्षणिक वर्ष ५४६ विद्यार्थियों को विभिन्न प्रबंधन और शोध कार्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं।
  • बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी ३९.१९%25 रही, जो पिछले वर्ष के ३३%25 से अधिक है।
  • लगभग ५०० सरकारी प्रिंसिपल व प्रोफेसरों को आधुनिक प्रबंधन और NEP 2020 क्रियान्वयन का प्रशिक्षण दिया गया।
  • ७३ लाइव प्रोजेक्ट्स में ३०० से अधिक विद्यार्थियों ने ग्रामीण विकास और MSME क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य किया।
  • पंचायती राज कार्यक्रम से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर ग्रामीण शासन को मजबूत करने की पहल की गई है।

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) काशीपुर ने एक महत्वाकांक्षी पहल के तहत रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा और पंचायती राज जैसे सरकारी क्षेत्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इस पहल का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकारों से जुड़े संस्थानों में दक्ष प्रबंधकीय नेतृत्व तैयार करना है, जो जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में सक्षम हों।

रेलवे और हॉस्पिटल के लिए विशेष कार्यकारी एमबीए

आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए अलग-अलग कार्यकारी एमबीए पाठ्यक्रम तैयार किए हैं। संस्थान के अनुसार रेलवे प्रबंधन पाठ्यक्रम मेट्रो रेल, भारतीय रेल, हाई स्पीड रेल और विभिन्न रेल नेटवर्क के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

यह पाठ्यक्रम सप्लाई चेन प्रबंधन, रेलवे प्रशासन और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कुशल संचालन में प्रशिक्षित करता है। भारत में रेलवे नेटवर्क के तेजी से विस्तार और वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड ट्रेनों के संचालन के मद्देनजर यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से प्रासंगिक है।

हॉस्पिटल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में केंद्रित है। इसमें मरीज सेवा, संसाधन प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं की दक्षता, डिजिटल हेल्थ सिस्टम और प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में ५०० सरकारी प्रिंसिपल और प्रोफेसर प्रशिक्षित

आईआईएम काशीपुर के निदेशक प्रोफेसर नीरज द्विवेदी के अनुसार संस्थान छात्रों को व्यक्तिगत करियर सफलता के साथ-साथ समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाने के लिए भी तैयार कर रहा है। इसी सोच के तहत शिक्षा क्षेत्र में भी संस्थान की सक्रिय भागीदारी है।

हाल ही में लगभग ५०० सरकारी स्कूल और कॉलेज के प्रिंसिपल व प्रोफेसरों को आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व और संस्थागत विकास से जुड़े कौशल में प्रशिक्षित किया गया। इस प्रशिक्षण में नई शिक्षा नीति (NEP) का प्रभावी क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षण तकनीकें और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में प्रबंधकीय कौशल की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। NEP 2020 के लागू होने के बाद शिक्षा प्रशासकों को नई तकनीकों और प्रक्रियाओं के अनुकूल बनाना अनिवार्य हो गया है।

पंचायती राज और ग्रामीण विकास को नई दिशा

संस्थान ने पंचायती राज कार्यक्रम से जुड़े जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को प्रशिक्षण देने की भी पहल की है। यह कदम ग्रामीण शासन को अधिक जवाबदेह और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अंतरिम अध्यक्ष संदीप सिंह के अनुसार संस्थान में इंजीनियरिंग, आईटी और सूचना प्रौद्योगिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल दाखिला ले रहे हैं। इस विविधता से संस्थान का शैक्षणिक माहौल और समृद्ध हो रहा है।

५४६ विद्यार्थियों को डिग्री, महिला भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि

इस शैक्षणिक वर्ष आईआईएम काशीपुर से कुल ५४६ विद्यार्थियों को विभिन्न प्रबंधन और शोध कार्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें २८० एमबीए, १६० एमबीए (एनालिटिक्स), ३४ कार्यकारी एमबीए, ५८ कार्यकारी एमबीए (एनालिटिक्स) और १४ पीएचडी के विद्यार्थी शामिल रहे।

विशेष रूप से उल्लेखनीय यह है कि एमबीए (एनालिटिक्स) पाठ्यक्रम में ७३ प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं। पूरे बैच में महिलाओं की हिस्सेदारी ३९.१९ प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष के ३३ प्रतिशत से काफी अधिक है। यह आंकड़ा प्रबंधन और डेटा विश्लेषण क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रमाण है।

इसके अलावा अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम के तहत ७३ लाइव प्रोजेक्ट्स में ३०० से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से ग्रामीण विकास और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य किया गया।

व्यापक प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं

आईआईएम काशीपुर की यह पहल भारत में प्रबंधन शिक्षा के पारंपरिक ढांचे को तोड़ती है। अब तक आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थान मुख्यतः कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए प्रबंधक तैयार करते थे, लेकिन अब इन्हें सार्वजनिक सेवाओं के उन्नयन से जोड़ा जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन कार्यक्रमों से प्रशिक्षित प्रोफेशनल सरकारी तंत्र में किस हद तक बदलाव ला पाते हैं और क्या अन्य आईआईएम भी इस मॉडल को अपनाएंगे।

Point of View

रेलवे और पंचायतें दशकों से खराब प्रबंधन की मार झेल रहे हैं, तो क्या एक संस्थान की यह पहल पर्याप्त है? असली परीक्षा तब होगी जब इन कार्यक्रमों से निकले प्रोफेशनल नौकरशाही की जड़ता से टकराएंगे। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य आईआईएम को भी इसे अपनाने पर विचार करना चाहिए — क्योंकि देश को कॉर्पोरेट मैनेजर से कहीं ज्यादा सक्षम सार्वजनिक प्रशासकों की जरूरत है।
NationPress
26/04/2026

Frequently Asked Questions

आईआईएम काशीपुर ने कौन-कौन से नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं?
आईआईएम काशीपुर ने रेलवे प्रबंधन और हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए विशेष कार्यकारी एमबीए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही पंचायती राज कार्यक्रम से जुड़े लोगों और सरकारी शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
आईआईएम काशीपुर का रेलवे एमबीए कोर्स किनके लिए उपयोगी है?
यह पाठ्यक्रम मेट्रो रेल, भारतीय रेल, हाई स्पीड रेल और विभिन्न रेल नेटवर्क में कार्यरत प्रोफेशनल्स के लिए उपयोगी है। यह सप्लाई चेन, रेलवे प्रशासन और बड़े प्रोजेक्ट्स के कुशल संचालन में प्रशिक्षण देता है।
आईआईएम काशीपुर में इस वर्ष कितने विद्यार्थियों को डिग्री मिली?
इस वर्ष आईआईएम काशीपुर से कुल ५४६ विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें २८० एमबीए, १६० एमबीए (एनालिटिक्स), ३४ कार्यकारी एमबीए, ५८ कार्यकारी एमबीए (एनालिटिक्स) और १४ पीएचडी शामिल हैं।
आईआईएम काशीपुर में महिला विद्यार्थियों की भागीदारी कितनी रही?
इस वर्ष के बैच में महिलाओं की कुल हिस्सेदारी ३९.१९ प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष के ३३ प्रतिशत से अधिक है। एमबीए (एनालिटिक्स) पाठ्यक्रम में तो ७३ प्रतिशत से अधिक छात्राएं शामिल रहीं।
आईआईएम काशीपुर ने सरकारी शिक्षकों को कैसे प्रशिक्षित किया?
संस्थान ने लगभग ५०० सरकारी स्कूल और कॉलेज के प्रिंसिपल व प्रोफेसरों को आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व और नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रशिक्षण दिया। इसमें डिजिटल शिक्षण तकनीकें और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।
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