जनगणना-2027: CM योगी ने UP में प्रथम चरण का शुभारंभ किया, 5.47 लाख कार्मिक तैनात

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जनगणना-2027: CM योगी ने UP में प्रथम चरण का शुभारंभ किया, 5.47 लाख कार्मिक तैनात

सारांश

डेढ़ दशक के डेटा-अंतराल को पाटने की दिशा में बड़ा कदम — CM योगी ने UP में जनगणना-2027 का आगाज़ किया। पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म, जातीय गणना और वन ग्रामों को शामिल करते हुए 5.47 लाख कार्मिकों की फौज मैदान में उतरेगी। 25 करोड़ 70 लाख की आबादी का यह डेटा भविष्य की नीतियों की नींव बनेगा।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 7 मई 2026 को लखनऊ में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया।
पहली बार जातीय गणना और वन ग्रामों को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
नागरिकों को 7 मई से 21 मई 2026 तक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्वगणना का विकल्प उपलब्ध।
UP की अनुमानित जनसंख्या 25 करोड़ 70 लाख ; जनगणना 75 जनपदों और 57,694 ग्राम पंचायतों में होगी।
लगभग 5.47 लाख कार्मिक तैनात — 4.50 लाख प्रगणक , 85 हजार सुपरवाइजर और 12 हजार अधिकारी।
भारत की अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी; 2021 की जनगणना कोविड के कारण स्थगित रही।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 मई 2026 को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में जनगणना-2027 के प्रथम चरण का औपचारिक शुभारंभ किया। 'हमारी जनगणना, हमारा विकास' की भावना के साथ उन्होंने मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य की शुरुआत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि समग्र, समावेशी और सुनियोजित विकास का सशक्त आधार है।

जनगणना-2027 में क्या है खास

मुख्यमंत्री योगी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में पहली बार डिजिटल जनगणना कराई जा रही है। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य संपादित होगा। इस बार दो उल्लेखनीय नई विशेषताएँ जोड़ी गई हैं — पहली बार जातीय गणना को जनगणना में सम्मिलित किया गया है, और पहली बार वन ग्रामों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है।

आमजन को 7 मई से 21 मई 2026 तक स्वगणना का विकल्प उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके उपरांत जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य करेंगे। द्वितीय चरण में प्रत्येक व्यक्ति की गणना की जाएगी।

UP की विशाल जनगणना: आँकड़ों में

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या लगभग 25 करोड़ 70 लाख है। यह जनगणना कार्य प्रदेश के 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों, 17 नगर निगमों, 745 अन्य नगरीय निकायों, 21 छावनी परिषदों, 57,694 ग्राम पंचायतों तथा लगभग 1 लाख 4 हजार राजस्व ग्रामों में संपादित किया जाएगा।

इस व्यापक कार्य के सफल संचालन हेतु लगभग 5.47 लाख कार्मिकों की तैनाती की जा रही है, जिनमें 4.50 लाख प्रगणक, 85 हजार सुपरवाइजर तथा 12 हजार राज्य एवं जनपद स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 5.35 लाख कार्मिकों को दोनों चरणों के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

डिजिटल तकनीक और पारदर्शिता पर जोर

योगी ने कहा कि वर्तमान समय में रियल टाइम डेटा अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और त्वरित बनाया गया है। इसके लिए एक विशेष जनगणना पोर्टल विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से ग्राम एवं वार्ड स्तर तक कार्यों की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब डेटा-आधारित नीति-निर्माण की माँग पहले से कहीं अधिक प्रबल है। गौरतलब है कि भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी और कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना स्थगित रही, जिससे डेढ़ दशक से अधिक का डेटा-अंतराल बन गया है।

विकास योजनाओं पर असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से प्राप्त सटीक आँकड़े आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। उन्होंने जोर दिया कि जनगणना यह सुनिश्चित करने का माध्यम है कि विकास की धारा में समाज का अंतिम व्यक्ति भी समान रूप से सहभागी बन सके।

नागरिकों से आह्वान

योगी ने प्रदेशवासियों से जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व मानते हुए सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति केवल एक ही स्थान पर अपनी गणना कराए तथा सही और तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराए, ताकि विकास योजनाओं की सटीक एवं प्रभावी रूपरेखा तैयार की जा सके। आने वाले हफ्तों में स्वगणना विंडो बंद होने के बाद फील्ड कार्मिकों का घर-घर अभियान शुरू होगा, जो जनगणना-2027 की सफलता की असली कसौटी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर इसकी विश्वसनीयता डेटा संग्रह की पद्धति और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। 5.47 लाख कार्मिकों की तैनाती प्रभावशाली है, किंतु 2021 की स्थगित जनगणना का अनुभव याद दिलाता है कि संख्याएँ काफी नहीं होतीं — क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति और निरंतरता ही निर्णायक होती है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनगणना-2027 का प्रथम चरण कब और कहाँ शुरू हुआ?
जनगणना-2027 का प्रथम चरण 7 मई 2026 को लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में CM योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू किया गया। इस चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य संपादित होगा।
डिजिटल जनगणना में स्वगणना कैसे करें और कब तक का समय है?
नागरिक 7 मई से 21 मई 2026 तक विशेष जनगणना पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकते हैं। इस अवधि के बाद जनगणना कार्मिक घर-घर जाकर सूचीकरण का कार्य करेंगे।
जनगणना-2027 में क्या नया है जो पहले नहीं था?
इस बार तीन प्रमुख नई विशेषताएँ हैं — पहली बार पूर्णतः डिजिटल जनगणना, पहली बार जातीय गणना का समावेश, और पहली बार वन ग्रामों को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाना। साथ ही ग्राम व वार्ड स्तर तक निगरानी के लिए विशेष पोर्टल भी विकसित किया गया है।
उत्तर प्रदेश में जनगणना के लिए कितने कार्मिक तैनात किए जाएँगे?
UP में लगभग 5.47 लाख कार्मिक तैनात किए जाएँगे, जिनमें 4.50 लाख प्रगणक, 85 हजार सुपरवाइजर और 12 हजार राज्य व जनपद स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा 5.35 लाख कार्मिकों को दोनों चरणों के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
भारत में पिछली जनगणना कब हुई थी और इतनी देरी क्यों हुई?
भारत में अंतिम जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी, जिससे डेढ़ दशक से अधिक का डेटा-अंतराल बन गया। अब जनगणना-2027 इस रिक्तता को भरने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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