1 सितंबर 2026
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जेपी एनआईसी लीज विवाद: अखिलेश यादव ने एलडीए को बताया 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी', योगी सरकार पर कमीशनखोरी का आरोप

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जेपी एनआईसी लीज विवाद: अखिलेश यादव ने एलडीए को बताया 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी', योगी सरकार पर कमीशनखोरी का आरोप

सारांश

₹800 करोड़ से बना जेपी एनआईसी अब 30 साल की लीज पर निजी हाथों में जा रहा है — और अखिलेश यादव ने एलडीए को 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी' का नाम देकर सीधा सवाल दागा: इतनी सफाई क्यों? यह विवाद यूपी में सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण की बड़ी बहस की चिंगारी बन सकता है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 1 सितंबर को एक्स पर पोस्ट कर जेपी एनआईसी लीज मामले में योगी सरकार और एलडीए पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
सपा प्रमुख ने एलडीए का नाम बदलकर 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी' रखने का व्यंग्यात्मक सुझाव दिया।
जेपी एनआईसी को अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में ₹800 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार किया गया था, जो लंबे समय तक संचालन में नहीं आ सका।
योगी सरकार ने इसे 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को देने का फैसला किया है; सरकार का तर्क है कि इससे राजस्व और विकास सुनिश्चित होगा।
अखिलेश यादव ने इस फैसले को सार्वजनिक संपत्ति निजी हाथों में सौंपने का प्रयास बताते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 1 सितंबर को एक बार फिर जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपी एनआईसी) को 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपे जाने के मुद्दे पर योगी सरकार और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) को घेरा। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर एलडीए की उस रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए, जिसे सरकार ने इस फैसले की सफाई में पेश किया है, और कमीशनखोरी तथा भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।

अखिलेश का सीधा हमला

अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा: 'ये तो एलडीए ने सच ही कहा कि अगर जेपीएनआईसी भाजपा सरकार चलाएगी तो हज़ारों करोड़ का नुक़सान होगा क्योंकि सारी कमाई ये कमीशनख़ोर भाजपाई और उनके भ्रष्ट अधिकारी खा जाएंगे।' उन्होंने आगे कहा कि एलडीए के अधिकारियों से यह पूछा जाना चाहिए कि क्या कोई व्यापारी घाटे का सौदा करेगा — यानी भाजपा और उनके अधिकारियों को कमीशन भी खिलाएगा और घाटा भी उठाएगा।

सपा प्रमुख ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जनता अब एलडीए से पूछ रही है: 'इस रिपोर्ट को बनाने के लिए आपको कितना प्रतिशत कमीशन मिला?' उन्होंने सुझाया कि एलडीए को अपना नाम बदलकर 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी' कर लेना चाहिए।

जनता के सवाल और राजनीतिक टकराव

अखिलेश यादव ने कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि मुख्यमंत्री और उनके सरकारी विभाग जेपीएनआईसी को लेकर इतनी सफाई क्यों दे रहे हैं — 'जनता को ऐसा क्यों लगा कि कुछ तो गड़बड़ है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है।

जेपी एनआईसी का पृष्ठभूमि और लीज का फैसला

गौरतलब है कि जेपी एनआईसी को अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में ₹800 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार किया गया था। हालांकि, यह परियोजना लंबे समय तक संचालन में नहीं आ सकी। योगी सरकार ने अब अधूरे कार्यों को पूरा कराने और केंद्र के संचालन के लिए इसे 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को देने का निर्णय लिया है।

सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से केंद्र का विकास और दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित होगा, साथ ही एलडीए को नियमित राजस्व भी प्राप्त होगा। वहीं, अखिलेश यादव इस फैसले को सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश बताते हुए पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

विपक्ष की माँग और आगे की राह

सपा की ओर से इस मामले में स्वतंत्र जाँच और लीज प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की माँग उठाई जा रही है। यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के व्यापक सवाल को भी केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विधानसभा और सड़क — दोनों मोर्चों पर सियासी गर्मी बढ़ने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और अब योगी सरकार 30 साल के लिए निजी हाथों को सौंप रही है — दोनों पक्षों के पास जवाब देने को है। असली सवाल यह है कि लीज की शर्तें, चयन प्रक्रिया और राजस्व वितरण का ब्यौरा अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ। पारदर्शिता के बिना, दोनों तरफ के आरोप-प्रत्यारोप जनता को तथ्य नहीं, सिर्फ सियासत देते हैं।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपी एनआईसी क्या है और यह विवाद में क्यों है?
जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपी एनआईसी) लखनऊ में ₹800 करोड़ से अधिक की लागत से बनाई गई एक सार्वजनिक परियोजना है, जो अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में तैयार हुई लेकिन लंबे समय तक संचालन में नहीं आ सकी। अब योगी सरकार ने इसे 30 साल की लीज पर निजी कंपनियों को देने का फैसला किया है, जिस पर सपा ने कड़ा विरोध जताया है।
अखिलेश यादव ने एलडीए पर क्या आरोप लगाए हैं?
अखिलेश यादव ने एलडीए पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि एलडीए की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है और इसे बनाने के लिए कमीशन लिया गया। उन्होंने व्यंग्यात्मक रूप से एलडीए का नाम 'लखनऊ डिस्ट्रक्शन अथॉरिटी' रखने का सुझाव दिया।
योगी सरकार ने जेपी एनआईसी को लीज पर देने का क्या तर्क दिया है?
योगी सरकार का कहना है कि 30 साल की लीज व्यवस्था से केंद्र के अधूरे कार्य पूरे होंगे, दीर्घकालिक संचालन सुनिश्चित होगा और एलडीए को नियमित राजस्व प्राप्त होगा। सरकार इसे सार्वजनिक हित में एक व्यावहारिक कदम बता रही है।
क्या जेपी एनआईसी लीज मामले में कोई जाँच होगी?
अभी तक किसी आधिकारिक जाँच की घोषणा नहीं हुई है। सपा की ओर से स्वतंत्र जाँच और लीज प्रक्रिया की पारदर्शी समीक्षा की माँग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला यूपी में सार्वजनिक संपत्तियों के निजीकरण के व्यापक सवाल को केंद्र में ले आया है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और जन-आंदोलन दोनों स्तरों पर गर्माने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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