सारंडा जंगल में नक्सली आईईडी का कहर: दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल, पहले भी जा चुकी हैं दो हाथियों की जान
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) अब वन्यजीवों के लिए जानलेवा खतरा बन चुके हैं। 4 मई 2026 को सारंडा वन प्रमंडल के कोयना वन प्रक्षेत्र अंतर्गत कोलभोंगा क्षेत्र के पास एक दंतैल हाथी जमीन में दबे आईईडी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह इस जंगल में हाथियों से जुड़ी आईईडी विस्फोट की तीसरी बड़ी घटना है।
ताज़ा घटना का विवरण
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दंतैल हाथी का दाहिना अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ते ही जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे उसके पैर में गहरा घाव हो गया। घायल हाथी इस समय चलने में पूरी तरह असमर्थ बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद बचाव और उपचार की तैयारी शुरू हो गई है।
हालाँकि, बचाव अभियान में अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि अधिकारियों को आशंका है कि उस इलाके में अन्य आईईडी भी दबे हो सकते हैं। सुरक्षा बल पहले पूरे क्षेत्र की जाँच कर रहे हैं, ताकि रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से हाथी तक पहुँच सके और उपचार शुरू किया जा सके।
पहले भी हो चुकी हैं दो बड़ी घटनाएँ
सारंडा जंगल में हाथियों के आईईडी विस्फोट की चपेट में आने की यह पहली घटना नहीं है। 12 अक्टूबर को एक हथिनी आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद दम तोड़ गई थी। उसका दायाँ पैर बुरी तरह जख्मी था और संक्रमण फैलने के कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका था।
इससे पहले 24 जून 2025 को सारंडा में ही छह वर्षीय हाथी, जिसे ग्रामीण प्यार से 'गडरू' कहते थे, आईईडी विस्फोट में घायल हो गया था। गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने उसे बचाने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन 5 जुलाई 2025 को गडरू ने दम तोड़ दिया।
वन्यजीवों पर नक्सल हिंसा का असर
यह ऐसे समय में आया है जब सारंडा का जंगल एशियाई हाथियों के प्रमुख आवासों में से एक माना जाता है और वन विभाग यहाँ हाथी संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। नक्सलियों द्वारा बिछाए गए ये आईईडी मूल रूप से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के इरादे से लगाए जाते हैं, लेकिन कथित तौर पर ये विस्फोटक वन्यजीवों के लिए भी उतने ही घातक साबित हो रहे हैं। गौरतलब है कि सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है।
आगे क्या होगा
वन विभाग की टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर घायल हाथी तक पहुँचने की कोशिश में है। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया गया है। पिछली घटनाओं को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सारंडा के जंगलों में आईईडी को निष्क्रिय करने की माँग तेज़ कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।