सारंडा में नक्सली IED विस्फोट से घायल एक और हाथी की मौत, अब तक 5 हाथी गँवा चुके जान
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हुए एक हाथी ने 15 मई को दम तोड़ दिया। वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीम पिछले 10 दिनों से जंगल के भीतर ही उसे बचाने की कोशिश करती रही, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। यह सारंडा क्षेत्र में नक्सली आईईडी से मारे गए हाथियों की श्रृंखला में पाँचवाँ मामला है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
यह दुखद घटना 4 मई को उस समय शुरू हुई जब कोयना वन प्रक्षेत्र के कोलभोंगा के पास हाथी का अगला पैर जमीन में दबे एक आईईडी पर पड़ गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि हाथी का पैर गंभीर रूप से जख्मी हो गया और वह चलने में पूरी तरह असमर्थ हो गया। इसके बाद सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के पास उसका उपचार शुरू किया गया।
इलाज की कोशिशें और चुनौतियाँ
मनोहरपुर प्रखंड के पशु चिकित्सकों की देखरेख में हाथी को नियमित दवाइयाँ और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। वन विभाग की ओर से उसे प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियाँ भी खिलाई जा रही थीं। हालाँकि, चूँकि यह क्षेत्र नक्सली गतिविधियों के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा कारणों से हाथी को किसी अन्य सुरक्षित स्थान या अस्पताल ले जाना संभव नहीं हो पाया। हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने की तैयारी चल रही है।
सारंडा में हाथियों पर IED का बढ़ता खतरा
वन विभाग के अनुसार, सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी की चपेट में आकर अब तक पाँच हाथियों की मौत हो चुकी है। यह कोई पहली घटना नहीं है — 12 अक्टूबर को एक हथिनी भी आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद काल का ग्रास बन गई थी। इससे पहले जुलाई 2025 में छह साल के हाथी 'गडरू' ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था — वह 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था और उसे बचाने के लिए गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने भी प्रयास किए थे।
आम जनता और वन्यजीव प्रेमियों में आक्रोश
इस दुखद अंत के बाद स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए ये जाल अब बेजुबान जानवरों के लिए काल बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने माँग की है कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जाए।
आगे क्या होगा
वन विभाग हाथी के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सारंडा जैसे संवेदनशील वन क्षेत्रों में IED की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण के लिए एक गंभीर और दीर्घकालिक चुनौती बन चुकी है, जिसके समाधान के लिए वन विभाग और सुरक्षा बलों के बीच समन्वित रणनीति की ज़रूरत है।