जेपीएससी गड़बड़ी: सीआईडी ने आयोग के तीनों सदस्यों को समन जारी किए, 19 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जाँच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने 7 अगस्त को आयोग के तीनों मौजूदा सदस्यों को पूछताछ के लिए समन जारी किए। डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद से सोमवार से पूछताछ शुरू होगी। इस कदम के बाद जाँच का दायरा काफी व्यापक हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
तीनों सदस्यों की नियुक्ति 2 सितंबर 2021 को हुई थी, जिसे इससे पहले अगस्त 2021 में राज्य कैबिनेट ने स्वीकृति दी थी। सीआईडी इन तीनों से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी लेगी।
इससे पहले जाँच एजेंसी जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से चार दौर में 30 घंटे से अधिक की पूछताछ कर चुकी है। 22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में सीआईडी की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एजेंसी ने उनके आधिकारिक आवास की भी तलाशी ली थी।
अब तक 19 गिरफ्तारियाँ
जाँच के दौरान सीआईडी अब तक कुल 19 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सँभालने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी भी शामिल हैं। जाँच एजेंसी तिवारी को इस मामले में मुख्य आरोपी मानते हुए उनके कथित नेटवर्क और संपर्कों की पड़ताल कर रही है। कंपनी के कई अन्य अधिकारी और परीक्षा से जुड़े व्यक्ति भी गिरफ्तारी के दायरे में आ चुके हैं।
जाँच का बढ़ता दायरा
सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे। कथित अनियमितताओं की परतें उधेड़ते हुए एजेंसी अब सीधे आयोग के मौजूदा सदस्यों तक पहुँच गई है, जो इस जाँच को एक नए और संवेदनशील मोड़ पर ले आती है।
आगे क्या होगा
तीनों सदस्यों से पूछताछ के बाद सीआईडी यह निर्धारित करेगी कि आयोग के भीतर निर्णय-प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक या मिलीभगत हुई या नहीं। जाँच के नतीजे न केवल इस परीक्षा चक्र बल्कि झारखंड में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी दूरगामी असर डाल सकते हैं।