झारखंड में तीन विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों की नियुक्ति, लोकभवन ने किया ऐलान

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झारखंड में तीन विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों की नियुक्ति, लोकभवन ने किया ऐलान

सारांश

झारखंड लोकभवन ने तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों की नियुक्ति की है। यह नियुक्तियां उच्च शिक्षा को नई दिशा देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

मुख्य बातें

नए कुलपतियों की नियुक्ति से उच्च शिक्षा को नई दिशा मिलेगी।
नियुक्ति प्रक्रिया में सतर्कता क्लीयरेंस अनिवार्य है।
कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।
शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने में मदद मिलेगी।
शोध कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।

रांची, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के लोकभवन ने राज्य के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में नए कुलपतियों (वीसी) की नियुक्ति की है। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार के आदेश पर जारी अधिसूचना के अनुसार, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव मनोहर को रांची स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है।

इसके साथ ही, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी डॉ एला कुमार को दी गई है, जो वर्तमान में इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वीमेन में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, नालंदा विश्वविद्यालय, राजगीर (बिहार) में प्रोफेसर एवं डीन के रूप में कार्यरत अभय कुमार सिंह को झारखंड राज्य मुक्त विश्वविद्यालय, रांची का कुलपति बनाया गया है।

लोकभवन द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि इन तीनों कुलपतियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष की अवधि के लिए होगा। हालांकि, यह कुलाधिपति की इच्छा पर भी निर्भर करेगा। नियुक्ति की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए यह आवश्यक किया गया है कि संबंधित उम्मीदवारों को अपने मूल संस्थानों से सतर्कता (विजिलेंस) क्लीयरेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

राज्य के इन विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों की नियुक्ति का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नए कुलपतियों के आने से इन संस्थानों में शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने और नए शोध कार्यों को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी। कार्मिक विभाग और लोकभवन ने आशा व्यक्त की है कि ये नियुक्तियां राज्य की उच्च शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शोध कार्यों को भी प्रोत्साहित करेगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नए कुलपतियों की नियुक्ति से विश्वविद्यालयों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
नए कुलपतियों की नियुक्ति से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्रों को नियमित करने और शोध कार्यों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
कुलपतियों का कार्यकाल कितना होगा?
तीनों कुलपतियों का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष होगा।
क्या नियुक्तियों की प्रक्रिया पारदर्शी है?
हां, लोकभवन ने नियुक्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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