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सावन के पहले सोमवार पर कालकाजी मंदिर में जलाभिषेक की तैयारी पूरी, 3 अगस्त को उमड़ेगी भीड़

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सावन के पहले सोमवार पर कालकाजी मंदिर में जलाभिषेक की तैयारी पूरी, 3 अगस्त को उमड़ेगी भीड़

सारांश

सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को — और दिल्ली का कालकाजी मंदिर पूरी तरह तैयार है। पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने जलाभिषेक की वैदिक विधि और समुद्र मंथन से जुड़ी पौराणिक पृष्ठभूमि साझा की। श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ अपेक्षित है।

मुख्य बातें

कालकाजी मंदिर में 3 अगस्त को सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष आयोजन।
पूजा का आरंभ गणेश, माता अंबिका, कार्तिकेय और नंदी महाराज की वंदना से होगा, फिर वैदिक मंत्रों के साथ शिव जलाभिषेक।
पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के विष-ताप को शांत करने के लिए देवताओं ने शिव का जलाभिषेक किया — तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
माता पार्वती ने सावन में तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया — इसलिए सुहागिन और अविवाहित दोनों महिलाएँ इस माह व्रत रखती हैं।
इसी माह हरियाली तीज, मंगला गौरी व्रत, रक्षाबंधन और देशव्यापी कांवड़ यात्रा भी संपन्न होती है।

दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में सावन के पहले सोमवार3 अगस्त — को भगवान शिव के जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की विशेष तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुँचेंगे।

पूजा का क्रम और विधि-विधान

मंदिर के पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूजा का आरंभ भगवान गणेश, माता अंबिका, भगवान कार्तिकेय और नंदी महाराज की वंदना से होगा। तत्पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का ध्यान कर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक संपन्न किया जाएगा।

सावन में जलाभिषेक की पौराणिक पृष्ठभूमि

सुरेंद्रनाथ अवधूत के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान उत्पन्न हलाहल विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव से उनके शरीर का ताप अत्यधिक बढ़ गया, जिसके बाद समस्त देवी-देवताओं ने मिलकर उनका जलाभिषेक किया और उन्हें शीतलता प्रदान की। इसी प्रसंग से सावन माह में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है।

माता पार्वती की तपस्या और सावन का महत्त्व

पीठाधीश्वर ने यह भी बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने सावन मास में कठोर तप और साधना करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण यह महीना शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। सुहागिन महिलाएँ अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएँ मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव की उपासना करती हैं।

सावन के प्रमुख पर्व और कांवड़ यात्रा

सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि सावन केवल शिव भक्ति तक सीमित नहीं है — इसी माह में हरियाली तीज, मंगला गौरी व्रत और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व भी मनाए जाते हैं। इसके साथ ही देशभर से कांवड़िए पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर अपने-अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से जल अर्पित करने पर भगवान शिव भक्तों की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब राजधानी दिल्ली में सावन को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम किए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि धार्मिक शिक्षा के सक्रिय मंच बन रही हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालकाजी मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर क्या विशेष होगा?
3 अगस्त को सावन के पहले सोमवार पर कालकाजी मंदिर में वैदिक मंत्रों के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाएगा। पूजा का आरंभ गणेश, माता अंबिका, कार्तिकेय और नंदी महाराज की वंदना से होगा।
सावन में जलाभिषेक क्यों किया जाता है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने हलाहल विष पीकर संसार की रक्षा की थी, जिससे उनके शरीर का ताप बढ़ गया। देवताओं ने जलाभिषेक कर उन्हें शीतलता दी — तभी से यह परंपरा सावन में प्रचलित है।
सावन माह में महिलाएँ व्रत क्यों रखती हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने सावन में कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण सुहागिन महिलाएँ अखंड सौभाग्य और अविवाहित कन्याएँ मनचाहे जीवनसाथी की कामना से इस माह व्रत रखती हैं।
सावन माह में कौन-कौन से प्रमुख त्योहार आते हैं?
सावन में हरियाली तीज, मंगला गौरी व्रत और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। इसके अलावा देशभर में कांवड़ यात्रा भी इसी माह संपन्न होती है, जिसमें श्रद्धालु पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं।
कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर कौन हैं?
कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर सुरेंद्रनाथ अवधूत हैं, जिन्होंने सावन के पहले सोमवार की पूजा विधि और इस माह के धार्मिक महत्त्व की विस्तृत जानकारी साझा की।
राष्ट्र प्रेस
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