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दारखोविन परमाणु संयंत्र पर अमेरिकी हमला: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र और आईएईए से कड़ी कार्रवाई की मांग की

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दारखोविन परमाणु संयंत्र पर अमेरिकी हमला: ईरान ने संयुक्त राष्ट्र और आईएईए से कड़ी कार्रवाई की मांग की

सारांश

ईरान ने दारखोविन परमाणु संयंत्र पर 19 जुलाई को हुए अमेरिकी मिसाइल हमले को जून 2026 से जारी श्रृंखला का 18वाँ हमला बताया है। ईरान का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, एनपीटी और आईएईए सिद्धांतों का उल्लंघन है — और संयुक्त राष्ट्र व आईएईए की चुप्पी हमलावरों को प्रोत्साहित कर रही है।

मुख्य बातें

19 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान के दारखोविन (करुन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर कई मिसाइलें दागीं।
ईरान के अनुसार, जून 2026 से यह 18वाँ ऐसा हमला है, जो अमेरिका और इज़रायल की संयुक्त कार्रवाई का हिस्सा है।
ईरान ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर , एनपीटी और आईएईए के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
19 जुलाई को ईरान के उपराष्ट्रपति एवं परमाणु ऊर्जा संगठन प्रमुख ने आईएईए महानिदेशक को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की माँग की।
ईरान ने चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय चुप्पी से शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा उपयोग पर वैश्विक भरोसा कमज़ोर होगा।

ईरान ने 19 जुलाई 2026 को दारखोविन (करुन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर अमेरिकी सेना द्वारा कई मिसाइलें दागे जाने की कड़ी निंदा की है। ईरान के स्थायी मिशन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी (सेफगार्ड) के तहत संचालित शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर होने वाले हमलों के विरुद्ध जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। ईरान के अनुसार, जून 2026 से अब तक यह 18वाँ ऐसा हमला है।

हमले का विवरण

ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए की रिपोर्टों के अनुसार, 19 जुलाई की सुबह अमेरिकी सेना ने खुज़ेस्तान प्रांत स्थित करुन (दारखोविन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर कई मिसाइलें दागीं। ईरान का कहना है कि दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र देश की प्रमुख नागरिक परमाणु परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय बिजली ग्रिड के लिए ऊर्जा उत्पादन करना है।

ईरान ने इस स्थल को अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों और तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया है। ईरानी पक्ष के अनुसार, यह हमला जून 2026 में अमेरिका और इज़रायल द्वारा शुरू किए गए संयुक्त हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है — और अब तक का 18वाँ ऐसा हमला है।

अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप

ईरान ने कहा है कि इस प्रकार के हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर, परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के उद्देश्यों व सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन हैं। ईरान का तर्क है कि परमाणु प्रसार के आरोप महज़ भ्रामक सूचनाओं पर आधारित हैं और असली इरादा उसकी नागरिक बुनियादी ढाँचे को नष्ट करना है।

ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ऐसे हमलों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों की चुप्पी बनी रही, तो हमलावर देशों का हौसला बढ़ेगा और दुनिया भर में शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग पर देशों का भरोसा कमज़ोर होगा, जिसका असर वैश्विक आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र और आईएईए से कार्रवाई की माँग

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएईए से इन हमलों की कड़ी निंदा करने और उन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। रिपोर्टों के अनुसार, 19 जुलाई को ही ईरान के उपराष्ट्रपति एवं परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख ने आईएईए महानिदेशक को पत्र लिखकर तत्काल और उचित कार्रवाई की माँग की, क्योंकि ये हमले वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा हैं।

व्यापक संदर्भ

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य-पूर्व में तनाव पहले से उच्च स्तर पर है। गौरतलब है कि जून 2026 से अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमलों की श्रृंखला चल रही है। ईरान का कहना है कि उसने 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' से इनकार किया है, जिसके जवाब में नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की निष्क्रियता ऐसे हमलों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहित करती है।

आगे क्या होगा

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में आईएईए के साथ लगातार संपर्क में है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रुख आने वाले दिनों में इस संकट की दिशा तय करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आईएईए इस मामले में कोई औपचारिक जाँच या निंदा प्रस्ताव लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद — जहाँ अमेरिका वीटो शक्ति रखता है — कोई प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। जून 2026 से 18 हमलों के बावजूद आईएईए की प्रतिक्रिया सीमित रही है, जो इस संस्था की संरचनात्मक कमज़ोरियों को उजागर करती है। यदि नागरिक परमाणु ढाँचे पर हमले बिना जवाबदेही के जारी रहे, तो यह वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था की साख के लिए दीर्घकालिक खतरा है — और केवल ईरान तक सीमित नहीं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दारखोविन परमाणु संयंत्र पर हमला कब और कैसे हुआ?
ईरानी रिपोर्टों के अनुसार, 19 जुलाई 2026 की सुबह अमेरिकी सेना ने खुज़ेस्तान प्रांत स्थित करुन (दारखोविन) परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल पर कई मिसाइलें दागीं। यह संयंत्र ईरान के बिजली ग्रिड के लिए ऊर्जा उत्पादन हेतु निर्माणाधीन था।
ईरान के अनुसार यह जून 2026 से कौन-सा हमला है?
ईरान का दावा है कि जून 2026 में अमेरिका और इज़रायल द्वारा संयुक्त हमले शुरू होने के बाद से दारखोविन पर हुआ यह 18वाँ हमला है। ईरान के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य उसकी नागरिक बुनियादी सुविधाओं को नष्ट करना है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र और आईएईए से क्या माँग की है?
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और आईएईए से इन हमलों की कड़ी निंदा करने और उन्हें रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है। 19 जुलाई को ईरान के उपराष्ट्रपति एवं परमाणु ऊर्जा संगठन प्रमुख ने आईएईए महानिदेशक को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की माँग की।
ईरान इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन क्यों मानता है?
ईरान का कहना है कि ये हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर , परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) और आईएईए के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन हैं, क्योंकि दारखोविन संयंत्र आईएईए की सुरक्षा निगरानी (सेफगार्ड) के तहत एक शांतिपूर्ण नागरिक परियोजना है।
इन हमलों का वैश्विक परमाणु व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों पर हमले बिना जवाबदेही के जारी रहे, तो दुनिया भर में देशों का परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग पर भरोसा कमज़ोर होगा। इससे वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था की विश्वसनीयता को दीर्घकालिक नुकसान पहुँच सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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