21 जुलाई 2026
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दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर अमेरिकी हमला: ईरान ने की कड़ी निंदा, जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी

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दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर अमेरिकी हमला: ईरान ने की कड़ी निंदा, जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी

सारांश

अमेरिका ने पहली बार किसी ईरानी परमाणु ऊर्जा संयंत्र — खुजेस्तान के दारखोविन — को सीधे निशाना बनाया। संयंत्र निर्माणाधीन था, इसलिए विकिरण का खतरा नहीं, लेकिन ईरान ने इसे 'गुंडागर्दी' बताकर जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर 19 जुलाई 2026 को अमेरिकी मिसाइलों और रॉकेटों से हमला हुआ — वर्ष 2026 में किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर यह पहला प्रत्यक्ष हमला है।
संयंत्र खुजेस्तान प्रांत में निर्माणाधीन था; कोई परमाणु सामग्री मौजूद न होने से विकिरण का खतरा नहीं।
परियोजना 2022 में शुरू हुई थी और 2030 तक पूरी होनी थी।
ईरान के AEOI ने हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताया; उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कड़ी निंदा की।
ईरान ने चेतावनी दी कि जब तक अमेरिकी हवाई हमले जारी रहेंगे, जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
बुशहर के आसपास भी सोमवार को हमले हुए; नुकसान का आकलन जारी है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 20 जुलाई 2026 को दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की और स्पष्ट किया कि यह संयंत्र पूरी तरह शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए निर्मित किया जा रहा था। उन्होंने इस हमले को अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन बताया।

हमले का विवरण

ईरान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत खुजेस्तान में निर्माणाधीन दारखोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट पर कई प्रोजेक्टाइल — जिनमें मिसाइलें और रॉकेट शामिल थे — दागे गए। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने 19 जुलाई (रविवार) को इस हमले की पुष्टि की। चूँकि यह संयंत्र अभी निर्माणाधीन अवस्था में था और वहाँ कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, इसलिए किसी प्रकार का विकिरण या रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ।

ऐतिहासिक संदर्भ

कथित तौर पर 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र को सीधे निशाना बनाया गया। इससे पहले जून 2025 में अमेरिका ने नतांज, फोर्दो और इस्फहान स्थित ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे — लेकिन वे परमाणु अनुसंधान व संवर्धन केंद्र थे, न कि बिजली उत्पादन संयंत्र। संघर्ष के शुरुआती 38 दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु रिएक्टरों और अनुसंधान केंद्रों को निशाना बनाया है।

गौरतलब है कि दारखोविन परियोजना का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह परियोजना ईरान की नागरिक ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं का अहम हिस्सा मानी जाती है।

बुशहर पर भी हमला

पिछले सप्ताह अमेरिका ने बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास के क्षेत्र पर भी हमला किया था। सोमवार को भी ईरान के दक्षिणी शहर बुशहर में कई स्थानों पर हमले हुए। बुशहर के गवर्नर ने बताया कि हमलों का दायरा और नुकसान का आकलन किया जा रहा है तथा प्रभावित इलाकों से विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।

ईरान की जवाबी चेतावनी

सोमवार को ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ उनकी जवाबी कार्रवाई नहीं रुकेगी। अधिकारियों के अनुसार, जब तक अमेरिका की ओर से हवाई हमले जारी रहेंगे, तब तक ईरान भी उसके सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता रहेगा। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा नीति का अनिवार्य हिस्सा बताया है।

AEOI ने दारखोविन हमले को 'अमेरिकी सरकार की गुंडागर्दी' और 'अंतरराष्ट्रीय कानून का घोर उल्लंघन' करार दिया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय परमाणु सुविधाओं पर हमलों के दीर्घकालिक खतरों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है।

आगे क्या होगा

दारखोविन पर हमला इस संघर्ष में एक नई और गंभीर सीमा का उल्लंघन माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) सहित वैश्विक निकायों की प्रतिक्रिया और संघर्ष-विराम की संभावनाओं पर आने वाले दिनों में स्थिति अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला कब और कैसे हुआ?
19 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान के खुजेस्तान प्रांत में निर्माणाधीन दारखोविन न्यूक्लियर पावर प्लांट पर मिसाइलों और रॉकेटों से हमला किया। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने इसकी पुष्टि की।
क्या दारखोविन हमले से विकिरण का खतरा था?
नहीं। चूँकि दारखोविन संयंत्र अभी निर्माणाधीन था और वहाँ कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, इसलिए किसी प्रकार का विकिरण या रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ।
दारखोविन परियोजना क्या है और यह कब तक पूरी होनी थी?
दारखोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र ईरान की नागरिक ऊर्जा योजना का हिस्सा है, जिसका निर्माण 2022 में शुरू हुआ था। इसे 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था।
ईरान ने इस हमले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने हमले की कड़ी निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। AEOI ने इसे 'गुंडागर्दी' करार दिया और ईरानी अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी।
क्या इससे पहले भी ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमले हुए हैं?
जून 2025 में अमेरिका ने नतांज, फोर्दो और इस्फहान की परमाणु सुविधाओं पर हमले किए थे, लेकिन वे संवर्धन व अनुसंधान केंद्र थे। दारखोविन पर हमला 2026 में किसी परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर पहला प्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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