7 अगस्त 2026
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जेपीएससी गड़बड़ी: सीआईडी ने आयोग के तीनों सदस्यों को समन जारी किए, 19 गिरफ्तार

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जेपीएससी गड़बड़ी: सीआईडी ने आयोग के तीनों सदस्यों को समन जारी किए, 19 गिरफ्तार

सारांश

14वीं जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जाँच अब आयोग के भीतर तक पहुँच गई है। सीआईडी ने तीनों मौजूदा सदस्यों को समन जारी किए हैं — पूर्व अध्यक्ष के इस्तीफे और 19 गिरफ्तारियों के बाद यह जाँच का सबसे बड़ा विस्तार है।

मुख्य बातें

सीआईडी ने 7 अगस्त को जेपीएससी के तीनों मौजूदा सदस्यों — डॉ.
अजिता भट्टाचार्य , डॉ.
जमाल अहमद — को पूछताछ के लिए समन जारी किए।
तीनों सदस्यों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी, जिसे राज्य कैबिनेट ने अगस्त 2021 में मंजूरी दी थी।
खियांग्ते से 4 दौर में 30 घंटे से अधिक पूछताछ हो चुकी है; उन्होंने 22 जुलाई को इस्तीफा दिया था।
जाँच में अब तक 19 लोग गिरफ्तार , जिनमें टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी मुख्य आरोपी हैं।
सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और कौन-कौन इसमें शामिल थे।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने 7 अगस्त को आयोग के तीनों मौजूदा सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किए। डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद से सोमवार से पूछताछ शुरू होगी। इस कदम के बाद जाँच का दायरा काफी व्यापक हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम

तीनों सदस्यों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी, जिसे इससे पहले अगस्त 2021 में राज्य कैबिनेट ने स्वीकृति दी थी। सीआईडी इन तीनों से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी लेगी।

इससे पहले जाँच एजेंसी जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से चार दौर में 30 घंटे से अधिक की पूछताछ कर चुकी है। 22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एजेंसी ने उनके आधिकारिक आवास की भी तलाशी ली थी।

अब तक 19 गिरफ्तारियाँ

जाँच के दौरान सीआईडी अब तक कुल 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सँभालने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी भी शामिल हैं। जाँच एजेंसी तिवारी को इस मामले में मुख्य आरोपी मानते हुए उनके कथित नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल कर रही है। कंपनी के कई अन्य अधिकारी और परीक्षा से जुड़े व्यक्ति भी गिरफ्तारी के दायरे में आ चुके हैं।

जाँच का बढ़ता दायरा

सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे। कथित अनियमितताओं की परतें उधेड़ते हुए एजेंसी अब सीधे आयोग के मौजूदा सदस्यों तक पहुँच गई है, जो इस जाँच को एक नए और संवेदनशील मोड़ पर ले आती है।

आगे क्या होगा

तीनों सदस्यों से पूछताछ के बाद सीआईडी यह निर्धारित करेगी कि आयोग के भीतर निर्णय-प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक या मिलीभगत हुई या नहीं। जाँच के नतीजे न केवल इस परीक्षा चक्र बल्कि झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी दूरगामी असर डाल सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

14वीं जेपीएससी परीक्षा गड़बड़ी मामला क्या है?
14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जाँच सीआईडी कर रही है। जाँच के दौरान परीक्षा संचालन कंपनी के अधिकारियों सहित अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आयोग के पूर्व अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है।
सीआईडी ने जेपीएससी के किन सदस्यों को समन जारी किए हैं?
सीआईडी ने आयोग की तीनों मौजूदा सदस्यों — डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद — को 7 अगस्त को पूछताछ के लिए समन जारी किए हैं। तीनों से सोमवार से पूछताछ शुरू होगी।
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा क्यों दिया?
22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सीआईडी ने उनके आधिकारिक आवास की भी तलाशी ली और उनसे चार दौर में 30 घंटे से अधिक पूछताछ की।
इस मामले में मुख्य आरोपी कौन है?
जाँच एजेंसी परीक्षा संचालन कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को मुख्य आरोपी मान रही है। सीआईडी उनके कथित नेटवर्क और अन्य संपर्कों की पड़ताल कर रही है।
इस जाँच का आगे क्या असर हो सकता है?
आयोग के मौजूदा सदस्यों से पूछताछ के बाद सीआईडी निर्धारित करेगी कि परीक्षा प्रक्रिया में संस्थागत स्तर पर कोई चूक या मिलीभगत हुई या नहीं। इसके नतीजे झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और भविष्य की परीक्षाओं के संचालन पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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