सारंडा में नक्सली IED विस्फोट से घायल एक और हाथी की मौत, अब तक 5 हाथी गँवा चुके जान

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सारंडा में नक्सली IED विस्फोट से घायल एक और हाथी की मौत, अब तक 5 हाथी गँवा चुके जान

सारांश

सारंडा के जंगल में नक्सली IED की चपेट में आया एक और हाथी 10 दिन की जद्दोजहद के बाद जिंदगी की जंग हार गया। यह सारंडा में IED से मरने वाला पाँचवाँ हाथी है — बेजुबान जानवर उस जंग की कीमत चुका रहे हैं जो इंसानों के बीच है।

मुख्य बातें

सारंडा जंगल में नक्सली आईईडी की चपेट में आए हाथी ने 15 मई को दम तोड़ दिया।
हाथी 4 मई को कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास विस्फोट में घायल हुआ था।
वन विभाग के अनुसार, सारंडा में IED से अब तक पाँच हाथियों की मौत हो चुकी है।
सुरक्षा कारणों से हाथी को जंगल से बाहर नहीं ले जाया जा सका; मनोहरपुर के पशु चिकित्सकों ने वहीं इलाज किया।
इससे पहले जुलाई 2025 में हाथी 'गडरू' और 12 अक्टूबर को एक हथिनी की भी इसी तरह मौत हो चुकी है।
स्थानीय लोगों ने वन्यजीव सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की है।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हुए एक हाथी ने 15 मई को दम तोड़ दिया। वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम पिछले 10 दिनों से जंगल के भीतर ही उसे बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। यह सारंडा क्षेत्र में नक्सली आईईडी से मारे गए हाथियों की श्रृंखला में पाँचवाँ मामला है।

घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी

यह दुखद घटना 4 मई को उस समय शुरू हुई जब कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास हाथी का अगला पैर जमीन में दबे एक आईईडी पर पड़ गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी का पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया और वह चलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। इसके बाद सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के पास उसका उपचार शुरू किया गया।

इलाज की कोशिशें और चुनौतियाँ

मनोहरपुर प्रखंड के पशु चिकित्सकों की देखरेख में हाथी को नियमित दवाइयाँ और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। वन विभाग की ओर से उसे प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियाँ भी खिलाई जा रही थीं। हालाँकि, चूँकि यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा कारणों से हाथी को किसी अन्य सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है।

सारंडा में हाथियों पर IED का बढ़ता खतरा

वन विभाग के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी की चपेट में आकर अब तक पाँच हाथियों की मौत हो चुकी है। यह कोई पहली घटना नहीं है — 12 अक्टूबर को एक हथिनी भी आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद काल का ग्रास बन गई थी। इससे पहले जुलाई 2025 में छह साल के हाथी 'गडरू' ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था — वह 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था और उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने भी प्रयास किए थे।

आम जनता और वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश

इस दुखद अंत के बाद स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए ये जाल अब बेजुबान जानवरों के लिए काल बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने माँग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जाए।

आगे क्या होगा

वन विभाग हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सारंडा जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में IED की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक गंभीर और दीर्घकालिक चुनौती बन चुकी है, जिसके समाधान के लिए वन विभाग और सुरक्षा बलों के बीच समन्वित रणनीति की ज़रूरत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वन्यजीवों के लिए भी एक व्यवस्थित खतरा बन चुके हैं — और इस पर नीतिगत ध्यान नहीं दिया जा रहा। हर बार घटना के बाद आक्रोश जताया जाता है, पर IED की मैपिंग और निष्क्रियकरण को वन्यजीव संरक्षण की प्राथमिकता में शामिल करने की कोई ठोस रूपरेखा सामने नहीं आई है। 'गडरू' की मौत के बाद 'वनतारा' जैसी संस्थाओं को बुलाना प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण है — असली ज़रूरत है कि वन विभाग और सुरक्षा बल मिलकर संवेदनशील वन क्षेत्रों में IED की पहचान और निष्क्रियकरण का एक स्थायी तंत्र बनाएँ।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारंडा में हाथी की मौत कैसे हुई?
4 मई को कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास जमीन में दबे नक्सली IED पर हाथी का पैर पड़ने से जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे उसका पैर बुरी तरह घायल हो गया। 10 दिनों तक इलाज के बावजूद 15 मई को उसने दम तोड़ दिया।
सारंडा में अब तक कितने हाथी IED विस्फोट में मारे गए हैं?
वन विभाग के अनुसार सारंडा क्षेत्र में नक्सली IED की चपेट में आकर अब तक पाँच हाथियों की मौत हो चुकी है। इनमें जुलाई 2025 में 'गडरू' और 12 अक्टूबर को एक हथिनी की मौत भी शामिल है।
हाथी को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
सारंडा का यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा कारणों से हाथी को जंगल से बाहर किसी सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया। मनोहरपुर के पशु चिकित्सकों ने वहीं इलाज किया।
हाथी 'गडरू' कौन था और उसका क्या हुआ था?
गडरू छह साल का हाथी था जो 24 जून 2025 को सारंडा में IED विस्फोट में घायल हुआ था। उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने भी प्रयास किए, लेकिन जुलाई 2025 में इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों की क्या माँग है?
स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों ने माँग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ और नक्सलियों द्वारा बिछाए जाने वाले IED पर प्रभावी रोक लगाई जाए, क्योंकि सुरक्षाबलों के लिए बिछाए गए ये जाल अब बेजुबान जानवरों के लिए भी जानलेवा बन रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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