जनगणना-2027: CM योगी ने UP में प्रथम चरण का शुभारंभ किया, 5.47 लाख कार्मिक तैनात
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 मई 2026 को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। 'हमारी जनगणना, हमारा विकास' की भावना के साथ उन्होंने मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य की शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास का सशक्त आधार है।
जनगणना-2027 में क्या है खास
मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराई जा रही है। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य संपादित होगा। इस बार दो उल्लेखनीय नई विशेषताएँ जोड़ी गई हैं — पहली बार जातीय गणना को जनगणना में सम्मिलित किया गया है, और पहली बार वन ग्रामों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।
आमजन को 7 मई से 21 मई 2026 तक स्वगणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके उपरांत जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य करेंगे। द्वितीय चरण में प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी।
UP की विशाल जनगणना: आँकड़ों में
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या लगभग 25 करोड़ 70 लाख है। यह जनगणना कार्य प्रदेश के 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों, 17 नगर निगमों, 745 अन्य नगरीय निकायों, 21 छावनी परिषदों, 57,694 ग्राम पंचायतों तथा लगभग 1 लाख 4 हजार राजस्व ग्रामों में संपादित किया जाएगा।
इस व्यापक कार्य के सफल संचालन हेतु लगभग 5.47 लाख कार्मिकों की तैनाती की जा रही है, जिनमें 4.50 लाख प्रगणक, 85 हजार सुपरवाइजर तथा 12 हजार राज्य एवं जनपद स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 5.35 लाख कार्मिकों को दोनों चरणों के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
डिजिटल तकनीक और पारदर्शिता पर जोर
योगी ने कहा कि वर्तमान समय में रियल टाइम डेटा अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और त्वरित बनाया गया है। इसके लिए एक विशेष जनगणना पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ग्राम एवं वार्ड स्तर तक कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब डेटा-आधारित नीति-निर्माण की माँग पहले से कहीं अधिक प्रबल है। गौरतलब है कि भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी और कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना स्थगित रही, जिससे डेढ़ दशक से अधिक का डेटा-अंतराल बन गया है।
विकास योजनाओं पर असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से प्राप्त सटीक आँकड़े आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने जोर दिया कि जनगणना यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि विकास की धारा में समाज का अंतिम व्यक्ति भी समान रूप से सहभागी बन सके।
नागरिकों से आह्वान
योगी ने प्रदेशवासियों से जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व मानते हुए सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति केवल एक ही स्थान पर अपनी गणना कराए तथा सही और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि विकास योजनाओं की सटीक एवं प्रभावी रूपरेखा तैयार की जा सके। आने वाले हफ्तों में स्वगणना विंडो बंद होने के बाद फील्ड कार्मिकों का घर-घर अभियान शुरू होगा, जो जनगणना-2027 की सफलता की असली कसौटी होगा।