सारंडा जंगल में नक्सली आईईडी का कहर: दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल, पहले भी जा चुकी हैं दो हाथियों की जान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सारंडा जंगल में नक्सली आईईडी का कहर: दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल, पहले भी जा चुकी हैं दो हाथियों की जान

सारांश

सारंडा के जंगल में नक्सलियों की बारूद अब हाथियों की जान ले रही है। तीसरी बड़ी घटना में एक दंतैल हाथी गंभीर रूप से घायल है — इससे पहले हथिनी और 'गडरू' नाम का छह साल का हाथी अपनी जान गँवा चुके हैं। सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए ये आईईडी अब एशियाई हाथियों के सबसे बड़े दुश्मन बन गए हैं।

मुख्य बातें

4 मई 2026 को सारंडा जंगल के कोलभोंगा क्षेत्र में एक दंतैल हाथी नक्सली आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुआ।
हाथी का दाहिना अगला पैर बुरी तरह जख्मी है और वह चलने में असमर्थ है।
इलाके में अन्य आईईडी दबे होने की आशंका के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में विशेष सावधानी बरती जा रही है।
इससे पहले 12 अक्टूबर को एक हथिनी और 5 जुलाई 2025 को 'गडरू' नामक छह वर्षीय हाथी आईईडी विस्फोट में जान गँवा चुके हैं।
गुजरात की संस्था 'वनतारा' ने गडरू को बचाने के लिए प्रयास किए थे, लेकिन सफलता नहीं मिली।

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए बिछाए गए आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) अब वन्यजीवों के लिए जानलेवा खतरा बन चुके हैं। 4 मई 2026 को सारंडा वन प्रमंडल के कोयना वन प्रक्षेत्र अंतर्गत कोलभोंगा क्षेत्र के पास एक दंतैल हाथी जमीन में दबे आईईडी की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया। यह इस जंगल में हाथियों से जुड़ी आईईडी विस्फोट की तीसरी बड़ी घटना है।

ताज़ा घटना का विवरण

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दंतैल हाथी का दाहिना अगला पैर जमीन में दबे आईईडी पर पड़ते ही जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे उसके पैर में गहरा घाव हो गया। घायल हाथी इस समय चलने में पूरी तरह असमर्थ बताया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद बचाव और उपचार की तैयारी शुरू हो गई है।

हालाँकि, बचाव अभियान में अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है, क्योंकि अधिकारियों को आशंका है कि उस इलाके में अन्य आईईडी भी दबे हो सकते हैं। सुरक्षा बल पहले पूरे क्षेत्र की जाँच कर रहे हैं, ताकि रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से हाथी तक पहुँच सके और उपचार शुरू किया जा सके।

पहले भी हो चुकी हैं दो बड़ी घटनाएँ

सारंडा जंगल में हाथियों के आईईडी विस्फोट की चपेट में आने की यह पहली घटना नहीं है। 12 अक्टूबर को एक हथिनी आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद दम तोड़ गई थी। उसका दायाँ पैर बुरी तरह जख्मी था और संक्रमण फैलने के कारण तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका था।

इससे पहले 24 जून 2025 को सारंडा में ही छह वर्षीय हाथी, जिसे ग्रामीण प्यार से 'गडरू' कहते थे, आईईडी विस्फोट में घायल हो गया था। गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने उसे बचाने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन 5 जुलाई 2025 को गडरू ने दम तोड़ दिया।

वन्यजीवों पर नक्सल हिंसा का असर

यह ऐसे समय में आया है जब सारंडा का जंगल एशियाई हाथियों के प्रमुख आवासों में से एक माना जाता है और वन विभाग यहाँ हाथी संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहा है। नक्सलियों द्वारा बिछाए गए ये आईईडी मूल रूप से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के इरादे से लगाए जाते हैं, लेकिन कथित तौर पर ये विस्फोटक वन्यजीवों के लिए भी उतने ही घातक साबित हो रहे हैं। गौरतलब है कि सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का केंद्र रहा है।

आगे क्या होगा

वन विभाग की टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर घायल हाथी तक पहुँचने की कोशिश में है। विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया गया है। पिछली घटनाओं को देखते हुए वन्यजीव संरक्षण संगठनों ने सारंडा के जंगलों में आईईडी को निष्क्रिय करने की माँग तेज़ कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिन्हें निष्क्रिय करने की कोई ठोस योजना अभी तक सामने नहीं आई है। वन विभाग और सुरक्षा बलों के बीच समन्वय की कमी हर बार रेस्क्यू ऑपरेशन को जटिल बनाती है। जब तक सारंडा को आईईडी-मुक्त नहीं किया जाता, यहाँ के हाथी — और वन कर्मी भी — खतरे में रहेंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारंडा जंगल में हाथी आईईडी विस्फोट में कैसे घायल हुआ?
4 मई 2026 को कोलभोंगा क्षेत्र में एक दंतैल हाथी का दाहिना अगला पैर जमीन में दबे नक्सली आईईडी पर पड़ गया, जिससे जोरदार विस्फोट हुआ और उसके पैर में गहरा घाव हो गया। हाथी अभी चलने में पूरी तरह असमर्थ है और वन विभाग की टीम उपचार की तैयारी में है।
सारंडा में इससे पहले कितने हाथी आईईडी विस्फोट में मारे गए हैं?
इससे पहले दो बड़ी घटनाएँ हो चुकी हैं — 12 अक्टूबर को एक हथिनी आईईडी में घायल होने के बाद संक्रमण से मर गई, और 5 जुलाई 2025 को 'गडरू' नामक छह वर्षीय हाथी ने दम तोड़ा, जो 24 जून 2025 को विस्फोट में घायल हुआ था।
'गडरू' हाथी कौन था और उसे बचाने के लिए क्या प्रयास हुए?
'गडरू' सारंडा जंगल का छह साल का हाथी था, जिसे ग्रामीण प्यार से यह नाम देते थे। 24 जून 2025 को आईईडी विस्फोट में घायल होने के बाद गुजरात की संस्था 'वनतारा' की मेडिकल टीम ने उसे बचाने के लिए अथक प्रयास किए, लेकिन 5 जुलाई 2025 को उसकी मौत हो गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी क्यों हो रही है?
अधिकारियों को आशंका है कि कोलभोंगा क्षेत्र में अन्य आईईडी भी दबे हो सकते हैं। इसलिए सुरक्षा बल पहले पूरे इलाके की जाँच कर रहे हैं, ताकि रेस्क्यू और मेडिकल टीम सुरक्षित तरीके से घायल हाथी तक पहुँच सके।
नक्सली आईईडी वन्यजीवों के लिए क्यों खतरनाक हैं?
नक्सलियों द्वारा ये आईईडी मूल रूप से सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए जंगल की पगडंडियों पर बिछाए जाते हैं। चूँकि हाथी और अन्य वन्यजीव इन्हीं रास्तों से गुजरते हैं, वे कथित तौर पर इन विस्फोटकों की चपेट में आ जाते हैं, जिससे गंभीर चोट या मौत होती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले